
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर एनकाउंटर और कानून व्यवस्था बड़ा मुद्दा बन गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार की पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपी पुलिस की बंदूक तभी चलती है, जब आरोपी पिछड़ा, दलित या अल्पसंख्यक वर्ग से होता है। इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में तीखी बहस शुरू हो गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार लगातार अपनी सख्त कानून व्यवस्था और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को उपलब्धि के तौर पर पेश करती रही है। सरकार का दावा है कि अपराध और माफिया राज पर लगाम लगाने के लिए कठोर कदम उठाए गए हैं। वहीं विपक्ष इन कार्रवाइयों को लेकर सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा।
अखिलेश यादव ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने कहा कि यूपी में पुलिस एनकाउंटर को लेकर दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि जिन लोगों पर कार्रवाई होती है, उनमें बड़ी संख्या पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की होती है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार कानून व्यवस्था के नाम पर भय का माहौल बना रही है।
सपा प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रदेश में अपराध और एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है। विपक्ष लगातार सरकार से सवाल पूछ रहा है कि क्या एनकाउंटर ही कानून व्यवस्था का स्थायी समाधान है।
योगी सरकार का दावा- अपराधियों पर लगातार कार्रवाई
दूसरी तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी सरकार की नीति को लेकर पूरी तरह आक्रामक नजर आते हैं। योगी सरकार बार-बार यह दोहराती रही है कि अपराधी चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री कई मंचों से साफ कह चुके हैं कि “माफिया हो या कानून को चुनौती देने वाला अपराधी, उसे मिट्टी में मिला दिया जाएगा।”
सरकारी आंकड़ों के अनुसार योगी आदित्यनाथ के करीब 9 साल के कार्यकाल में प्रदेश में हजारों पुलिस एनकाउंटर हुए हैं। औसतन देखा जाए तो हर दिन करीब पांच एनकाउंटर की चर्चा सामने आती रही है। सरकार का कहना है कि इन कार्रवाइयों से अपराधियों में डर पैदा हुआ है और प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत हुई है।
एनकाउंटर पर राजनीति क्यों तेज हुई?
उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर हमेशा से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रहे हैं। एक पक्ष इन्हें अपराध नियंत्रण के लिए जरूरी मानता है, जबकि दूसरा पक्ष इसे मानवाधिकार और निष्पक्ष जांच के नजरिए से देखता है। यही वजह है कि जैसे-जैसे चुनावी माहौल नजदीक आता है, एनकाउंटर की राजनीति भी तेज हो जाती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यूपी में कानून व्यवस्था हमेशा बड़ा चुनावी मुद्दा रही है। योगी सरकार जहां सख्त प्रशासनिक छवि को अपनी ताकत मानती है, वहीं विपक्ष इसे सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों के मुद्दे से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की कोशिश करता है।
जनता के बीच क्या संदेश देने की कोशिश?
अखिलेश यादव अपने बयान के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं भाजपा और योगी सरकार अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को जनता के सामने मजबूती से रख रही है। यही वजह है कि यूपी की राजनीति में एनकाउंटर सिर्फ कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक हथियार भी बन चुका है।
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