
केंद्रीय कर्मचारियों, रेलवे कर्मियों, रक्षा कर्मियों और लाखों पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन में संशोधन को लेकर 8वें वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) की प्रक्रिया अब निर्णायक दौर की ओर बढ़ रही है। 7वें वेतन आयोग की 10-वर्षीय समयावधि पूरी होने के बाद देश भर के लगभग एक करोड़ से अधिक सेवारत व सेवानिवृत्त कर्मचारियों की निगाहें आयोग के औपचारिक कदमों पर टिकी हैं।
कर्मचारी संगठनों, नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) जेसीएम और विभिन्न सेवा संघों की ओर से सौंपे गए ज्ञापनों के बीच आयोग की आंतरिक तैयारियों और सरकार के स्तर पर नीतिगत समीक्षा को लेकर 5 बड़े और महत्वपूर्ण अपडेट्स सामने आए हैं। इन अपडेट्स से यह स्पष्ट हो रहा है कि आने वाले समय में सरकारी कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी और बुजुर्ग पेंशनर्स की न्यूनतम पेंशन का ढांचा किस दिशा में बदलने वाला है।
8वें वेतन आयोग का सबसे प्रमुख और बहुप्रतीक्षित केंद्र बिंदु ‘फिटमेंट फैक्टर’ (Fitment Factor) है, जिसके आधार पर पे-मैट्रिक्स के सभी लेवल्स की संशोधित बेसिक सैलरी तय होती है। कर्मचारी यूनियनों और जेसीएम ने अपनी सिफारिशों में 2.86x से लेकर 3.0x तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है।
हालांकि, वित्तीय विश्लेषकों और मंत्रालयी सूत्रों के अनुसार, सरकारी खजाने पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभाव को संतुलित रखते हुए आयोग 2.28x से 2.57x के बीच फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश कर सकता है।
यदि 2.28x का फिटमेंट फैक्टर तय होता है, तो 7वें वेतन आयोग के न्यूनतम 18,000 रुपये बेसिक पे वाले लेवल-1 कर्मचारी का संशोधित मूल वेतन लगभग 41,040 रुपये हो जाएगा। वहीं, यदि 7वें वेतन आयोग के बराबर 2.57x फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो यह आंकड़ा बढ़कर सीधे 46,260 रुपये प्रति माह पर पहुंच जाएगा।
8वें वेतन आयोग का दूसरा सबसे बड़ा अपडेट देश के 65 लाख से अधिक पेंशनर्स और पारिवारिक पेंशनभोगियों से जुड़ा है। वर्तमान व्यवस्था में 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक पेंशन 9,000 रुपये प्रति माह निर्धारित है।
प्रस्तावित फिटमेंट फॉर्मूले के अनुसार, पेंशनर्स की नई बेसिक पेंशन सीधे उनके अंतिम आहरित मूल वेतन के 50 प्रतिशत अथवा मौजूदा पेंशन में फिटमेंट फैक्टर का गुणा करके निर्धारित की जाएगी।
यदि 2.28x से 2.57x का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो न्यूनतम पेंशन 9,000 रुपये से बढ़कर 20,500 रुपये से 23,130 रुपये प्रति माह के दायरे में आ सकती है। इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ पेंशनभोगियों को 80 वर्ष की आयु से मिलने वाले अतिरिक्त पेंशन भत्ते (Additional Pension) की शुरुआत को 75 वर्ष या 65 वर्ष की आयु से ही चरणबद्ध तरीके से लागू करने की पेंशनर एसोसिएशनों की मांग पर भी आयोग गंभीरता से विचार कर रहा है।
तीसरा बड़ा अपडेट मकान किराया भत्ते (House Rent Allowance – HRA) के पुनर्गठन को लेकर है। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत महंगाई भत्ता (DA) 50% पार होने के बाद HRA दरें ‘X’ श्रेणी के महानगरों के लिए 30%, ‘Y’ श्रेणी के शहरों के लिए 20% और ‘Z’ श्रेणी के कस्बों के लिए 10% पर चल रही हैं।
8वें वेतन आयोग के समक्ष कर्मचारी यूनियनों (NC-JCM व अन्य) ने मांग रखी है कि महानगरों में आसमान छूते किराए को देखते हुए HRA दरों को संशोधित कर 40% (X श्रेणी), 35% (Y श्रेणी) और 30% (Z श्रेणी) किया जाए। इसके साथ ही, कई कर्मचारी संगठनों ने शहरों के वर्गीकरण की समीक्षा हर 10 साल के बजाय हर 5 साल में करने का प्रस्ताव दिया है।
मूल वेतन में उछाल आने के कारण यदि HRA की बेस दरों में मामूली समायोजन भी होता है, तो भी कर्मचारियों को मिलने वाले कुल भत्ते में भारी शुद्ध वृद्धि देखने को मिलेगी।
चौथा महत्वपूर्ण अपडेट कर्मचारियों की सालाना वेतन वृद्धि (Annual Increment) की दर से संबंधित है। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों को हर वर्ष 3 प्रतिशत की दर से वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) दी जाती है।
कर्मचारी यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग को सौंपे अपने ज्ञापनों में दलील दी है कि 3% की वार्षिक दर खुदरा महंगाई और जीवन-यापन की लागत के अनुपात में काफी कम है, जिसके चलते 10 वर्षों में कुल वेतन बमुश्किल दोगुना हो पाता है।
यूनियनों ने मांग की है कि इस वार्षिक वेतन वृद्धि दर को बढ़ाकर न्यूनतम 5% से 7% तक किया जाना चाहिए। यदि इस प्रस्ताव पर आयोग सहमति जताता है, तो कर्मचारियों की सैलरी में केवल एकमुश्त फिटमेंट फैक्टर के समय ही नहीं, बल्कि हर साल नियमित रूप से उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
पांचवां और सबसे व्यावहारिक अपडेट वेतन आयोग की सिफारिशों के क्रियान्वयन की तारीख (Implementation Date) और बकाया (Arrears) से जुड़ा है। वेतन आयोगों के 10-वर्षीय नियमित चक्र के अनुसार 8वें वेतन आयोग की संदर्भ तिथि 1 जनवरी 2026 निर्धारित है।
ऐतिहासिक परंपरा के अनुसार, भले ही आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने, समीक्षा समिति के गठन और केंद्रीय कैबिनेट की अंतिम मंजूरी मिलने में कुछ महीनों का समय ले, लेकिन संशोधित वेतनमान और पेंशन 1 जनवरी 2026 की पूर्वव्यापी तारीख (Retrospective Effect) से ही लागू किए जाएंगे।
इसका सीधा अर्थ यह है कि अधिसूचना जारी होने की वास्तविक तारीख तक के अंतराल का पूरा अंतर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को एकमुश्त एरियर (Arrears) के रूप में बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाएगा।
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