
आजकल के मॉडर्न लाइफस्टाइल और शहरों में फ्लैट कल्चर के बढ़ने के कारण लोगों के पास स्पेस (जगह) की काफी कमी होती जा रही है। ऐसे में घर का कोना-कोना इस्तेमाल करने के चक्कर में बहुत से लोग अपने घर का मंदिर या पूजा स्थल बालकनी में शिफ्ट कर देते हैं। बालकनी में खुली हवा और रोशनी आने के कारण पहली नजर में यह जगह पूजा-पाठ के लिए बिल्कुल सही लगती है।
लेकिन क्या वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) भी इसकी इजाजत देता है? वास्तु एक्सपर्ट्स के अनुसार, खुली बालकनी में मंदिर बनाना पूरी तरह से सही नहीं माना जाता है। ऐसा करने से घर में वास्तु दोष पैदा हो सकता है, जिसका सीधा असर घर की सुख-शांति और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। आइए जानते हैं कि बालकनी में मंदिर रखने को लेकर वास्तु के क्या नियम हैं और अगर मजबूरी में वहां मंदिर बनाना पड़े तो किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
खुली बालकनी में मंदिर न रखने के 3 बड़े कारण
वास्तु शास्त्र में मंदिर को घर का सबसे पवित्र और ऊर्जावान स्थान माना गया है। खुली बालकनी में मंदिर रखने से पवित्रता बनाए रखने में कई तरह की व्यावहारिक और आध्यात्मिक मुश्किलें आती हैं:
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1. धूल-मिट्टी और अशुद्धता: खुली बालकनी सीधे बाहरी वातावरण के संपर्क में होती है। यहां लगातार धूल, मिट्टी और प्रदूषण आता रहता है। वास्तु के अनुसार, भगवान की मूर्तियों या पूजा स्थल पर धूल जमना बेहद अशुभ माना जाता है। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) बढ़ती है।
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2. पक्षियों का बसेरा: बालकनी में अक्सर कबूतर या अन्य पक्षी आकर बैठते हैं। कई बार वे वहां गंदगी या बीट भी कर देते हैं। पूजा स्थल के ठीक पास या ऊपर पक्षियों द्वारा गंदगी किया जाना मंदिर की पवित्रता को भंग करता है।
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3. मौसम की मार: खुली बालकनी में तेज हवा, आंधी या बारिश का पानी सीधे अंदर आता है। ऐसे में मंदिर में जलने वाला दीया या अगरबत्ती बार-बार बुझ जाती है। वास्तु में पूजा के बीच में दीये का बुझना या मूर्तियों पर पानी की बौछारें पड़ना अच्छा नहीं माना जाता।
बालकनी में मंदिर: क्या करें और क्या न करें (Quick Vastu Guide)
यदि आपके घर में अंदर जगह बिल्कुल नहीं है और आपको हर हाल में बालकनी में ही मंदिर बनाना पड़ रहा है, तो नीचे दी गई तालिका के नियमों का कड़ाई से पालन करें:
यदि बालकनी में मंदिर है, तो दोष दूर करने के लिए करें ये 3 उपाय
वास्तु दोष के बुरे प्रभावों से बचने के लिए आप अपने बालकनी वाले पूजा घर में ये आसान बदलाव तुरंत कर सकते हैं:
1.दरवाजे या कपाट वाला मंदिर चुनें:उपाय 1.
बालकनी में कभी भी खुला हुआ शेल्फ या ओपन स्टैंड न रखें। हमेशा ऐसा लकड़ी या संगमरमर (Marble) का मंदिर लाएं जिसमें आगे कपाट या दरवाजे बने हों। पूजा करने के बाद भगवान के कपाट हमेशा बंद रखें ताकि बाहरी हवा या गंदगी सीधे मूर्तियों को न छुए।
2.वाशिंग एरिया से दूरी बनाएं:उपाय 2.
आजकल ज्यादातर लोग फ्लैट्स की बालकनी में ही अपनी वाशिंग मशीन रखते हैं और वहीं कपड़े धोते हैं। ध्यान रखें कि वाशिंग मशीन का गंदा पानी या वहां रखे हुए गंदे कपड़े मंदिर के पावन क्षेत्र को स्पर्श न करें। दोनों के बीच एक परमानेंट पार्टिशन (विभाजन) जरूर बना दें।
3.हल्के रंगों और रोशनी का प्रयोग:उपाय 3.
बालकनी के मंदिर के आस-पास की दीवारों पर हमेशा हल्के और सात्विक रंगों जैसे हल्का पीला, सफेद या क्रीम रंग का इस्तेमाल करें। शाम के समय वहां अंधेरा न रहने दें, एक छोटा सा घी का दीया या एलईडी (LED) बल्ब हमेशा जलाकर रखें।
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