बिहार के इस बड़े विश्वविद्यालय में ‘भर्ती खेल’ पर राजभवन सख्त! सांसद की शिकायत के बाद राज्यपाल का बड़ा एक्शन

बिहार के उच्च शिक्षा जगत और प्रशासनिक महकमे से इस वक्त एक बेहद सनसनीखेज और बड़ी खबर सामने आ रही है। भागलपुर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर (Sabour Agriculture University) में पिछले कुछ समय से चल रही नियुक्तियों को लेकर एक बहुत बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय सांसद द्वारा की गई बेहद गंभीर और लिखित शिकायत के बाद बिहार का राजभवन (Bihar Rajbhavan) पूरी तरह से हरकत में आ गया है। कुलाधिपति सह राज्यपाल सचिवालय ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन और शिकायतकर्ता दोनों स्तरों पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। राजभवन ने इस पूरे कथित नियुक्ति घोटाले (Recruitment Scam) की परतों को खोलने के लिए पुख्ता साक्ष्य और दस्तावेज मांगे हैं, जिसके बाद विश्वविद्यालय के अधिकारियों और चयन समिति के सदस्यों के बीच हड़कंप मच गया है।

सांसद के तीखे आरोपों से हिला विश्वविद्यालय प्रशासन, बैकडोर एंट्री का अंदेशा

पूरा मामला सबौर कृषि विश्वविद्यालय में विभिन्न शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों पर की गई हालिया भर्तियों से जुड़ा हुआ है। स्थानीय सांसद ने राज्यपाल को सौंपे गए अपने शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि इन नियुक्तियों में नियमों और योग्यताओं को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया। चहेतों और रसूखदार लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए बैकडोर एंट्री (पीछे के दरवाजे से भर्ती) कराई गई है और बड़े पैमाने पर आर्थिक हेराफेरी की भी आशंका है। सांसद का दावा है कि योग्य और प्रतिभावान अभ्यर्थियों को जानबूझकर चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया, जिससे विश्वविद्यालय की साख को गहरा धक्का लगा है। इस सीधे हमले के बाद विश्वविद्यालय के प्रशासनिक गलियारों में खलबली मची हुई है।

राजभवन ने खोला कड़ा मोर्चा, तीन दिनों के भीतर साक्ष्य पेश करने का अल्टीमेटम

सांसद की इस हाई-प्रोफाइल शिकायत को बेहद गंभीरता से लेते हुए राजभवन ने तुरंत एक्शन लिया है। राज्यपाल के प्रधान सचिव की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में शिकायतकर्ता सांसद से इन गंभीर आरोपों के समर्थन में सभी जरूरी दस्तावेज, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग या कोई भी अन्य पुख्ता साक्ष्य (Evidence) तुरंत उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसके साथ ही राजभवन ने विश्वविद्यालय के कुलपति (VC) से भी इस पूरी भर्ती प्रक्रिया की विस्तृत टाइमलाइन, विज्ञापनों की प्रतियां और चयन समिति की बैठक के मिनट्स तलब किए हैं। राजभवन का स्पष्ट रुख है कि यदि आरोपों में थोड़ी भी सच्चाई पाई गई, तो पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द करने के साथ-साथ दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुराने घोटालों की यादें हुईं ताजा, जांच की आंच बड़े चेहरों तक पहुंचने के आसार

सबौर कृषि विश्वविद्यालय में नियुक्ति विवाद का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी यह प्रतिष्ठित संस्थान भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं के कारण लंबे समय तक विवादों और अदालती कार्रवाइयों के साए में रहा है। अब एक बार फिर राजभवन की इस त्वरित और कड़ी सक्रियता ने पुराने जिन्न को बोतल से बाहर निकाल दिया है। शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि यदि इस मामले की गहराई से जांच होती है, तो जांच की आंच राजनेताओं, रसूखदार बिचौलियों और विश्वविद्यालय के कई बड़े अधिकारियों तक पहुंच सकती है। वर्तमान में राजभवन की इस बड़ी कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय में चल रही अन्य आगामी परीक्षाओं और साक्षात्कारों पर भी संशय के बादल मंडराने लगे हैं।