भारी संकट में सरकारी तेल कंपनियां! हर घरेलू रसोई गैस सिलिंडर पर हो रहा ₹700 का नुकसान

वैश्विक स्तर पर मचे ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल व गैस की कीमतों में आई भारी तेजी का सीधा असर अब भारतीय तेल कंपनियों की बैलेंस शीट पर दिखने लगा है। घरेलू ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने और आम जनता को महंगाई की मार से बचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लगातार कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इसके बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर वित्तीय दबाव लगातार गहराता जा रहा है। एक ताजा सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, इन कंपनियों को वर्तमान में बेचे जा रहे प्रत्येक घरेलू एलपीजी सिलिंडर (Domestic LPG Cylinder) पर करीब 700 रुपये का भारी वित्तीय घाटा उठाना पड़ रहा है।

पश्चिम एशिया संकट के बीच बढ़ा भारी दबाव, कंपनियों की वित्तीय सेहत पर पड़ा असर

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक अंतर-मंत्रालयी उच्च स्तरीय ब्रीफिंग के दौरान देश के ऊर्जा परिदृश्य की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी उतार-चढ़ाव और विशेष रूप से पश्चिम एशिया में पैदा हुए भू-राजनीतिक संकट के चलते तेल और गैस के आयात की लागत में भारी वृद्धि हुई है। चूंकि सरकार घरेलू बाजार में आम उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस की कीमतों को एक निश्चित दायरे में नियंत्रित रख रही है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों की इस बढ़ोतरी का पूरा बोझ सीधे तौर पर सरकारी तेल कंपनियों को अपने कंधों पर उठाना पड़ रहा है, जिससे उन्हें प्रति सिलिंडर 700 रुपये का नुकसान हो रहा है।

तीन दिन में रिकॉर्ड 1.43 करोड़ सिलेंडरों की डिलीवरी, घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का पूरा जोर

इस भारी वित्तीय नुकसान के बावजूद देश के भीतर रसोई गैस की किल्लत न हो, इसके लिए सरकार पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है। संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि मंत्रालय ने देश के हर कोने में एलपीजी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई ठोस उपाय किए हैं। इसके तहत जहां एक तरफ घरेलू गैस के उत्पादन को तेजी से बढ़ाया गया है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक स्तर पर नए सुरक्षित आयात मार्गों की व्यवस्था की जा रही है ताकि मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को पूरी तरह पाटा जा सके। सरकार के इन प्रयासों का नतीजा है कि पिछले महज तीन दिनों के भीतर देश भर में रिकॉर्ड 1.43 करोड़ एलपीजी सिलिंडरों का सुरक्षित वितरण किया गया है। मंत्रालय ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण घटनाक्रमों के बाद भी भारत में कच्चे तेल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पूरी तरह स्थिर बनी हुई है और सरकार के पास पेट्रोल व डीजल का पर्याप्त आपातकालीन बफर स्टॉक मौजूद है।

हवाई यात्रियों और एयरलाइनों को मिली ऐतिहासिक राहत, अगले 3 साल के लिए फिक्स हुआ हवाई ईंधन (ATF) का दाम

एक अन्य बड़े और महत्वपूर्ण फैसले में सरकार ने घरेलू विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) को वैश्विक संकट से बचाने के लिए बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरकार ने घरेलू एयरलाइनों के लिए उपयोग होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी हवाई ईंधन का मूल्य अगले तीन साल की लंबी अवधि के लिए 86.32 रुपये प्रति लीटर पर पूरी तरह लॉक (फिक्स) कर दिया है। इस दूरगामी योजना का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हवाई ईंधन की कीमतों में आ रहे बेतहाशा उछाल से भारतीय एयरलाइनों को आर्थिक रूप से दिवालिया होने से बचाना है। सरकार के इस कदम से एयरलाइनों का परिचालन खर्च स्थिर रहेगा, जिसका सीधा फायदा आम हवाई यात्रियों को मिलेगा और अंतरराष्ट्रीय संकट के इस दौर में भी उनके लिए हवाई टिकटें बजट के भीतर और किफायती बनी रहेंगी।