
किडनी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के दौर में सोशल मीडिया पर खानपान को लेकर कई तरह की भ्रामक जानकारी और ‘मिरेकल डाइट’ (Miracle Diet) के दावे किए जाते हैं। अक्सर मरीज और उनके परिजन किसी जड़ी-बूटी या खास फूड आइटम के सहारे कैंसर को जड़ से खत्म करने का सपना देखते हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान की कसौटी पर ये दावे कितने खरे हैं? राजीव गांधी कैंसर संस्थान के कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. कपिल गोयल ने किडनी कैंसर से जुड़े ऐसे ही पांच बड़े मिथकों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया है।
मिथक 1: कोई खास फूड या जड़ी-बूटी कैंसर का इलाज है
सबसे प्रचलित अफवाह यह है कि कोई विशेष फूड, जड़ी-बूटी या सप्लीमेंट कैंसर को ठीक कर सकता है। सच्चाई यह है कि वर्तमान में ऐसी कोई भी खाद्य सामग्री या सप्लीमेंट मौजूद नहीं है जो कैंसर का इलाज करने में सक्षम हो। डॉक्टर द्वारा निर्देशित चिकित्सा (इलाज) ही प्राथमिक है। संतुलित आहार केवल शरीर को ताकत देने और रिकवरी की गति बढ़ाने में सहायक होता है, न कि कैंसर के उपचार में।
मिथक 2: चीनी खाने से कैंसर सेल्स तेजी से बढ़ते हैं
अक्सर कहा जाता है कि कैंसर कोशिकाएं चीनी (Sugar) पर पलती हैं, इसलिए इसे छोड़ देना ही बचाव है। सच्चाई यह है कि शरीर की हर स्वस्थ कोशिका को भी ऊर्जा के लिए ग्लूकोज चाहिए। केवल चीनी छोड़ देने से कैंसर का बढ़ना नहीं रुकता। हालांकि, ज्यादा चीनी और प्रोसेस्ड फूड सेहत के लिए हानिकारक हैं, लेकिन इसे कैंसर का एकमात्र कारण मानना गलत है।
मिथक 3: कुछ खास भोजन ही किडनी कैंसर का कारण हैं
कई लोग मानते हैं कि कोई एक विशेष चीज खाने से ही किडनी कैंसर होता है। सच्चाई यह है कि कैंसर का जोखिम किसी एक चीज पर निर्भर नहीं होता। धूम्रपान, मोटापा, अनियंत्रित ब्लड प्रेशर और अनुवांशिक कारण (फैमिली हिस्ट्री) इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। खानपान केवल एक छोटा सा हिस्सा है।
मिथक 4: लाल मांस (Red Meat) को पूरी तरह बंद करना जरूरी है
किडनी कैंसर के डर से लोग रेड मीट पूरी तरह छोड़ देते हैं। सच्चाई यह है कि प्रोसेस्ड या अत्यधिक ग्रिल किए गए मीट का सेवन कैंसर के जोखिम से जुड़ा हो सकता है, लेकिन संतुलित मात्रा में रेड मीट का सेवन करना हर किसी के लिए नुकसानदेह नहीं होता। आहार संबंधी निर्णय मरीज की अपनी मेडिकल स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह पर ही लिए जाने चाहिए।
विज्ञान क्या कहता है? स्वस्थ रहने का सही तरीका
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, किसी ‘जादुई फूड’ की तलाश करने के बजाय एक संतुलित जीवनशैली अपनाना सबसे असरदार है। फल, सब्जियां, दालें, और साबुत अनाज से भरपूर डाइट लें। इसके साथ ही:
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स्वस्थ वजन: मोटापे को नियंत्रित रखें।
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सक्रियता: नियमित व्यायाम या शारीरिक गतिविधि करें।
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तंबाकू से दूरी: धूम्रपान कैंसर का सबसे बड़ा जोखिम है।
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नियमित जांच: स्वास्थ्य परीक्षण (Health Check-ups) कराते रहें।
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