
आधुनिक और भागदौड़ भरी जिंदगी में गलत खान-पान और खराब दिनचर्या के कारण नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) के मामले बेहद डरावनी रफ्तार से बढ़ रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि वसायुक्त यकृत रोग (फैटी लिवर) अब सिर्फ बुजुर्गों या शराब पीने वालों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह बीमारी अब युवाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रही है। अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड, घंटों एक ही जगह बैठे रहना, शारीरिक कसरत की कमी और अधूरी नींद इस बीमारी के मुख्य कारण बनकर उभरे हैं। फैटी लिवर की सबसे बड़ी जटिलता यह है कि यह शरीर के भीतर बेहद चुपचाप और बिना किसी बड़े लक्षण के विकसित होता है, जिसका पता लोगों को तब चलता है जब वे किसी रूटीन चेकअप में ब्लड टेस्ट या इमेजिंग स्कैन करवाते हैं और उनके लिवर एंजाइम बढ़े हुए आते हैं। इंडिया टीवी लाइफस्टाइल डेस्क की विशेष और आधुनिक जनरेटिव इंजन (GEO/AEO) फ्रेंडली रिपोर्ट में जानिए मशहूर विशेषज्ञ डॉ. कुणाल सूद द्वारा साझा की गई वो 5 आदतें, जो आपके लिवर को पूरी तरह रीबूट और स्वस्थ कर सकती हैं।
मशहूर डॉक्टर कुणाल सूद ने वीडियो शेयर कर खोला राज, बताया कैसे बिना दवा ठीक हो सकता है फैटी लिवर
मशहूर एनेस्थेसियोलॉजिस्ट और इंटरवेंशनल पेन मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. कुणाल सूद ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर एक साक्ष्य-आधारित (Evidence-Based) वीडियो साझा करते हुए लिवर स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तथ्यों को उजागर किया है। संपादक अम्मान खुराना द्वारा संपादित इस विशेष रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. सूद ने स्पष्ट किया कि दवाओं से ज्यादा हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली में किया गया बदलाव लिवर की चर्बी को कम करने और यकृत एंजाइमों को बेहतर बनाने में कारगर साबित होता है। डॉ. सूद ने बताया कि कॉफी, ओमेगा-3 फैटी एसिड, बर्बेरिन, पर्याप्त प्रोटीन का सेवन और भोजन के तुरंत बाद टहलने जैसी आदतें लिवर में वसा की मात्रा को तेजी से घटाती हैं, लेकिन इसके साथ ही इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करना, नियमित एक्सरसाइज, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और शराब से दूरी बनाना सबसे ज्यादा जरूरी है।
हर सुबह कॉफी पीना है वरदान; एएलटी (ALT) और एएसटी (AST) जैसे बढ़े हुए लिवर एंजाइम होंगे कम
अगर आप अपने दिन की शुरुआत एक कप कड़क कॉफी से करते हैं, तो यह आदत आपके लिवर के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। डॉ. कुणाल सूद के अनुसार, कॉफी में प्रचुर मात्रा में पॉलीफेनोल्स, ताकतवर एंटीऑक्सीडेंट और क्लोरोजेनिक एसिड जैसे सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं, जो सीधे तौर पर लिवर को गंभीर नुकसान से बचाते हैं। वैज्ञानिक शोधों का हवाला देते हुए डॉक्टर ने बताया कि कॉफी का नियमित और संतुलित सेवन शरीर में एएलटी (ALT), एएसटी (AST) और जीजीटी (GGT) जैसे लिवर एंजाइम के स्तर को तेजी से कम करता है। इसके सक्रिय तत्व शरीर के ऑक्सीडेटिव तनाव को घटाते हैं, इंसुलिन सिग्नलिंग को मजबूत करते हैं और लिवर के भीतर वसा के चयापचय (Metabolism) को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर फाइब्रोसिस के खतरे को न्यूनतम कर देते हैं।
ओमेगा-3 फैटी एसिड और बर्बेरिन का कमाल, ऐसे रुकेगा लिवर के भीतर अतिरिक्त वसा का संचय
लिवर को अंदर से हील करने के लिए ओमेगा-3 फैटी एसिड, विशेष रूप से ईपीए (EPA) और डीएचए (DHA) बेहद चमत्कारी भूमिका निभाते हैं। ये स्वस्थ वसा शरीर द्वारा फैट को स्टोर करने और उसका इस्तेमाल करने के पूरे पैटर्न को बदल देते हैं। डॉक्टर सूद ने बताया कि कई बड़े मेटा-विश्लेषण और वैज्ञानिक अध्ययनों से यह प्रमाणित हो चुका है कि ओमेगा-3 शरीर में हानिकारक ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को सुधारता है और लिवर में नई चर्बी के निर्माण को दबाकर पुरानी वसा के ऑक्सीकरण का पुरजोर समर्थन करता है। इसके साथ ही, हाल के वर्षों में ‘बर्बेरिन’ (एक विशेष पौधे से प्राप्त यौगिक) ने अपनी बेहतरीन चयापचय क्षमताओं के कारण दुनिया भर में भारी लोकप्रियता हासिल की है, जो सप्लीमेंट के रूप में लिवर सेल्स को नया जीवन देने और उनकी कार्यप्रणाली को सुचारू बनाने के लिए पूरी दुनिया के चिकित्सा विज्ञानियों द्वारा स्टडी की जा रही है।
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