
दुनिया के कुछ हिस्सों में घातक इबोला वायरस (Ebola Virus) के बढ़ते खतरों को देखते हुए भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस संबंध में एक बेहद महत्वपूर्ण और देशव्यापी एडवाइजरी जारी की है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने देशवासियों को राहत देते हुए साफ तौर पर स्पष्ट किया है कि वर्तमान में भारत में इबोला का एक भी केस यानी कोई मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद, भविष्य में किसी भी संभावित खतरे से निपटने और देश को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने एहतियातन यह कदम उठाया है और लोगों से विशेष सावधानियां बरतने की अपील की है।
सरकार ने क्यों जारी की अचानक यह एडवाइजरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, इबोला एक बेहद संक्रामक और जानलेवा बीमारी है, जिसका मृत्यु दर काफी अधिक होता है। वैश्विक स्तर पर हो रही आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के कारण कोई भी वायरस तेजी से एक देश से दूसरे देश में फैल सकता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने पहले से ही अपनी तैयारियों को पुख्ता करना शुरू कर दिया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य देश के एयरपोर्ट्स, पोर्ट्स और स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट करना है ताकि बाहर से आने वाले संदिग्ध मरीजों की समय रहते पहचान की जा सके और देश में इसके प्रवेश को पूरी तरह रोका जा सके।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्या सावधानियां बरतने की दी है सलाह
मंत्रालय द्वारा जारी की गई गाइडलाइन में आम जनता और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए कुछ बेहद जरूरी एहतियाती उपाय बताए गए हैं। सरकार ने सलाह दी है कि लोग उन देशों की यात्रा करने से बचें जहां वर्तमान में इबोला का प्रकोप फैला हुआ है। इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति प्रभावित देशों से लौट रहा है, तो उसे हवाई अड्डे पर अपनी सही ट्रेवल हिस्ट्री (यात्रा विवरण) साझा करनी होगी। एडवाइजरी में व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने, साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोने और किसी भी बीमार व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से बचने की हिदायत दी गई है।
लक्षणों को न करें नजरअंदाज, तुरंत डॉक्टर से करें संपर्क
इबोला वायरस के शुरुआती लक्षण आम फ्लू या अन्य सामान्य बीमारियों जैसे लग सकते हैं, इसलिए सरकार ने इसके प्रति सजग रहने को कहा है। अगर किसी व्यक्ति को अचानक तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराश जैसी शिकायत होती है, तो उसे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में रिपोर्ट करना चाहिए। गंभीर स्थिति में मरीज के शरीर के अंदरूनी और बाहरी अंगों से ब्लीडिंग (रक्तस्राव) भी हो सकती है। सरकार ने स्वास्थ्य विभागों को निर्देश दिया है कि वे आइसोलेशन वार्ड्स और जरूरी दवाओं का स्टॉक तैयार रखें ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
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