Health Alert: न वायरस न बैक्टीरिया! भारत में इन 4 जानलेवा बीमारियों की असली विलेन हैं आपकी ये रोजमर्रा की आदतें

भारत में रहने वाले लोगों की सेहत और शारीरिक क्षमता के ग्राफ में पिछले कुछ समय से बेहद चौंकाने वाले और चिंताजनक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। एक समय था जब देश में लोग बैक्टीरिया, वायरस या विभिन्न प्रकार के संक्रमण (Infections) के कारण सबसे ज्यादा बीमार पड़ते थे। राहत की बात यह है कि आधुनिक चिकित्सा के चलते इन संक्रामक बीमारियों में तो काफी कमी आई है, लेकिन इसके विपरीत हमारी रोजमर्रा की खराब आदतें और सुस्त जीवनशैली अब नई और अधिक गंभीर बीमारियों को जन्म दे रही हैं। यह कोई मनगढ़ंत दावा नहीं है, बल्कि हाल ही में जारी हुए देश के सबसे विश्वसनीय ‘नैशनल फैमिली हेल्थ’ (NFHS-6) सर्वे की रिपोर्ट में यह बड़ा और डराने वाला सच सामने आया है। ऐसे में हर नागरिक के लिए यह जानना बेहद जरूरी हो गया है कि आखिर वे कौन सी 4 बड़ी बीमारियां हैं जो हमारी खुद की गलतियों से हमें घेर रही हैं और उनसे कैसे बचा जा सकता है।

मोटापा: जंक फूड का चस्का और ‘स्ट्रेस ईटिंग’ बन रही है शरीर की बढ़ती चर्बी की सबसे बड़ी वजह

आज के समय में शरीर का बढ़ता वजन और पेट के आसपास जमा होने वाली अतिरिक्त चर्बी एक ऐसी वैश्विक महामारी बन चुकी है, जिससे हर दूसरा व्यक्ति परेशान है। मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, मोटापे की सबसे बड़ी और मुख्य वजह हमारी खाने-पीने की गलत आदतें हैं। घर के बने शुद्ध और ताजा पौष्टिक भोजन को छोड़कर बाजार में मिलने वाले अत्यधिक प्रोसेस्ड और जंक फूड का सेवन इसका सबसे प्रमुख कारण है। इस प्रकार के खान-पान से शरीर के भीतर अंदरूनी सूजन (Inflammation) लगातार बढ़ती चली जाती है, जो अंततः व्यक्ति को मोटापे की ओर धकेल देती है। इसके अलावा, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक तनाव (Stress) भी शरीर के बढ़ते फैट के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार पाया गया है। तनाव के कारण लोग अक्सर ‘स्ट्रेस ईटिंग’ (तनाव में ज्यादा खाना) के शिकार हो जाते हैं, जिससे वजन अनियंत्रित गति से बढ़ने लगता है।

हाइपरटेंशन: फास्ट फूड में छिपे छिपे नमक और मानसिक तनाव का जानलेवा कॉम्बिनेशन

बदलती लाइफस्टाइल के कारण आजकल युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी बहुत तेजी से अपने पैर पसार रही है। बाजार में मिलने वाले रेडी-टू-ईट और फास्ट फूड के बढ़ते अत्यधिक सेवन ने इस बीमारी को घर-घर तक पहुंचा दिया है। इन पैक्ड और फास्ट फूड्स में प्रिजर्वेटिव्स के रूप में नमक (Sodium) और बेहद तेज मसालों का इस्तेमाल किया जाता है, जो हमारे रक्त वाहिकाओं पर सीधा असर डालकर ब्लड प्रेशर के स्तर को अचानक बढ़ा देते हैं। इसके साथ ही, कार्यस्थल या पारिवारिक जीवन में लगातार बना रहने वाला मानसिक तनाव इस स्थिति को और ज्यादा बदतर बना देता है। जब दिमाग लगातार तनाव में रहता है, तो रक्त का दबाव लगातार उच्च बना रहता है, जिससे व्यक्ति बेहद आसानी से हाइपरटेंशन की चपेट में आ जाता है और आगे चलकर यह दिल की बीमारियों का कारण बनता है।

टाइप 2 डायबिटीज: पेट की बढ़ती चर्बी और फिजिकल एक्टिविटी न होने का खतरनाक नतीजा

भारत को दुनिया की ‘डायबिटीज कैपिटल’ कहा जाने लगा है, और इसमें सबसे बड़ा योगदान टाइप 2 डायबिटीज का है। इस बीमारी के पनपने की सबसे बड़ी वजह शरीर का बढ़ता हुआ कुल वजन और विशेष रूप से पेट के हिस्से (Belly Fat) के आसपास जमा होने वाली जिद्दी चर्बी है। आधुनिक दौर में शारीरिक श्रम या एक्सरसाइज न करना, घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना, और अत्यधिक मात्रा में मीठे ड्रिंक्स, जंक फूड या पैकेट वाले रिफाइंड फूड का सेवन करना इंसुलिन रेजिस्टेंस को जन्म देता है। हालांकि, चिकित्सा विज्ञान मानता है कि कुछ मामलों में यह बीमारी आनुवंशिक (Genetic) यानी परिवार के इतिहास के कारण भी हो सकती है, लेकिन वर्तमान समय में इसके तेजी से फैलने की मुख्य और सबसे बड़ी वजह पूरी तरह से हमारी खराब आदतें और लापरवाह लाइफस्टाइल ही हैं।

अस्थमा: सिर्फ वायु प्रदूषण नहीं, स्मोकिंग की लत और मोटापा भी घोंट रहे हैं सांसों का गला

अक्सर लोग अस्थमा या दमा की बीमारी को केवल बढ़ते हुए बाहरी वायु प्रदूषण या धूल-मिट्टी से जोड़कर देखते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन दिनों अस्थमा के बढ़ते मामलों के पीछे हमारी आंतरिक आदतें भी बेहद जिम्मेदार हैं। सिगरेट-बीड़ी की स्मोकिंग करना और किसी भी रूप में तंबाकू का लगातार सेवन करना हमारे फेफड़ों की कार्यक्षमता को पूरी तरह नष्ट कर देता है, जिससे सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियां जन्म लेती हैं। इसके अलावा, मोटापा भी अस्थमा का एक बहुत बड़ा और छिपा हुआ कारण बनकर उभरा है। जब शरीर का वजन सामान्य से बहुत अधिक हो जाता है, तो छाती और फेफड़ों की दीवारों पर अत्यधिक शारीरिक दबाव बढ़ने लगता है। इस बढ़े हुए दबाव के कारण फेफड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती, जिससे व्यक्ति को सांस लेने में भारी परेशानी होने लगती है और वह अस्थमा का मरीज बन जाता है।

इन लाइफस्टाइल बीमारियों से कैसे बचाएं खुद को? आज ही अपनी दिनचर्या में शामिल करें ये 5 अच्छी आदतें

अगर आप भी इन गंभीर और क्रॉनिक बीमारियों से खुद को और अपने परिवार को हमेशा के लिए सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो आपको आज और इसी वक्त से अपनी कुछ बेहद खराब आदतों में कड़ाई से सुधार करना होगा। देश के शीर्ष डॉक्टरों ने इन बीमारियों से बचाव के लिए निम्नलिखित 5 बेहद आसान और बेहद कारगर उपाय सुझाए हैं:

  • ताजा और पोषक भोजन अपनाएं: बाहर के डिब्बाबंद और जंक फूड को पूरी तरह अलविदा कहें और घर का बना ताजा, हरी सब्जियों और पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार ही लें।

  • तनाव प्रबंधन पर दें ध्यान: मानसिक तनाव को खुद पर हावी न होने दें। इसके लिए रोजाना कम से कम 15 से 20 मिनट का समय निकालकर ध्यान (Meditation) और प्राणायाम जरूर करें।

  • शारीरिक रूप से सक्रिय रहें: शरीर को हमेशा फिट और एक्टिव रखने के लिए रोजाना कम से कम 30 से 45 मिनट तक तेज पैदल चलें, योग करें या जिम में एक्सरसाइज करें।

  • सादा भोजन, उत्तम जीवन: अधिक तेल, अत्यधिक मसालेदार और ज्यादा नमक वाले भोजन से जितना हो सके परहेज करें और दैनिक जीवन में सादा भोजन करने की आदत डालें।

  • नशे से बनाएं सख्त दूरी: अपने फेफड़ों और पूरे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए स्मोकिंग (Smoking), शराब और किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पादों के सेवन से पूरी तरह दूरी बना लें।