कानून के आगे झुका रसूख: त्विषा शर्मा मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला और बेटा समर्थ पहुंचे जेल, मुख्य द्वार पर हुआ भारी ड्रामा

नोएडा की रहने वाली त्विषा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का हाई-प्रोफाइल मामला इन दिनों देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस पूरे मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बहुत बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने इस केस के मुख्य आरोपी समर्थ सिंह और उनकी मां (पूर्व जज गिरिबाला सिंह) दोनों को गिरफ्तार करने के बाद अदालत के आदेश पर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

अदालत से जेल वारंट जारी होते ही सीबीआई की टीम दोनों आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच अलग-अलग गाड़ियों में लेकर दोपहर ठीक 3:39 बजे गांधीनगर सेंट्रल जेल पहुंची। लेकिन इसके बाद जेल के मुख्य दरवाजे पर जो कुछ भी हुआ, उसने वहां मौजूद सभी लोगों को हैरान कर दिया।

“कार में बैठकर ही अंदर जाऊंगी…” जेल के गेट पर भड़कीं पूर्व जज

जैसे ही सीबीआई की गाड़ियां गांधीनगर सेंट्रल जेल के मुख्य गेट पर आकर रुकीं, वहां का माहौल पूरी तरह बदल गया। जेल के नियमों के मुताबिक सुरक्षाकर्मियों ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह से गाड़ी से उतरकर पैदल अंदर जाने को कहा। लेकिन बाहर मीडियाकर्मियों के कैमरों और भारी भीड़ को देखकर पूर्व जज का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

 जेल के दरवाजे का हाई-वोल्टेज ड्रामा

पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने नियमों को मानने से साफ इनकार कर दिया और कार से उतरने के लिए तैयार नहीं हुईं। जब मीडियाकर्मियों ने कार के शीशे के पास आकर उनकी तस्वीरें लेनी शुरू कीं, तो वे हाथ में पकड़ी पानी की बोतल से इशारा करके उन्हें हटाने लगीं। उन्होंने वहां मौजूद सीबीआई अधिकारियों पर सीधा दबाव बनाया कि उनकी गाड़ी को गेट के अंदर तक ले जाने दिया जाए। हालांकि, जेल प्रशासन ने स्पष्ट रूप से नियमों का हवाला देते हुए ऐसा करने से मना कर दिया। काफी बहस के बाद आखिरकार कार को बैक करके सीधे मुख्य दरवाजे से सटाकर लगाया गया, जिसके बाद वे उतरकर सीधे जेल अधीक्षक (Jail Superintendent) के केबिन में चली गईं। उनके ठीक पीछे उनका आरोपी बेटा समर्थ भी अंदर दाखिल हुआ।

जेल में रसूख खत्म: मिले अलग-अलग वार्ड और बंदी नंबर

जेल के भीतर जाते ही दोनों आरोपियों का रसूख पूरी तरह खत्म हो गया और उन्हें आम कैदियों की तरह ही ट्रीट किया गया। जेल दाखिले की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोनों को अलग-अलग बैरकों में शिफ्ट कर दिया गया है।

इस पूरी वीआईपी मूवमेंट के दौरान जेल प्रबंधन पर बाहरी और राजनीतिक दबाव साफ तौर पर महसूस किया गया। खबरों के मुताबिक, इस दौरान जेल अधीक्षक के पास करीब सात वीआईपी फोन आए, लेकिन उन्होंने किसी भी कॉल का जवाब नहीं दिया। इसके बाद अधिकारियों के मोबाइल नंबर पर मैसेज भी छोड़े गए, जिससे अधिकारियों ने पूरी तरह दूरी बना ली। यहां तक कि उप जेल अधीक्षक मंगनु सिंह मरावी ने भी मीडिया के सवालों और फोन से बचने के लिए अपना मोबाइल पूरी तरह बंद कर लिया।

‘स्त्रीधन’ की जब्ती और सीबीआई की जांच हुई तेज

बीती 12 मई को हुई त्विषा शर्मा की इस रहस्यमयी मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए सीबीआई अब हर एक वित्तीय और पारिवारिक पहलू को खंगाल रही है। जांच को आगे बढ़ाते हुए एजेंसी ने एक और बड़ा कदम उठाया है:

  • गहनों का मूल्यांकन: सीबीआई ने त्विषा को शादी के समय मायके और ससुराल से मिले सोने के सभी उपहारों (स्त्रीधन) को अपने कब्जे में ले लिया है। इन जेवरातों की शुद्धता, वजन और मौजूदा बाजार कीमत का सटीक आकलन करने के लिए एक पेशेवर जौहरी (Jeweler) को भी तलब किया गया है।

  • दहेज प्रताड़ना का पुख्ता सबूत: जांच टीम इस जब्ती और जौहरी की मूल्यांकन रिपोर्ट को केस डायरी में दहेज प्रताड़ना (Dowry Harassment) और वित्तीय साक्ष्य के रूप में शामिल करेगी, जिससे अदालत में केस को और मजबूत किया जा सके।

  • बयान दर्ज: इसके साथ ही सीबीआई ने घटना के वक्त घर के भीतर मौजूद करीबी रिश्तेदारों और घर के रसोइए (Cook) के विस्तृत बयान भी दर्ज कर लिए हैं, ताकि उस दिन की कड़ियों को आपस में जोड़ा जा सके।