देवभूमि में शराब के खिलाफ ‘धार्मिक’ शंखनाद: 2027 चुनाव से पहले घर-घर गीता, गंगाजल और हनुमान चालीसा बांटेंगे हरीश पनेरू

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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : उत्तराखंड की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अभी से बिसात बिछनी शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता और पूर्व दर्जा राज्यमंत्री हरीश पनेरू ने प्रदेश में बढ़ते नशे के कारोबार और चुनावों में शराब के दुरुपयोग के खिलाफ एक अनोखी मुहिम छेड़ी है। पनेरू ने एलान किया है कि वे वोट के बदले शराब बांटने वाली संस्कृति को खत्म करने के लिए लोगों के बीच जाकर उन्हें धार्मिक ग्रंथों और गंगाजल के जरिए जागरूक करेंगे।

शराब के बदले ‘आध्यात्मिक’ ज्ञान की पहल

शुक्रवार को हल्द्वानी के एक रेस्टोरेंट में प्रेस वार्ता के दौरान हरीश पनेरू ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड ‘देवभूमि’ है, लेकिन यहां चुनाव जीतने के लिए पैसे और शराब का नंगा नाच होता है। उन्होंने कहा, “पहाड़ की युवा पीढ़ी नशे की गर्त में जा रही है और माता-बहनों का सुहाग उजड़ रहा है। मैं लोगों को गीता का ज्ञान और हनुमान जी की शक्ति याद दिलाना चाहता हूं ताकि वे इस बुराई के खिलाफ खड़े हो सकें।”

अधिकारी से लेकर आम घर तक पहुंचेगी सामग्री

पनेरू ने अपनी मुहिम का रोडमैप साझा करते हुए बताया कि वे 2027 के चुनावों से पहले प्रत्येक घर में दस्तक देंगे।

क्या बांटेंगे: गंगाजल, हनुमान चालीसा और श्रीमद्भगवद्गीता।

किसे देंगे: जिलाधिकारी (DM), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), कमिश्नर और विधायकों से लेकर हर आम नागरिक तक यह धार्मिक सामग्री पहुंचाई जाएगी।

‘नशा मुक्त देवभूमि’ चुनाव का मुख्य एजेंडा

कांग्रेस नेता ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो लोग शराब के बल पर चुनाव जीतने का सपना देख रहे हैं, उनके लिए अब राह आसान नहीं होगी। उन्होंने इस मुहिम को अपना मुख्य चुनावी एजेंडा घोषित किया है। पनेरू का मानना है कि जब घर-घर में गंगाजल और पवित्र ग्रंथ पहुंचेंगे, तो लोगों में नैतिक साहस बढ़ेगा और वे शराब के लालच में आकर अपना वोट नहीं बेचेंगे।

हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में पनेरू की इस अनूठी पहल की चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम केवल नशे के खिलाफ लड़ाई नहीं, बल्कि वोटरों से भावनात्मक जुड़ाव बनाने की एक बड़ी कोशिश भी है।