
अक्सर देखा गया है कि हार्ट अटैक (दिल का दौरा) आने के बाद लोग शारीरिक रूप से बेहद सुस्त हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि अब उनका दिल कमजोर हो चुका है, इसलिए उन्हें ज्यादा हिलना-डुलना नहीं चाहिए ताकि दिल पर दबाव न पड़े। अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो सावधान हो जाइए! यह धारणा न सिर्फ गलत है, बल्कि आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक भी हो सकती है।
अगर हार्ट अटैक के बाद हुई सर्जरी या इलाज से आपका शरीर रिकवर हो चुका है, तो डॉक्टरों की सलाह पर दोबारा फिजिकल एक्टिविटी और वर्कआउट शुरू करना बेहद जरूरी है। हमारा दिल भी शरीर की किसी दूसरी मांसपेशी (Muscle) की तरह ही है, जिसे एक्सरसाइज के जरिए ही मजबूत बनाया जा सकता है। हार्ट अटैक के बाद कसरत से दूरी बनाने का मतलब है दूसरी बार बीमारी को न्योता देना। आइए जानते हैं कि रिकवरी के बाद कब और कौन सी एक्सरसाइज करना आपके लिए लाइफ-सेवर साबित हो सकता है।
कब शुरू करें वर्कआउट? जानिए टाइमलाइन
हार्ट अटैक के बाद आपको कब से कसरत शुरू करनी है, इसका अंतिम फैसला हमेशा आपके डॉक्टर और आपके ट्रीटमेंट के तरीके पर निर्भर करता है। हालांकि, सामान्य तौर पर पहले से छठे हफ्ते (1 to 6 weeks) के दौरान बेहद लो-लेवल एक्टिविटीज करने की सलाह दी जाती है।
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शुरुआत में रोज सिर्फ 2 से 3 मिनट की वॉक (टहलना) करें।
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धीरे-धीरे इस समय को बढ़ाएं और हफ्ते में 5 दिन कम से कम 30 मिनट की वॉक का टारगेट सेट करें।
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वॉक के अलावा घर की हल्की सफाई या गार्डनिंग (बागवानी) जैसी रोजमर्रा की गतिविधियों को भी धीरे-धीरे 10 मिनट तक कर सकते हैं।
हार्ट अटैक रिकवरी के लिए 5 सबसे सुरक्षित और आसान एक्सरसाइज
हार्ट से जुड़े ट्रीटमेंट के बाद शरीर पर बिना अतिरिक्त तनाव डाले स्टेमिना और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने के लिए आप इन लाइट एक्सरसाइज को अपने रूटीन का हिस्सा बना सकते हैं:
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शॉर्ट वॉक (छोटी सैर): रिकवरी के शुरुआती दिनों में रोजाना 5 से 10 मिनट की वॉक से शुरुआत करें। यह बिना किसी स्ट्रेस के आपके शरीर की कार्यक्षमता को बढ़ाती है।
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डीप ब्रीदिंग (सांसों की कसरत): शॉर्ट वॉक के साथ ब्रीदिंग एक्सरसाइज जरूर करें। लंबी और गहरी सांस लेने व छोड़ने से मानसिक तनाव कम होता है और दिल की धड़कनें शांत व नियंत्रित रहती हैं।
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अपर बॉडी स्ट्रेचिंग: अगर आपकी ओपन हार्ट या कोई अन्य सर्जरी हुई है, तो 1 से 6 सप्ताह के बाद डॉक्टर की सलाह पर बाजुओं और कंधों की हल्की स्ट्रेचिंग करें। इससे ऊपरी शरीर की मांसपेशियां एक्टिव और रिलैक्स रहती हैं।
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हील रेजेज (Heel Raises): दिल से लेकर पैरों तक खून का दौरा (Blood Flow) सही बनाए रखने के लिए यह बेहतरीन कसरत है। इसमें शुरुआत में किसी कुर्सी का सपोर्ट लेकर खड़े हो जाएं और अपनी एड़ियों को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करें। इससे पैर मजबूत होते हैं।
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सिट टू स्टैंड (Sit to Stand): यह बेहद सुरक्षित एक्सरसाइज है। इसके लिए एक मजबूत कुर्सी पर बैठें और फिर बिना झटके के धीरे से खड़े हों, फिर बैठें। यह प्रक्रिया आपकी लोअर बॉडी (निचले हिस्से) की स्ट्रेंथ को सुरक्षित तरीके से बढ़ाती है।
वर्कआउट के दौरान इन 3 रेड सिग्नल्स को कभी न करें इग्नोर
हार्ट के मरीजों को कसरत करते समय बेहद सतर्क रहने की जरूरत होती है। अगर एक्सरसाइज के दौरान या बाद में आपको नीचे दिए गए 3 लक्षणों में से कोई भी महसूस हो, तो तुरंत वर्कआउट रोक दें और बिना देरी किए अपने कार्डियोलॉजिस्ट (दिल के डॉक्टर) से संपर्क करें:
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सीने में भारीपन, जकड़न या दर्द होना (Chest Pain)
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अचानक चक्कर आना या आंखों के सामने अंधेरा छाना (Dizziness)
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बहुत ज्यादा सांस फूलना या सांस लेने में तकलीफ होना (Shortness of Breath)
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