यूपी में ओबीसी आरक्षण को लेकर ग्राम प्रधानों की मांग, कहा 2011 की जनगणना के आधार पर फैसला होगा गलत

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों (UP Panchayat Chunav) को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य सरकार द्वारा निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों का प्रशासक (Administrator) बनाए जाने के फैसले के बाद जहां एक तरफ खुशी का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ आरक्षण के फॉर्मूले को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।

राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन ने अब मांग उठाई है कि आगामी पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का आरक्षण साल 2011 की जनगणना के बजाय नई जनगणना के आंकड़ों के आधार पर तय किया जाना चाहिए। संगठन जल्द ही इस संबंध में समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग और राज्य सरकार को एक मांग पत्र सौंपने जा रहा है।

“2011 की जनगणना के आधार पर आरक्षण तय करना ठीक नहीं”  जानें इसके पीछे का गणित

बुधवार को लखनऊ के एक होटल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अखिलेश सिंह और प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा ने इसके पीछे की ठोस वजह बताई।

  • आबादी का बड़ा पलायन: संगठन के अनुसार, पिछले 15 वर्षों में उत्तर प्रदेश की ग्रामीण आबादी में बड़ा बदलाव आया है। राज्य की ग्रामीण आबादी 78 प्रतिशत से घटकर अब लगभग 70 प्रतिशत रह गई है।

  • 8% आबादी का स्थानांतरण: इस दौरान करीब 8 फीसदी ग्रामीण आबादी शहरों की ओर पलायन (माइग्रेट) कर चुकी है।

  • तर्क: जब आबादी का ढांचा इतना बदल चुका है, तो 15 साल पुराने (2011 के) आंकड़ों के आधार पर ओबीसी सीटों का निर्धारण करना तार्किक नहीं होगा और इससे कई योग्य ग्राम पंचायतों को सही प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाएगा। इसलिए नई जनगणना के आंकड़े ही सटीक आधार होने चाहिए।

सरकार के फैसले का स्वागत: ‘योगी सरकार को देंगे रिटर्न गिफ्ट’

प्रशासक बनाए जाने के फैसले पर संगठन ने उत्तर प्रदेश सरकार का आभार जताया है। पदाधिकारियों ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक निर्णय है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड जैसे राज्यों में यह व्यवस्था पहले से लागू थी, लेकिन यूपी में इसके लिए प्रधानों ने लंबी और तथ्यपूर्ण लड़ाई लड़ी है।

अब इस फैसले के सम्मान में संगठन जिला और ब्लॉक स्तर पर आभार कार्यक्रमों का आयोजन करेगा। प्रधानों ने घोषणा की है कि वे आने वाले चुनावों में योगी सरकार को ‘रिटर्न गिफ्ट’ देंगे। इसके साथ ही, संगठन अब देश भर के लगभग 2.50 लाख प्रधानों के लिए एक यूनिक वेलफेयर पॉलिसी (Unique Welfare Policy) तैयार कराने पर काम कर रहा है।

7.32 लाख पंचायत सदस्यों का कार्यकाल खत्म, सभी 6 समितियां भंग

उत्तर प्रदेश की सभी 57,694 ग्राम पंचायतों में निवर्तमान ग्राम प्रधानों ने प्रशासक के रूप में अपना पदभार संभाल लिया है। अब अगले चुनाव होने तक निवर्तमान प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव मिलकर गांव का कामकाज संभालेंगे। हालांकि, इस नई व्यवस्था के लागू होते ही पंचायत के आंतरिक ढांचे में बड़ा बदलाव आया है:

  • सदस्यों का कार्यकाल समाप्त: राज्य के 7.32 लाख ग्राम पंचायत सदस्यों का 5 साल का कार्यकाल पूरी तरह समाप्त हो गया है।

  • सभी 6 समितियां भंग: प्रशासक समिति बनाने के बजाय सीधे प्रधान को प्रशासक नियुक्त करने के कारण ग्राम पंचायत की सभी छह समितियां (शिक्षा व स्वास्थ्य समिति, स्वच्छता समिति, जल प्रबंधन समिति और निर्माण कार्य समिति आदि) तत्काल प्रभाव से भंग हो गई हैं।

  • अधिकारों पर सीमाएं: पंचायती राज विभाग ने साफ किया है कि प्रशासक के रूप में निवर्तमान प्रधान केवल रूटीन (रोजमर्रा के) कार्य ही कर सकेंगे। वे कोई भी बड़ा नीतिगत (Policy) फैसला खुद नहीं ले सकते। किसी भी नीतिगत निर्णय का प्रस्ताव पहले जिला पंचायती राज अधिकारी (DPRO) के माध्यम से जिलाधिकारी (DM) को भेजा जाएगा और उनकी मंजूरी के बाद ही वह काम पास हो सकेगा।