
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच से एक बार फिर बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन (G-7 Summit) के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। दोनों देशों के बीच स्विट्जरलैंड में होने वाले आधिकारिक समझौते से ठीक दो दिन पहले ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान के साथ हाल ही में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MOU) कोई अंतिम समझौता नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि तेहरान (ईरान) का व्यवहार उचित नहीं रहा, तो अमेरिका उसके खिलाफ अपना आक्रामक सैन्य व बमबारी अभियान दोबारा शुरू करने में एक पल की भी देरी नहीं करेगा।
ट्रंप के इस तेवर से वैश्विक राजनीति में अचानक तनाव चरम पर पहुंच गया है, क्योंकि हर कोई मान रहा था कि इस एमओयू के बाद दोनों देशों के बीच दशकों पुराना टकराव अब खत्म होने की राह पर है।
47 वर्षों के दुर्व्यवहार का हिसाब लेंगे, ट्रंप ने परमाणु समझौते को लेकर दिखाया सख्त रुख
जी-7 सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से मुखातिब होते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा कि यह अभी सिर्फ एक समझौता ज्ञापन है, कोई परमानेंट डील नहीं। अगर मुझे इसकी शर्तें पसंद नहीं आईं या ईरान ने अपनी हरकतों में सुधार नहीं किया, तो हम सीधे उनके सिर के ठीक बीचोंबीच बम गिराना शुरू कर देंगे। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि ईरान पिछले 47 वर्षों से लगातार अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन और दुर्व्यवहार कर रहा है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच आगामी शुक्रवार को होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर से ठीक पहले ट्रंप का यह बयान ईरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
60 दिनों की समय-सीमा पर ट्रंप का यू-टर्न, वार्ता जल्द पूरी होने की जताई उम्मीद
इससे पहले तक अमेरिकी प्रशासन का रुख थोड़ा नरम दिखाई दे रहा था। ट्रंप ने खुद कहा था कि ईरान के साथ प्रस्तावित अंतिम समझौते को अमलीजामा पहनाने के लिए तय की गई 60 दिनों की समय-सीमा काफी लचीली (फ्लेक्सिबल) है। उन्होंने संकेत दिए थे कि यह बातचीत तय वक्त से बहुत पहले भी पूरी हो सकती है और इसमें थोड़ा ज्यादा समय भी लग सकता है, हालांकि इसके जल्द संपन्न होने के आसार अधिक हैं। शुक्रवार को होने वाला यह समझौता मुख्य रूप से ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व (वेस्ट एशिया) में शांति बहाली सहित कई अन्य लंबित मुद्दों पर आगे की व्यापक बातचीत के लिए एक रोडमैप तैयार करने वाला है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से शुरू हुई तेल की सप्लाई, अंतरराष्ट्रीय बाजार में लौटी रौनक
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिहाज से एक बड़ी राहत की खबर देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने होर्मुज स्ट्रेट की मौजूदा स्थिति पर गहरा संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कई महीनों के भारी गतिरोध और रुकावटों के बाद अब इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर यातायात पूरी तरह सामान्य हो रहा है। व्यापारिक जहाज और तेल टैंकर फिर से चलने शुरू हो गए हैं और उम्मीद है कि शुक्रवार तक होर्मुज पूरी तरह से सुरक्षित खोल दिया जाएगा। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की आपूर्ति बहाल होने से तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है, जिससे अमेरिकी शेयर बाजार सहित दुनिया भर के बाजारों में मजबूती देखी जा रही है।
ओबामा की 2015 वाली न्यूक्लियर डील (JCPOA) को बताया बेकार, ट्रंप बोले- मेरी डील अभेद्य दीवार
सीबीएस न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, हालिया दिनों में एक ईरानी जहाज सहित कुछ बड़े तेल टैंकर इस समुद्री रास्ते से सुरक्षित गुजरे हैं, लेकिन दुनिया की बड़ी शिपिंग कंपनियां अभी भी फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं। वे पूर्ण परिचालन तभी शुरू करेंगी जब वाशिंगटन और तेहरान के समझौते की शर्तें पूरी तरह स्पष्ट हो जाएंगी। दूसरी ओर, ट्रंप ने ऐलान किया है कि वे अगले कुछ दिनों में इस एमओयू की पूरी डिटेल जनता के सामने रखेंगे। उन्होंने कहा कि वे महज एक प्रेस रिलीज जारी नहीं करेंगे, बल्कि खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर इस समझौते को शब्द-दर-शब्द पढ़कर सुनाएंगे ताकि मीडिया में कोई गलतफहमी न रहे।
ट्रंप ने इस नए समझौते की तुलना वर्ष 2015 में हुए ओबामा काल के ऐतिहासिक परमाणु समझौते (JCPOA) से करते हुए उसे पूरी तरह खारिज कर दिया। ट्रंप ने कहा कि ओबामा का वह समझौता पश्चिम एशिया को और अधिक अस्थिर करने वाला तथा ईरान के लिए परमाणु हथियारों का रास्ता खोलने वाला था, जबकि मेरा यह नया समझौता ईरान के परमाणु मंसूबों के खिलाफ एक अभेद्य और मजबूत दीवार की तरह काम करेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिकी कांग्रेस भी देश हित में इस कदम का पूरा समर्थन करेगी।
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