
गर्मियों का मौसम आते ही बाजारों में रसीले आमों के साथ-साथ मीठी और रसीली लीची की बहार भी आ जाती है। लीची न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि यह सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। विटामिन C और पानी से भरपूर लीची शरीर को हाइड्रेटेड रखने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करती है।
लेकिन, क्या आप जानते हैं कि जिस लीची को आप बड़े चाव से खा रहे हैं, वह सच में प्राकृतिक (Natural) रूप से पकी है? आजकल मुनाफा कमाने के चक्कर में कई कारोबारी लीची को जल्दी पकाने के लिए केमिकल इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं और उसे ताजा व आकर्षक दिखाने के लिए ऊपर से चमकीला लाल रंग चढ़ा देते हैं। ऐसी केमिकल वाली लीची आपकी सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।
आइए जानते हैं उन 3 आसान और बेहतरीन ट्रिक्स के बारे में, जिनकी मदद से आप असली और नकली लीची में आसानी से फर्क कर सकते हैं।
असली और नकली लीची में मुख्य अंतर क्या है?
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असली लीची: प्राकृतिक रूप से पकी हुई असली लीची का रंग एक समान नहीं होता। यह लाल, गुलाबी, हल्की भूरी या कहीं-कहीं से हल्की हरी हो सकती है। इसके डंठल को हटाने पर कई बार छोटे-छोटे प्राकृतिक कीड़े भी मिल सकते हैं, जो इसके शुद्ध होने का प्रमाण हैं।
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नकली लीची: केमिकल या इंजेक्शन से पकाई गई लीची बाहर से तो एकदम परफेक्ट लाल और खूबसूरत दिखेगी, लेकिन इसमें कभी कीड़े नहीं लगेंगे। यह लीची बहुत जल्दी सड़ने लगती है और छीलने पर अंदर से काली या सड़ी-गली निकलती है।
केमिकल वाली लीची पहचानने के 3 आसान तरीके
1. रंग और चमक देखकर पहचानें (The Color Test)
लीची खरीदते समय सबसे पहले उसके छिलके के रंग पर ध्यान दें। अगर लीची का रंग मिला-जुला है (जैसे कहीं गुलाबी, कहीं लाल या भूरा), तो वह पूरी तरह से असली है। इसके विपरीत, यदि टोकरी में रखी सभी लीचियां एक जैसी गहरे लाल रंग की, अत्यधिक चमकदार और ग्लॉसी (Glossy) दिख रही हैं, तो समझ जाएं कि उन्हें आर्टिफिशियल रंग से रंगा गया है।
2. महक और स्वाद से जानें (Smell and Taste Test)
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सूंघ कर देखें: प्राकृतिक रूप से पकी हुई असली लीची के पास से एक मीठी और सौंधी खुशबू आती है। केमिकल वाली लीची में या तो कोई महक नहीं होती, या फिर उनमें से अजीब सी कड़वी या केमिकल जैसी गंध आती है।
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चख कर देखें: अक्सर दुकानदार आपको खुद एक अच्छी लीची छीलकर खिलाते हैं कि “खाकर देखिए कितनी मीठी है।” दुकानदार की दी हुई लीची खाने के बजाय, ढेर में से खुद कोई दूसरी लीची उठाएं और चखें। अगर स्वाद बेस्वाद, फीका या अजीब सा कड़वा लगे, तो उसे बिल्कुल न खरीदें।
3. पानी और टिश्यू पेपर टेस्ट (Water and Tissue Test)
यह सबसे सटीक तरीका है। यदि आपको लीची पर शक है, तो ये दो छोटे टेस्ट घर पर या दुकान पर ही करके देख सकते हैं:
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पानी का टेस्ट: लीची को पानी से भरे एक साफ ग्लास या कप में डालें। यदि लीची पर आर्टिफिशियल रंग चढ़ा होगा, तो वह पानी में छूटने लगेगा और पानी का रंग बदल जाएगा। असली लीची पानी में डालने पर कोई रंग नहीं छोड़ती।
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टिश्यू पेपर टेस्ट: अपने साथ एक टिश्यू पेपर रखें और उसे हल्का सा गीला कर लें। अब इस गीले टिश्यू को लीची के छिलके पर हल्के हाथों से रगड़ें। अगर टिश्यू पेपर पर लाल या गुलाबी रंग आ जाता है, तो साफ है कि लीची पर केमिकल वाला रंग लगाया गया है।
सेहत की सलाह: बाजार से लीची लाने के बाद उसे सीधे कभी न खाएं। इस्तेमाल करने से पहले लीची को कम से कम आधे से एक घंटे के लिए साफ पानी में भिगोकर छोड़ दें, ताकि उसके ऊपर जमा धूल और बाहरी केमिकल का असर काफी हद तक कम हो सके।
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