मिडिल ईस्ट में बिछेगी नई एनर्जी बिसात, ईरान को बाइपास कर यूरोप तक पाइपलाइन ले जाएगा तुर्किये

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News India Live, Digital Desk: मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य तनाव और युद्ध के बीच तुर्किये एक ऐसी रणनीतिक चाल चल रहा है, जो आने वाले समय में वैश्विक ऊर्जा राजनीति (Global Energy Politics) का नक्शा बदल सकती है। तुर्किये एक विशाल पाइपलाइन नेटवर्क विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सप्लाई चेन से ईरान को पूरी तरह बाहर (Bypass) करना है। यह योजना न केवल ईरान की आर्थिक कमर तोड़ सकती है, बल्कि यूरोप की गैस और तेल जरूरतों के लिए तुर्किये को सबसे बड़े ‘हब’ के रूप में स्थापित कर देगी।

बसरा से यूरोप तक: तुर्किये का महात्वाकांक्षी रोडमैप

तुर्किये के ऊर्जा मंत्री अल्परस्लान बायरक्तार द्वारा प्रस्तावित इस मास्टरप्लान का केंद्र इराक का तेल समृद्ध दक्षिणी क्षेत्र बसरा है। वर्तमान में इराक-तुर्किये पाइपलाइन के जरिए किरकुक से तेल तुर्किये के सेहान बंदरगाह तक पहुंचता है। अब नई योजना के तहत इस नेटवर्क को खाड़ी देशों तक विस्तार देने की तैयारी है, ताकि सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों का तेल और गैस भी इसी रास्ते यूरोप पहुंच सके।

कतर-तुर्किये गैस पाइपलाइन: ईरान पर निर्भरता होगी खत्म

हाल के दिनों में ईरान द्वारा तुर्किये को दी जाने वाली गैस सप्लाई में बार-बार बाधा डालने और तकनीकी खराबी का हवाला देकर सप्लाई रोकने की घटनाओं ने अंकारा को चौकन्ना कर दिया है। इसके जवाब में तुर्किये ने कतर-तुर्किये गैस पाइपलाइन का प्रस्ताव फिर से मेज पर रखा है।

प्रस्तावित मार्ग: यह पाइपलाइन कतर से शुरू होकर सऊदी अरब, जॉर्डन और सीरिया के रास्ते तुर्किये पहुंचेगी।

फायदा: इससे तुर्किये और यूरोप को एक स्थिर और वैकल्पिक गैस स्रोत मिलेगा, जिससे ईरान की ‘एनर्जी ब्लैकमेलिंग’ की शक्ति खत्म हो जाएगी।

ट्रांस-कैस्पियन पाइपलाइन: बदल जाएगा शक्ति संतुलन

तुर्किये एक और बड़े प्रोजेक्ट ‘ट्रांस-कैस्पियन गैस पाइपलाइन’ को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। इस योजना के तहत तुर्कमेनिस्तान की विशाल गैस संपदा को कैस्पियन सागर के नीचे से अजरबैजान और फिर तुर्किये के रास्ते यूरोप तक पहुंचाया जाएगा। यदि यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो मध्य एशिया से यूरोप तक ऊर्जा सप्लाई का एक ऐसा कॉरिडोर बनेगा जिसमें रूस और ईरान की कोई भूमिका नहीं होगी।

ईरान के लिए बढ़ती चुनौतियां और ‘फोर्स मेज्योर’ का असर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कतर एनर्जी ने अपने कई दीर्घकालिक LNG कॉन्ट्रैक्ट्स पर ‘फोर्स मेज्योर’ (अपरिहार्य परिस्थितियां) लागू कर दिया है, जिससे इटली, बेल्जियम और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में ऊर्जा संकट गहरा गया है। ऐसे में तुर्किये खुद को एक सुरक्षित ‘ट्रांजिट रूट’ के रूप में पेश कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के नेतृत्व में सऊदी अरब भी ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए तुर्किये के इस प्लान का समर्थन कर सकता है।

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