
UP Encounter News: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर पुलिस एनकाउंटर को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। गाजीपुर में चर्चित विनीत राय हत्याकांड के आरोपी कमलेश के एनकाउंटर के बाद विपक्ष ने सरकार पर सवालों की बौछार कर दी है। वहीं राज्य सरकार इसे अपराध और माफिया के खिलाफ अपनी सख्त कार्रवाई और जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा बता रही है। इसी बीच योगी सरकार के कार्यकाल में हुए एनकाउंटरों से जुड़ा डेटा सामने आने के बाद बहस ने नया मोड़ ले लिया है।
गाजीपुर एनकाउंटर के बाद तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी
गाजीपुर में हुए हालिया पुलिस एनकाउंटर के बाद विपक्षी दल लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। विनीत राय के परिजनों ने भी मुठभेड़ की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं और मामले की जांच की मांग की है। इस घटना के बाद प्रदेश में एनकाउंटर की कार्यप्रणाली और उसके प्रभाव को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
योगी सरकार के एनकाउंटर मॉडल पर उठे सवाल
विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रदेश में एनकाउंटर की कार्रवाई को जाति और धर्म के नजरिए से देखा जाना चाहिए। वहीं सरकार का दावा है कि अपराधी की पहचान उसका धर्म या जाति नहीं बल्कि उसका आपराधिक रिकॉर्ड होता है। सरकार का कहना है कि कानून व्यवस्था को मजबूत करने और संगठित अपराध पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 से 2024 के बीच पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए अपराधियों में विभिन्न जातीय और धार्मिक समुदायों के लोग शामिल रहे हैं। इन आंकड़ों को लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से व्याख्या कर रहे हैं।
योगी राज के चर्चित एनकाउंटर जिन्होंने बटोरीं सुर्खियां
योगी आदित्यनाथ सरकार के दौरान कई हाई-प्रोफाइल अपराधियों के एनकाउंटर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने। इनमें जुलाई 2020 में कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे का एनकाउंटर सबसे ज्यादा चर्चित रहा। इसके अलावा बाराबंकी में टिंकू कपाला, लखनऊ में हमजा, झांसी में असद अहमद और मेरठ में अनिल दुजाना जैसे अपराधियों के एनकाउंटर भी व्यापक सुर्खियों में रहे।
इन मामलों को सरकार ने कानून व्यवस्था की सफलता के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि विपक्ष ने कई बार इन घटनाओं की निष्पक्षता और प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए।
NCRB आंकड़ों में अपराध दर में गिरावट का दावा
सरकार का कहना है कि सख्त पुलिसिंग और अपराधियों के खिलाफ चलाए गए अभियानों का असर प्रदेश के अपराध आंकड़ों में दिखाई दिया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 की तुलना में 2024 में कई गंभीर अपराधों के मामलों में कमी दर्ज की गई है।
हत्या के मामलों की संख्या वर्ष 2017 में 4,324 थी, जो 2024 में घटकर 3,215 रह गई। वहीं अपहरण के मामलों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2017 में जहां 19,921 अपहरण के मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 11,773 तक पहुंच गई।
अपराध नियंत्रण बनाम मानवाधिकार, बहस जारी
उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर की नीति को लेकर दो अलग-अलग विचारधाराएं सामने आती रही हैं। एक पक्ष इसे अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई और कानून व्यवस्था सुधारने का माध्यम मानता है, जबकि दूसरा पक्ष न्यायिक प्रक्रिया और मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से इस पर सवाल उठाता है।
गाजीपुर की हालिया घटना के बाद एक बार फिर यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक विमर्श के केंद्र में आ गया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है।
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