
नई दिल्ली, बिजनेस ब्यूरो। देश की प्रमुख विमानन कंपनियों (Airlines) को अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर सरकार और तेल कंपनियों से एक बड़ी राहत मिली है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए इस्तेमाल होने वाले विमानन टरबाइन ईंधन (Aviation Turbine Fuel – ATF) की कीमतों में 27 प्रतिशत की भारी कटौती करने का ऐलान किया है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में जेट ईंधन की कीमतों में सीधे 400 डॉलर प्रति किलोलीटर की बड़ी कमी आई है। इस कटौती के बाद अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ईंधन के दाम लगभग घरेलू उड़ानों के समान स्तर पर आ गए हैं। हालांकि, घरेलू उड़ानों का सफर करने वाले यात्रियों और एयरलाइंस के लिए अभी भी राहत की खबर नहीं है, क्योंकि ओएमसी ने लगातार दूसरे महीने घरेलू जेट ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है।
बढ़ती परिचालन लागत से हांफ रही थीं एयरलाइंस, रोजाना 100 उड़ानें हो रही थीं रद्द
विमान ईंधन की आसमान छूती कीमतों ने भारतीय एयरलाइंस कंपनियों की कमर तोड़कर रख दी थी। हालात इस कदर बिगड़ चुके थे कि बढ़ती परिचालन लागत (Operational Cost) के कारण एयर इंडिया जैसी बड़ी एयरलाइंस को रोजाना लगभग 100 उड़ानें तक रद्द करनी पड़ रही थीं। ईंधन की मार का सबसे ज्यादा असर यूरोप, उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर जाने वाले अंतरराष्ट्रीय रूटों पर देखने को मिल रहा था। कई लंबी दूरी के मार्गों पर तो एयरलाइंस अपनी बुनियादी परिचालन लागत वसूलने के लिए भी कड़ा संघर्ष कर रही थीं। कंपनियों ने चेतावनी दी थी कि अगर ईंधन के दाम नीचे नहीं आए, तो वे उड़ानों की संख्या में और भी बड़ी कटौती करने पर मजबूर हो जाएंगे। ऐसे में 27% की यह ताजा कटौती अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए संजीवनी साबित होगी।
पश्चिम एशिया संकट के बीच एयरलाइंस ने की थी टालने की मांग, मई में लगा था झटका
याद दिला दें कि पिछले महीने मई में की गई घोषणा के दौरान जहां घरेलू एटीएफ की कीमतें स्थिर थीं, वहीं अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए जेट ईंधन के दाम 76.55 डॉलर प्रति किलोलीटर बढ़ाकर सीधे 1,511.86 डॉलर प्रति किलोलीटर कर दिए गए थे। इसके पहले, प्रमुख भारतीय एयरलाइंस ने सरकारी तेल रिफाइनरियों से सामूहिक रूप से अनुरोध किया था कि वे पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे युद्ध और तनाव के समाप्त होने तक घरेलू उड़ानों के लिए जेट ईंधन की कीमतों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी को फिलहाल स्थगित कर दें। इसी दबाव के बीच केंद्र सरकार ने अप्रैल महीने में भी घरेलू एटीएफ की कीमतों में वृद्धि को अधिकतम 25 प्रतिशत तक ही सीमित रखने का फैसला किया था।
वैट (VAT) कम करने के लिए राज्य सरकारों ने बढ़ाए हाथ, महाराष्ट्र में 18% से घटकर हुआ 7%
विमानन क्षेत्र को संकट से उबारने के लिए केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकारों ने भी अपने स्तर पर टैक्स में कटौती शुरू की है। दिल्ली और महाराष्ट्र की राज्य सरकारों ने एटीएफ पर लगने वाले मूल्यवर्धित कर (वैट) को काफी कम कर दिया है।
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महाराष्ट्र सरकार का बड़ा कदम: महाराष्ट्र सरकार ने विमान ईंधन पर लगने वाले वैट को मौजूदा 18% से भारी कटौती के साथ सीधे 7% कर दिया है। टैक्स में की गई यह बड़ी राहत आगामी 14 नवंबर तक पूरी तरह से प्रभावी रहेगी, जिससे मुंबई जैसे व्यस्त हवाई अड्डों से उड़ान भरने वाली एयरलाइंस को बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी।
पेट्रोल-डीजल और एटीएफ के निर्यात शुल्क (Export Duty) में भी संशोधन
इसी सिलसिले में केंद्र सरकार ने संशोधित दरों की एक आधिकारिक अधिसूचना भी जारी की है। नए सरकारी आदेश के मुताबिक, देश से होने वाले पेट्रोल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) की दर 1.5 रुपये प्रति लीटर तय की गई है, जबकि आरआईसी (RIC) को शून्य रखा गया है। इसी तरह, डीजल के निर्यात पर शुल्क 13.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ (जेट ईंधन) के निर्यात पर केवल 9.5 रुपये प्रति लीटर की दर से विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) लागू रहेगा।
घरेलू उड़ानों पर कटौती का खतरा बरकरार, 1 जून से 3 महीने की कटौती संभव
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली इस बड़ी राहत के बावजूद, भारत के भीतर घरेलू हवाई सफर करने वाले यात्रियों की मुश्किलें कम नहीं होने वाली हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की घरेलू कीमतों में कोई कमी न होने के कारण देश की दो सबसे बड़ी एयरलाइंस, एयर इंडिया और इंडिगो 1 जून से अपनी घरेलू उड़ानों की संख्या में भारी कटौती कर सकती हैं। ईंधन की ऊंची कीमतों से होने वाले वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए यह कटौती अगले तीन महीनों तक जारी रहने की आशंका है। ऐसे में आने वाले दिनों में देश के भीतर हवाई टिकटें और भी ज्यादा महंगी हो सकती हैं।
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