
टाटा ग्रुप की कंपनी ‘टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स’ (Tata Electronics) के तमिलनाडु स्थित आईफोन (iPhone) पार्ट्स बनाने वाले होसुर प्लांट को बड़ी राहत मिली है। तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (TNPCB) ने फैक्ट्री के खिलाफ चल रही प्रदूषण से जुड़ी जांच को पूरी तरह से बंद कर दिया है। रॉयटर्स (Reuters) की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने एक आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की है कि प्रदूषण बोर्ड ने कंपनी द्वारा दिए गए जवाबों को पूरी तरह संतोषजनक माना है और अब इस मामले में आगे कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
बिजली कटने और फैक्ट्री बंद होने का मंडरा रहा था खतरा
दरअसल, तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स को एक कड़ा वॉर्निंग नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में चेतावनी दी गई थी कि अगर कंपनी प्रदूषण की चिंताओं पर सही जवाब और ठोस कदम नहीं उठाती है, तो नियमों के उल्लंघन के आरोप में फैक्ट्री की बिजली काटी जा सकती है और यूनिट को जबरन बंद भी किया जा सकता है। इस कड़े रुख के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि क्या टाटा की आईफोन फैक्ट्री बंद हो जाएगी? हालांकि, अब रेगुलेटर ने स्पष्ट कर दिया है कि कंपनी के होसुर प्लांट से हाल ही में लिए गए पानी के सैंपल्स की लैब रिपोर्ट में किसी भी तरह के प्रदूषण या टॉक्सिक तत्वों का कोई संकेत नहीं मिला है।
क्या था पूरा मामला और क्यों नाराज था प्रदूषण बोर्ड?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब प्लांट के आस-पास खेती करने वाले स्थानीय किसानों ने महीनों तक प्रदूषण बोर्ड से शिकायत की। किसानों का आरोप था कि फैक्ट्री से निकलने वाला केमिकल युक्त गंदा पानी उनके खेतों की जमीन और खुले कुओं को दूषित कर रहा है।
नियामक द्वारा जारी 25 मई 2026 के नोटिस के अनुसार, दिसंबर 2025 से मई 2026 के बीच अधिकारियों ने पांच बार इस प्लांट का औचक निरीक्षण किया था। जांच में सामने आया था कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने अपनी फैसिलिटी के अंदर बने रेनवॉटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल संचयन) तालाब में गंदा पानी छोड़ दिया था। मानसून या भारी बारिश के दौरान जब यह तालाब ओवरफ्लो हुआ, तो इसका दूषित पानी आस-पास की कृषि भूमि और कुओं के भू-जल (ग्राउंडवॉटर) में मिल गया, जिससे पानी पीने और सिंचाई के लायक नहीं रहा।
स्वतंत्र लैब की जांच और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का पक्ष
नोटिस मिलने के बाद टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक सरकारी मान्यता प्राप्त स्वतंत्र लैब से पानी के नमूनों की स्टडी और वैज्ञानिक विश्लेषण करवाया। इस स्वतंत्र जांच रिपोर्ट में यह साबित हुआ कि कंपनी पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े सभी रेगुलेटरी नियमों का पूरी तरह से पालन कर रही है। कंपनी ने इन पुख्ता वैज्ञानिक नतीजों के साथ प्रदूषण बोर्ड को अपना औपचारिक जवाब सौंपा। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने दोहराया कि वे एक जिम्मेदार बिजनेस ग्रुप हैं और स्थानीय समुदायों व पर्यावरण की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
आपको बता दें कि टाटा ग्रुप की यह कंपनी ताइवान की फॉक्सकॉन (Foxconn) के बाद दक्षिण एशिया में दिग्गज टेक कंपनी एपल (Apple) की दूसरी सबसे बड़ी सप्लायर है। तमिलनाडु के इस होसुर प्लांट में आईफोन के बैक पैनल और अन्य महत्वपूर्ण पार्ट्स बनाए जाते हैं। बोर्ड की क्लीन चिट मिलने के बाद अब यहां बिना किसी रुकावट के प्रोडक्शन जारी रहेगा।
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