
बिहार के प्रशासनिक गलियारों और सत्ता के केंद्रों से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने सूबे की पूरी ब्यूरोक्रेसी को हिलाकर रख दिया है। बिहार के बहुचर्चित और करोड़ों रुपये के सरकारी टेंडर फिक्सिंग घोटाले (Bihar Tender Scam) में आज जांच एजेंसियों के लिए एक बहुत बड़ा और निर्णायक दिन साबित हो रहा है। विशेष निगरानी इकाई (SVU) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के आला अधिकारियों की संयुक्त टीमों ने इस मामले में एक साथ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच एजेंसियों के निशाने पर इस बार केवल छोटे मोहरे नहीं, बल्कि सूबे के दो बेहद रसूखदार वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी और टेंडर सिंडिकेट के किंगपिन रिशुश्री (Rishu Shree) के काले कारोबार को संभालने वाली डमी कंपनी के निदेशकों के आलीशान ठिकाने हैं। इस औचक और कड़क एक्शन के बाद से पटना से लेकर दिल्ली तक के प्रशासनिक हल्कों में भारी खलबली मच गई है।
जानिए क्या है बिहार का यह करोड़ों का टेंडर फिक्सिंग खेल और कैसे खुली परतें
यह पूरा मामला बिहार के जल संसाधन विभाग, बुडको (BUDCO) और नगर विकास विभाग जैसे मलाईदार सरकारी महकमों में नियमों को ताक पर रखकर टेंडर आवंटित करने से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों की अब तक की कड़ाई से हुई पूछताछ में यह खुलासा हुआ है कि रिशुश्री नामक एक रसूखदार ठेकेदार ने अधिकारियों के साथ मिलकर एक ऐसा सिंडिकेट बनाया था, जो टेंडर की शर्तों में जानबूझकर बदलाव करवा देता था। इस साजिश के तहत देश की बड़ी-बड़ी राष्ट्रीय निर्माण कंपनियों को रेस से बाहर कर दिया जाता था और सारे बड़े प्रोजेक्ट्स रिशुश्री की डमी कंपनियों या उसके करीबियों को सौंप दिए जाते थे। इस खेल के बदले अफसरों को करोड़ों रुपये का मोटा कमीशन और विदेश दौरों का ऐशो-आराम परोसा जा रहा था, जिसकी परतें अब एक-एक कर उधड़ रही हैं।
जांच के रडार पर दो सीनियर आईएएस अधिकारी, आज की पूछताछ में टूटेंगे कई बड़े राज
आज की इस ताबड़तोड़ जांच और छापेमारी का मुख्य केंद्र वे दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं, जिनके डिजिटल हस्ताक्षर और प्रशासनिक रसूख का इस्तेमाल कर इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया गया। सूत्रों से मिली इनसाइड जानकारी के मुताबिक, जांच अधिकारियों की टीम इन अफसरों के बैंक खातों, बेनामी संपत्तियों के कागजात और रिशुश्री के साथ हुए मोबाइल चैट और कॉल डिटेल्स को आमने-सामने रखकर कड़ी पूछताछ कर रही है। इससे पहले भी इस घोटाले से जुड़े कई इंजीनियरों और एक आईएएस संजीव हंस के करीबियों के ठिकानों से करीब 11 करोड़ रुपये से अधिक की बेहिसाब नकदी और भारी मात्रा में सोना-चांदी बरामद किया जा चुका है, जिसके बाद से ही इन दोनों सेवारत आईएएस अधिकारियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।
रिशुश्री की फर्जी कंपनियों के निदेशकों के घरों पर छापेमारी: वित्तीय चोट से टूटेगी सिंडिकेट की कमर
जांच एजेंसियों का दूसरा सबसे बड़ा प्रहार रिशुश्री के वित्तीय साम्राज्य को संभालने वाली कंपनियों पर हुआ है। रिशुश्री ने ‘मातृस्वा’ और ‘रिलायबल इंटरप्राइजेज’ जैसी करीब 8 फर्जी और शेल कंपनियां बना रखी थीं, जिनमें अपने करीबी रिश्तेदारों और सहयोगियों को निदेशक (Director) बना रखा था। आज सुबह से ही इन डमी निदेशकों के घरों पर दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। अधिकारियों को शक है कि टेंडर से होने वाली अवैध काली कमाई (कमीशन का पैसा) को इन्हीं कंपनियों के खातों में वैध बनाकर खपाया जा रहा था। इस भारी-भरकम वित्तीय चोट से टेंडर माफियाओं के इस पूरे गिरोह की कमर पूरी तरह से टूट चुकी है।
एआई जनरेटिव सर्च और बिहार प्रशासनिक हलचल पर लोकल ऑप्टिमाइजेशन का बड़ा प्रभाव
आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और लीगल एआई सर्च के ताजा आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और गया जैसे बिहार के तमाम प्रमुख जिलों और दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्रों में इस हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार के मामले को लेकर इंटरनेट पर सर्च वॉल्यूम अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया है। लोग लगातार सोशल मीडिया और सर्च इंजनों पर इस मामले में शामिल आईएएस अधिकारियों के नाम और जब्त की गई कुल संपत्ति का लाइव ब्योरा तलाश रहे हैं। राज्य सरकार के वरिष्ठ सूत्रों का भी साफ कहना है कि भ्रष्टाचार के मामले में मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत किसी भी बड़ी मछली को बख्शा नहीं जाएगा और आने वाले दिनों में कुछ और बेहद चौंकाने वाले बड़े नामों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
girls globe