
केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए गठित 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर हलचल काफी तेज हो गई है। देश के अलग-अलग शहरों में स्टेकहोल्डर्स, कर्मचारी संघों और पेंशनर एसोसिएशनों के साथ आयोग की महत्वपूर्ण चरणबद्ध बैठकें शुरू हो चुकी हैं। पुडुचेरी, चेन्नई और जयपुर के बाद अब चंडीगढ़ जैसे प्रमुख केंद्रों पर तीन दिवसीय उच्चस्तरीय बैठकों का दौर चल रहा है, जिसमें केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्तों, पेंशन और कार्य-संस्कृति से जुड़े अहम बदलावों पर व्यापक चर्चा की जा रही है। इन बैठकों के माध्यम से आयोग अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले सभी पक्षों के सुझावों को बारीकी से समझ रहा है।
न्यूनतम बेसिक सैलरी और फिटमेंट फैक्टर पर क्या हैं मुख्य प्रस्ताव?
कर्मचारी यूनियनों और विभिन्न संगठनों की ओर से वेतन ढांचे में सुधार के लिए कई बड़े और आकर्षक प्रस्ताव सामने रखे गए हैं। मौजूदा समय में बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन के खर्चों को देखते हुए कर्मचारी संगठनों ने फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 2.86 से लेकर 3.25 या उससे अधिक करने की मांग उठाई है। कुछ प्रमुख यूनियनों ने तो न्यूनतम बेसिक सैलरी को सीधे बढ़ाकर 68,000 रुपये से 69,000 रुपये तक करने का प्रस्ताव भी आयोग के समक्ष रखा है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी तक न्यूनतम वेतन या फिटमेंट फैक्टर का कोई अंतिम आंकड़ा तय नहीं किया गया है, लेकिन इन प्रस्तावों के कारण केंद्रीय कर्मचारियों की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।
पेंशन और पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर उठाई गई प्रमुख मांगें
वेतन के साथ-साथ पेंशनभोगियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर भी इन बैठकों में विशेष जोर दिया जा रहा है। विभिन्न पेंशनर एसोसिएशनों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को दोबारा बहाल करने की अपनी पुरानी मांग को फिर से प्रमुखता से उठाया है। इसके अलावा, पेंशन और फैमिली पेंशन की राशि में बढ़ोतरी, कम्यूटेशन रिकवरी के नियमों को सरल बनाने, और हर 5 साल पर वेतन व पेंशन संशोधन का नया और स्थायी तंत्र विकसित करने जैसी मांगें भी जोर-शोर से रखी गई हैं। जानकारों का मानना है कि इन सिफारिशों पर अंतिम निर्णय 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट आने और सरकार की हरी झंडी मिलने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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