
उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी और शुचितापूर्ण ढंग से संपन्न कराने की दिशा में सरकार को एक बड़ी सफलता मिली है। प्रदेश में आयोजित हुई प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) भर्ती परीक्षा के दौरान सेंधमारी और फर्जीवाड़ा करने की कोशिश में जुटे एक बड़े परीक्षा माफिया नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कैमरों और सख्त बायोमेट्रिक सत्यापन तकनीक के चलते राज्य के अलग-अलग जिलों से दूसरे के स्थान पर परीक्षा दे रहे कुल 11 फर्जी अभ्यर्थियों (साल्वरों) को चिन्हित किया गया है। मुस्तैद पुलिस प्रशासन ने इनमें से 9 जालसाजों को मौके पर ही धर दबोचा और जेल भेज दिया, जबकि 2 आरोपी पुलिस को चकमा देकर परीक्षा केंद्रों से फरार होने में कामयाब रहे, जिनकी तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी जारी है।
एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम से पल-पल की निगरानी, जाल में फंसे मुन्नाभाई
टीजीटी भर्ती परीक्षा के कुल 15 विषयों में से बुधवार को आठ प्रमुख विषयों की लिखित परीक्षा दो अलग-अलग पालियों में आयोजित की गई थी। इस बार परीक्षा को पूरी तरह लीक-प्रूफ बनाने के लिए आयोग के मुख्यालय में एक अत्याधुनिक ‘एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम’ स्थापित किया गया था। खुद आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार, सचिव, परीक्षा नियंत्रक और तमाम वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में प्रदेश के सभी केंद्रों पर लगे एआई कैमरों से लाइव मॉनिटरिंग की जा रही थी। इस हाई-टेक चेकिंग के दौरान पहली पाली में लखनऊ, बरेली और चित्रकूट से दो-दो और जौनपुर व मिर्जापुर से एक-एक फर्जी अभ्यर्थी रंगे हाथों पकड़ा गया। वहीं, दूसरी पाली में लखनऊ से दो और हाथरस से एक साल्वर दबोचा गया।
राजधानी के इन प्रमुख कॉलेजों में फेल हुआ साल्वरों का दांव
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ इस फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरी, जहां अकेले चार आरोपियों को दबोचा गया। अमीनाबाद के प्रसिद्ध विद्यांत हिंदू इंटर कॉलेज केंद्र पर पहली पाली के दौरान जब अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन चल रहा था, तभी एक अभ्यर्थी जितेंद्र सिंह यादव का अंगूठे का निशान और डेटा मिसमैच पाया गया। इसी तरह नाका इलाके के डीएवी डिग्री कॉलेज से साल्वर रंग बहादुर, चारबाग के बप्पा श्रीनरायण वोकेशनल गर्ल्स इंटर कॉलेज से राजेश और महानगर के आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज से मनतेश सिंह को पुलिस ने दबोच लिया।
आधार और पहचान पत्र में फोटो बदलकर एंट्री, पर बायोमेट्रिक ने खोली पोल
हाथरस के सरस्वती इंटर कॉलेज में भी दूसरी पाली में एक परीक्षार्थी को पहचान पत्र के बायोमेट्रिक मिलान न होने पर पकड़ा गया। उधर, बरेली जिले में दो बेहद हैरान करने वाले मामले सामने आए। इस्लामियां गर्ल्स इंटर कॉलेज में सामाजिक विज्ञान की परीक्षा के दौरान कक्ष संख्या 18 में तैनात एक संदिग्ध युवक की जब बायोमैट्रिक जांच की गई, तो उसका डेटा मुख्य अभ्यर्थी से मेल नहीं खाया। कड़ाई से की गई पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम प्रमोद कुमार (निवासी आजमगढ़) बताया। उसने कबूल किया कि वह फर्रुखाबाद के मूल अभ्यर्थी विमल कुमार की जगह परीक्षा देने आया था और इसके लिए बकायदा डेढ़ लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। आरोपी प्रमोद ने मूल अभ्यर्थी के पहचान पत्र पर अपनी फोटो मिक्स करके केंद्र में एंट्री तो पा ली थी, लेकिन वह डिजिटल सिस्टम को चकमा नहीं दे पाया।
पूरी परीक्षा देने के बाद पकड़ा गया 46 वर्षीय कोचिंग संचालक, ₹5000 के लिए ली थी रिस्क
बरेली कॉलेज परीक्षा केंद्र पर तो जालसाजी की सारी हदें पार हो गईं। यहां 33 वर्षीय मूल अभ्यर्थी रविंद्र की जगह परीक्षा देने 46 साल का अधेड़ राम मनोहर प्रजापति पहुंच गया। शातिर राम मनोहर ने रविंद्र के नाम से बने एक फर्जी पैन कार्ड के जरिए बायोमैट्रिक प्रक्रिया को किसी तरह चकमा दिया और परीक्षा कक्ष में बैठकर पूरी परीक्षा भी दे डाली। लेकिन परीक्षा समाप्त होने के बाद जब बायोमैट्रिक सत्यापन करने वाली मुख्य एजेंसी ने दोबारा डेटा का मिलान किया, तो उसकी उम्र और विवरण में भारी विसंगति पकड़ी गई। शुरुआत में वह खुद को रविंद्र ही बताता रहा, लेकिन पुलिस के आते ही उसने घुटने टेक दिए। आरोपी ने बताया कि वह प्रयागराज के मंफोडगंज में खुद का कोचिंग सेंटर चलाता है और महज ₹5000 की तत्काल जरूरत के चलते इस गिरोह के झांसे में आ गया था। फिलहाल, संबंधित स्कूलों की प्रधानाचार्यों की तहरीर पर पुलिस ने धोखाधड़ी और परीक्षा अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर पूरे सॉल्वर गैंग की कुंडली खंगालना शुरू कर दिया है।
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