Valley of Flowers Travel Guide: सिर्फ ₹150 के परमिट में देखें कुदरत का सबसे खूबसूरत नजारा; घर से निकलने से पहले पढ़ें यह रिपोर्ट

अगर आप इस चिलचिलाती गर्मी और शहरों की भागदौड़ से दूर किसी ऐसी जगह जाने की सोच रहे हैं जहाँ पैर रखते ही ऐसा लगे मानो आप परियों की कहानी वाली किसी काल्पनिक दुनिया में आ गए हैं, तो आपके लिए एक शानदार खबर है। उत्तराखंड के चमोली जिले में हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच बसी विश्व प्रसिद्ध वैली ऑफ फ्लावर्स (Valley of Flowers) यानी ‘फूलों की घाटी’ को आम जनता और ट्रेकर्स के लिए खोल दिया गया है।

समुद्र तल से करीब 3,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह खूबसूरत घाटी सर्दियों के महीनों में पूरी तरह बर्फ की सफेद चादर से ढकी रहती है। भारी बर्फबारी और विषम मौसम के कारण यह हर साल नवंबर से मई तक बंद रहती है और जून की शुरुआत होते ही इसे पर्यटकों के लिए खोल दिया जाता है। इस साल भी यह घाटी 31 अक्टूबर तक खुली रहेगी, जहाँ आप मानसून की फुहारों के बीच प्रकृति के सबसे अनोखे रंगों को लाइव देख सकते हैं।

यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट और दुर्लभ जीवों का घर

लगभग 87 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला यह नेशनल पार्क अपनी अद्वितीय सुंदरता के कारण यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल है। यहाँ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मानसून की दस्तक के साथ ही पूरी घाटी रंग-बिरंगे फूलों के कालीन में तब्दील हो जाती है।

  • 600 से ज्यादा फूलों की प्रजातियां: यहाँ आपको ऑर्किड्स, पॉपी, प्रिमुलस, मैरीगोल्ड और एनीमोन जैसे दुर्लभ और रंग-बिरंगे फूलों की 600 से अधिक प्रजातियां देखने को मिलेंगी, जो मई से सितंबर के बीच पूरी वादी को महका देती हैं।

  • दुर्लभ वन्यजीव: फूलों के अलावा यह नेशनल पार्क कई कस्तूरी मृग (Musk Deer), ग्रे लंगूर, लाइम बटरफ्लाई, हिमालयी वीजल, काले-भूरे भालू और बर्फीले तेंदुए (Snow Leopard) जैसे अत्यंत दुर्लभ और संरक्षित जीवों का प्राकृतिक आवास भी है।

यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन और ई-परमिट कैसे लें?

चूंकि यह खूबसूरत घाटी सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल श्री हेमकुंड साहिब के बिल्कुल करीब स्थित है, इसलिए यहाँ जाने वाले सभी यात्रियों की सुरक्षा के लिए उत्तराखंड सरकार ने कुछ कड़े और व्यवस्थित नियम बनाए हैं:

  1. टूरिस्ट रजिस्ट्रेशन: यात्रा पर निकलने से पहले उत्तराखंड सरकार के ऑफिशियल ‘टूरिस्ट केयर उत्तराखंड’ पोर्टल या उनके मोबाइल ऐप पर अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है।

  2. फॉरेस्ट विभाग का परमिट: वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क के अंदर एंट्री करने के लिए आपको उत्तराखंड वन विभाग से एक ई-परमिट लेना होता है। यह परमिट उत्तराखंड टूरिज्म की आधिकारिक वेबसाइट से ऑनलाइन भी लिया जा सकता है।

 ट्रेकर्स के लिए एक जरूरी सलाह

अगर आप चाहते हैं कि ऐन वक्त पर खराब मौसम या किसी तकनीकी खराबी के कारण आपकी यात्रा की तारीखें मिस न हों, तो सबसे बेहतर तरीका यह है कि आप बेस कैंप ‘घांघरिया’ पहुँचकर वहां बने फॉरेस्ट चेकपोस्ट से ट्रेक पर जाने की एक शाम पहले ही ऑफलाइन परमिट ले लें। यह परमिट लगातार 3 दिनों तक वैध (Valid) रहता है।

बजट और ट्रेकिंग का खर्च (Permit Fees & Tour Packages)

वैली ऑफ फ्लावर्स की यात्रा आप खुद भी प्लान कर सकते हैं या फिर किसी भरोसेमंद ट्रेकिंग एजेंसी के जरिए गाइडेड टूर पैकेज भी ले सकते हैं। इससे जुड़े खर्चों का पूरा विवरण नीचे दी गई तालिका में दिया गया है:

अगर आप भी इस साल प्रकृति के बीच कुछ सुकून के पल बिताना चाहते हैं और बादलों को छूते हुए फूलों के रास्तों पर चलना चाहते हैं, तो अपनी फिटनेस को थोड़ा दुरुस्त कीजिए, जरूरी सामान पैक कीजिए और निकल पड़िए उत्तराखंड की इस जादुई घाटी की सैर पर।