Gold-Silver Price Today: यूएस फेड के फैसले से पहले चमका सोना-चांदी, रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंची कीमतें

वैश्विक बाजारों से मिल रहे मजबूत संकेतों के बीच बुधवार (17 जून) को अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) पर सोने और चांदी की कीमतों में तेजी का रुख देखने को मिला। निवेशक जहां एक तरफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) के आगामी नीतिगत फैसले का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भू-राजनीतिक (जियोपॉलिटिकल) अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने-चांदी की मांग लगातार बनी हुई है। कमोडिटी मार्केट में आई इस तेजी से घरेलू सराफा बाजार में भी हलचल बढ़ गई है।

कोमेक्स पर उछला सोना, चांदी में भी आई जोरदार तेजी

वैश्विक बाजार में बुधवार को सोने का वायदा भाव 0.13 फीसदी की बढ़त के साथ 4,360.20 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान इसने 4,369.80 डॉलर प्रति औंस के उच्चतम स्तर को भी छुआ। सोने की इस मजबूती का असर चांदी पर भी साफ देखा गया। चांदी की कीमतें 0.46 फीसदी की तेजी के साथ 70.335 डॉलर प्रति औंस पर दर्ज की गईं। कीमती धातुओं में लगातार आ रही खरीदारी की वजह से बुलियन मार्केट में निवेशकों का सेंटिमेंट काफी मजबूत नजर आ रहा है।

अमेरिका-ईरान समझौते और फेडरल रिजर्व के फैसले पर टिकी नजरें

बाजार के जानकारों के मुताबिक, इस समय ट्रेडर्स अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक अस्थायी समझौते और सीजफायर फ्रेमवर्क से जुड़े घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहे हैं। हालांकि तनाव थोड़ा कम होने से सुरक्षित निवेश (Safe-Haven) की फौरी मांग में हल्की कमी आई है, लेकिन बड़ी अनिश्चितताएं अब भी बरकरार हैं जिससे कीमतों को लगातार सपोर्ट मिल रहा है। इसके साथ ही सबका ध्यान फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के नतीजों पर है। माना जा रहा है कि महंगाई के खतरे को देखते हुए केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और इन्हें लंबे समय तक स्थिर रख सकता है।

सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी से बना हुआ है बड़ा अपट्रेंड

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के एक ताजा सर्वे ने सोने की कीमतों को और बढ़ावा दिया है। सर्वे के मुताबिक, दुनिया भर के लगभग आधे ग्लोबल रिजर्व मैनेजर अगले 12 महीनों में अपनी गोल्ड होल्डिंग (सोने का भंडार) बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, जो इसे एक बेहतरीन स्ट्रेटेजिक हेज साबित करता है।

कामा ज्वेलरी के मैनेजिंग डायरेक्टर कॉलिन शाह ने इस बाजार सेंटिमेंट पर बात करते हुए कहा कि वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही लगातार खरीदारी यह दर्शाती है कि महंगाई से बचाव के लिए सोना आज भी सबसे भरोसेमंद विकल्प है। उन्होंने कहा कि हालिया उतार-चढ़ाव को बाजार का सुधार (कंसोलिडेशन) माना जाना चाहिए, न कि कीमतों में गिरावट की शुरुआत। इसके अलावा भारतीय बाजार के लिहाज से डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी सोने की घरेलू डिमांड को बढ़ाने का मुख्य जरिया बनी हुई है। निवेशक अब आगे की दिशा तय करने के लिए अमेरिकी रिटेल सेल्स डेटा का इंतजार कर रहे हैं।