टेलीग्राम बैन पर देश के सबसे बड़े संस्थान में रार: IIT डायरेक्टर और छात्र सार्थक सिद्धांत आए आमने-सामने

भारत में पॉपुलर मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम (Telegram) पर संभावित प्रतिबंध और अस्थायी रुकावटों को लेकर चल रहा विवाद अब देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों के परिसरों तक पहुंच गया है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक आईआईटी (IIT) के डायरेक्टर और संस्थान के ही एक होनहार छात्र सार्थक सिद्धांत इस पाबंदी के पक्ष और विपक्ष में सीधे आमने-सामने आ गए हैं। इस हाई-प्रोफाइल बहस ने न केवल कैंपस के भीतर बल्कि देश भर के शिक्षा जगत, टेक कम्युनिटी और सोशल मीडिया पर एक नई कानूनी और नैतिक जंग को हवा दे दी है।

सुरक्षा बनाम आजादी: क्यों शुरू हुआ आईआईटी डायरेक्टर और सार्थक के बीच विवाद

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब संस्थान के डायरेक्टर ने राष्ट्रीय सुरक्षा, पेपर लीक की घटनाओं और टेलीग्राम के जरिए फैल रही पायरेसी का हवाला देते हुए सरकार के अस्थायी प्रतिबंध के रुख का समर्थन किया। इसके तुरंत बाद, आईआईटी के छात्र सार्थक सिद्धांत ने डिजिटल अधिकारों और छात्रों की पढ़ाई का पक्ष लेते हुए इस संभावित बैन का खुलकर विरोध कर दिया। सार्थक सिद्धांत का तर्क है कि देश के लाखों छात्र कोडिंग, स्टडी मटेरियल शेयरिंग, नोट्स और रिसर्च वर्क के लिए टेलीग्राम के विशाल नेटवर्क पर निर्भर हैं। किसी एक गलती के लिए पूरे प्लेटफॉर्म को बंद कर देना युवाओं के भविष्य और उनकी डिजिटल आजादी के साथ खिलवाड़ होगा।

टेक एक्सपर्ट्स और डिजिटल राइट्स एक्टिविस्ट्स भी इस बहस में कूदे

आईआईटी के भीतर शुरू हुई इस बहस ने देखते ही देखते एक बड़ा राष्ट्रीय रूप ले लिया है। देश के बड़े-बड़े टेक एक्सपर्ट्स और डिजिटल राइट्स के लिए काम करने वाली संस्थाएं अब छात्र सार्थक सिद्धांत के समर्थन में खड़ी दिखाई दे रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि टेलीग्राम सिर्फ एक चैटिंग ऐप नहीं है, बल्कि यह डेवलपर्स और एजुकेटर्स के लिए एक ओपन-सोर्स टूल की तरह काम करता है। दूसरी तरफ, डायरेक्टर के बयान को सही ठहराने वाले धड़े का मानना है कि प्राइवेसी और एन्क्रिप्शन की आड़ में टेलीग्राम का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों और परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली के लिए किया जा रहा है, जिसे रोकना बेहद जरूरी है।

दिल्ली, कोटा से लेकर लखनऊ और बेंगलुरु के छात्र गुटों में मची हलचल

इस बड़ी खबर के वायरल होते ही देश के प्रमुख एजुकेशन हब्स जैसे कोटा, दिल्ली-एनसीआर, प्रयागराज और लखनऊ से लेकर बेंगलुरु की सिलिकॉन वैली तक के छात्रों और युवाओं में भारी हलचल देखी जा रही है। छात्र संगठनों का कहना है कि अगर टेलीग्राम पूरी तरह बैन होता है, तो उन्हें अपनी पढ़ाई और ग्रुप स्टडीज के लिए नए विकल्प तलाशने होंगे जो काफी मुश्किल काम है। प्रशासनिक और कानूनी जानकारों के मुताबिक, आईआईटी डायरेक्टर और सार्थक सिद्धांत के बीच की यह वैचारिक लड़ाई असल में इस बात का सटीक उदाहरण है कि आधुनिक दौर में सुरक्षा और तकनीक के बीच संतुलन बनाना कितना जटिल हो चुका है।