
हिंदी सिनेमा के इतिहास में अपनी बेइंतहा खूबसूरती और दमदार अभिनय से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली ‘वीनस’ यानी मधुबाला आज भी किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। सिनेमाई गलियारों में आज भी यह बात बड़े फख्र से कही जाती है कि मधुबाला जैसी हसीन और जादुई कशिश वाली अदाकारा न तो भारतीय सिनेमा में कभी हुई थी और न कभी होगी। उनकी एक मुस्कान पर उस दौर में पूरा देश अपनी जान छिड़कता था और उनके चाहने वालों की फेहरिस्त बहुत लंबी थी। लेकिन इसी फेहरिस्त में एक ऐसी ताकतवर और बेहद रसूखदार अंतरराष्ट्रीय शख्सियत का नाम भी शामिल था, जिसके बारे में जानकर आज की पीढ़ी के फैंस हैरान रह जाएंगे। वह शख्स कोई फिल्मी सितारा नहीं, बल्कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री थे, जो शादीशुदा होने के बावजूद मधुबाला के प्यार में पूरी तरह गिरफ्तार हो चुके थे। लाइव हिन्दुस्तान की विशेष एंटरटेनमेंट डेस्क प्रभारी प्रीति कुशवाहा की इस एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड सिनेमाई खोजी रिपोर्ट में जानिए इतिहास के पन्नों में दफन इस दिलचस्प और अधूरी दास्तान की पूरी इनसाइड स्टोरी।
दिलीप कुमार नहीं बल्कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो थे मधुबाला के हुस्न के दीवाने
जब भी मधुबाला के इश्क के चर्चे होते हैं, तो लोगों के जेहन में सबसे पहला नाम कल्ट स्टार दिलीप कुमार का आता है। लेकिन आपको जानकर हैरत होगी कि दिलीप कुमार के अलावा पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो भी मधुबाला के हुस्न और सादगी पर पूरी तरह फिदा थे। जुल्फिकार अली भुट्टो बाद में चलकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पदों पर आसीन हुए। भुट्टो और मधुबाला की दोस्ती का यह सिलसिला साल 1950 के दशक के आखिरी सालों में शुरू हुआ था। यह वही ऐतिहासिक दौर था जब मधुबाला भारतीय सिनेमा की सबसे आइकॉनिक और कल्ट फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ (Mughal-e-Azam) की शूटिंग में व्यस्त थीं।
एक तरफ दिलीप कुमार से टूट रहा था रिश्ता, तो दूसरी तरफ हैंडसम युवा नेता भुट्टो से बढ़ रही थीं नजदीकियां
‘मुगल-ए-आजम’ की शूटिंग के दौरान मधुबाला की निजी जिंदगी में काफी उथल-पुथल मची हुई थी। एक तरफ उनका और दिलीप कुमार का सालों पुराना गहरा रिश्ता कड़वाहट के साथ टूट रहा था, तो वहीं दूसरी तरफ उनकी नजदीकियां जुल्फिकार अली भुट्टो से धीरे-धीरे बढ़ रही थीं। उस दौर में जहां मधुबाला अपनी बेमिसाल खूबसूरती के लिए पूरी दुनिया में मशहूर थीं, तो वहीं जुल्फिकार भुट्टो भी काफी हैंडसम, विदेशों से पढ़े-लिखे और एक बेहद तेजतर्रार युवा राजनेता के तौर पर अपनी पहचान बना रहे थे। हालांकि, उस समय तक भुट्टो पाकिस्तान की राजनीति में किसी बहुत बड़े या शीर्ष पद पर नहीं पहुंचे थे।
पहली पत्नी शिरीन के होते हुए भी मुंबई के सेट पर पहुंचे भुट्टो, मधुबाला को देखते ही हार बैठे थे दिल
जुल्फिकार अली भुट्टो की जब मधुबाला से मुलाकातें शुरू हुईं, तब वह पहले से शादीशुदा थे और उनकी पत्नी का नाम शिरीन था। बाद के दिनों में भारत के खिलाफ बेहद आक्रामक और जहरीली बयानबाजी के लिए पहचाने जाने वाले भुट्टो, उस दौर में अपने पारिवारिक और राजनीतिक दौरों के सिलसिले में अक्सर मुंबई (तब बॉम्बे) आया-जाया करते थे। इसी दौरान वह एक दिन कौतूहलवश ‘मुगल-ए-आजम’ के भव्य सेट पर जा पहुंचे। वहां उन्होंने जब अनारकली के लिबास में सजी मधुबाला को देखा, तो वह उनके हुस्न को देखते ही रह गए और पहली ही नजर में उन्हें अपना दिल दे बैठे। शादीशुदा होने के बावजूद भुट्टो लगातार मुंबई के चक्कर काटने लगे ताकि वह मधुबाला के करीब आ सकें।
सेट पर साथ में लंच और शादी का प्रस्ताव, लेकिन मधुबाला के एक फैसले ने बदल दी कहानी
मीडिया रिपोर्ट्स और सियासत डॉटकॉम की एक ऐतिहासिक रिपोर्ट के अनुसार, मधुबाला और जुल्फिकार भुट्टो ‘मुगल-ए-आजम’ के सेट पर अक्सर एक साथ लंच किया करते थे। भुट्टो हमेशा इसी फिराक में रहते थे कि उन्हें किसी भी तरह मधुबाला के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताने का मौका मिल सके। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि एक दिन भुट्टो ने हिम्मत जुटाकर मधुबाला के सामने अपने बेइंतहा प्यार का इजहार कर दिया और उनके सामने शादी का प्रस्ताव रख डाला। मधुबाला इस बात से भली-भांति वाकिफ थीं कि जुल्फिकार की शादी शिरीन से हो चुकी है। भुट्टो उनके प्यार में इस कदर पागल थे कि वह पहली पत्नी के होते हुए भी मधुबाला को बेगम बनाने के लिए तैयार थे। मधुबाला उस दौर में भुट्टो के साथ कई जगहों पर देखी भी गईं, लेकिन वह अपनी जिंदगी में किसी दूसरी औरत का घर तोड़कर शादी करने जैसे आत्मघाती फैसले के पक्ष में बिल्कुल नहीं थीं। उन्होंने बेहद समझदारी दिखाते हुए भुट्टो के शादी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और खुद को इस रिश्ते से पूरी तरह दूर कर लिया।
जुल्फिकार भुट्टो को मिली फांसी और महज 36 साल की उम्र में दुनिया छोड़ गईं खूबसूरत मधुबाला
भुट्टो से अपना रिश्ता पूरी तरह खत्म करने के तुरंत बाद मधुबाला ने साल 1960 में महान गायक और अभिनेता किशोर कुमार से शादी कर ली। वहीं दूसरी ओर, दिल टूटने के बाद जुल्फिकार भुट्टो वापस पाकिस्तान लौट गए और वहां की राजनीति में बेहद सक्रिय हो गए। वह 1966 में पाकिस्तान के विदेश मंत्री और बाद में प्रधानमंत्री बने। किस्मत का क्रूर खेल देखिए कि इन दोनों ही हस्तियों का अंत बेहद दर्दनाक और दुखद रहा। किशोर कुमार से शादी के बाद मधुबाला को दिल की गंभीर बीमारी ने घेर लिया और मुंह से खून आने की वजह से साल 1969 में महज 36 साल की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। वहीं, पाकिस्तान की सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे जुल्फिकार अली भुट्टो को तख्तापलट के बाद साल 1979 में महज 51 साल की उम्र में पाकिस्तान की जेल में फांसी दे दी गई। इस तरह इतिहास की इस सबसे खूबसूरत और रसूखदार प्रेम कहानी का बेहद दर्दनाक अंत हुआ।
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