टाटा ग्रुप की कलह के बीच TCS को अमेरिका से लगा तगड़ा झटका: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

एक तरफ जहां टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बोर्ड रूम के भीतर आंतरिक कलह और खींचतान की खबरें लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ टाटा ग्रुप की सबसे बड़ी और कद्दावर आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को वैश्विक स्तर पर एक बहुत बड़ा कानूनी झटका लगा है। संयुक्त राज्य अमेरिका (US) की सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद हाई-प्रोफाइल ट्रेड सीक्रेट (व्यापारिक गोपनीयता) चोरी के मामले में टीसीएस की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। अमेरिकी शीर्ष अदालत के इस कड़े फैसले के बाद कंपनी को अब कुल 220 मिलियन डॉलर (भारतीय मुद्रा में लगभग 2,000 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा। टीसीएस ने मंगलवार को भारतीय शेयर बाजारों को दी गई अपनी आधिकारिक एक्सचेंज फाइलिंग में इस बेहद चौंकाने वाले और बड़े घटनाक्रम की पुष्टि की है। लाइव हिन्दुस्तान की इस एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड विशेष कॉर्पोरेट और कानूनी मामलों की इनसाइडर रिपोर्ट में आईएनएस ब्यूरो के साथ विस्तार से समझिए कि अमेरिका में टीसीएस के खिलाफ यह पूरी कानूनी गाज कैसे गिरी है।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डीएक्ससी टेक्नोलॉजी के पक्ष में बरकरार रखा 168 मिलियन डॉलर का हर्जाना

आधिकारिक एक्सचेंज फाइलिंग में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सोमवार 15 जून 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने टीसीएस की उस विशेष अपील को पूरी तरह नामंजूर कर दिया, जो उसने ‘यूनाइटेड स्टेट्स कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फिफ्थ सर्किट’ के पिछले फैसले के खिलाफ दायर की थी। शीर्ष अदालत ने अमेरिकी आईटी कंपनी डीएक्ससी टेक्नोलॉजी (DXC Technology) के पक्ष में दिए गए पुराने फैसले को हूबहू बरकरार रखा है। इस फैसले के तहत टीसीएस को अब न सिर्फ मुख्य हर्जाने की बड़ी राशि चुकानी होगी, बल्कि अदालती लड़ाई के दौरान जमा हुआ भारी ब्याज और कानूनी खर्च भी वहन करना पड़ेगा, जिससे कंपनी के मुनाफे पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।

टीसीएस ने एक्सचेंज फाइलिंग में निवेशकों को दी पूरी जानकारी, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में दिखेगा असर

अदालती आदेश के बाद टीसीएस ने शेयर बाजार को सूचित करते हुए अपनी फाइलिंग में कहा कि यूनाइटेड स्टेट्स सुप्रीम कोर्ट ने फिफ्थ सर्किट के फैसले की समीक्षा के लिए दायर हमारी ‘रिट ऑफ सर्टिओरारी’ (Writ of Certiorari) याचिका को खारिज कर दिया है। कंपनी ने आगे अपने वित्तीय संतुलन और नुकसान की भरपाई की रणनीति स्पष्ट करते हुए बताया कि स्थापित अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स के तहत हमने इस कानूनी विवाद से निपटने के लिए अपने खातों में पहले ही 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर का एक सुरक्षित प्रावधान (प्रोविजन) कर रखा था। अब अदालत के अंतिम फैसले के बाद कंपनी नुकसान की पूरी भरपाई, संचित ब्याज और कानूनी लड़ाई के खर्चों के लिए अतिरिक्त 70 मिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि का नया प्रावधान करने जा रही है। इस अतिरिक्त रकम को कंपनी आगामी वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजों में एक बार होने वाले असाधारण खर्च (Exceptional Item) के तौर पर दिखाएगी।

साल 2019 का है यह हाई-प्रोफाइल विवाद, कर्मचारियों को नौकरी पर रखकर डेटा चोरी करने का था गंभीर आरोप

यह पूरा कड़ा कानूनी विवाद साल 2019 में डलास (अमेरिका) की फेडरल कोर्ट से शुरू हुआ था। उस समय डीएक्ससी टेक्नोलॉजी की अनुषंगी और पुरानी कंपनी ‘कंप्यूटर साइंसेज कॉर्पोरेशन’ (CSC) ने टीसीएस के खिलाफ एक बहुत बड़ा मुकदमा दायर किया था। इस मुकदमे में टाटा ग्रुप की कंपनी पर बेहद गंभीर आरोप लगाया गया था कि टीसीएस ने एक दूसरी बड़ी इंश्योरेंस कंपनी ‘ट्रांसअमेरिका’ के लगभग 2,200 कर्मचारियों को अपने यहां नौकरी पर रखा था। आरोप के मुताबिक, टीसीएस ने इन कर्मचारियों के जरिए उस अमेरिकी कंपनी के बेहद गोपनीय लाइफ-इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म के अंदरूनी और तकनीकी डेटा (ट्रेड सीक्रेट्स) को अवैध रूप से एक्सेस किया और उसी डेटा का इस्तेमाल कर बाजार में अपना एक नया और प्रतिस्पर्धी लाइफ-इंश्योरेंस सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म खड़ा कर लिया।

जूरी के कड़े फैसले से लेकर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश तक, समझिए कैसे फंसती चली गई देश की दिग्गज आईटी कंपनी

साल 2023 में अमेरिकी जूरी ने इस मामले की गहन सुनवाई के बाद यह पाया था कि टीसीएस ने जानबूझकर और सोची-समझी रणनीति के तहत अमेरिकी कंपनी के ट्रेड सीक्रेट्स चुराए हैं, जिसके लिए जूरी ने शुरुआती तौर पर 210 मिलियन डॉलर के भारी जुर्माने की सिफारिश की थी। बाद में यूएस डिस्ट्रिक्ट जज ब्रेंटली स्टार ने इस रकम को थोड़ा कम करते हुए 168 मिलियन डॉलर तय कर दिया था, जिसमें 56 मिलियन डॉलर वास्तविक नुकसान के हर्जाने के तौर पर और 112 मिलियन डॉलर दंडात्मक हर्जाने (Punitive Damages) के रूप में शामिल थे। फिफ्थ यूएस सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने साल 2025 में भी इस कड़े फैसले को सही ठहराया था। इसके बाद टीसीएस ने देश की साख का हवाला देते हुए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और यह दलील दी थी कि डीएक्ससी को बिना कोई वास्तविक वित्तीय नुकसान साबित किए ‘अनुचित लाभ’ का इतना भारी-भरकम दंडात्मक हर्जाना नहीं मिलना चाहिए। हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने भारत की सबसे बड़ी आईटी फर्म की इन तमाम दलीलों को पूरी तरह से खारिज करते हुए इस कानूनी लड़ाई पर हमेशा के लिए पूर्णविराम लगा दिया है।