
देशभर के उच्च शिक्षा और शोध क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे लाखों युवाओं के लिए एक बार फिर से असमंजस, तनाव और गुस्से का दौर शुरू हो चुका है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी [National Testing Agency (NTA)] द्वारा आयोजित की जाने वाली देश की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा यानी यूजीसी नेट [UGC NET Exam] को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। परीक्षा की तारीखों में अचानक किए गए बदलाव और री-एग्जाम [Re-Exam] की घोषणा ने छात्रों के पूरे शेडूल को तहस-नहस कर दिया है। छात्रों के सामने सबसे बड़ा और चुभने वाला सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर महज 24 दिन के छोटे से अंतराल में पूरे सिलेबस को दोबारा कैसे तैयार किया जाए, जबकि एक बार वे इस कठिन परीक्षा की पूरी मानसिक और शारीरिक तैयारी करके परीक्षा दे भी चुके थे। इस अप्रत्याशित फैसले के विरोध में देश भर के छात्र सड़कों पर उतर आए हैं और NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
NTA ऑफिस के बाहर छात्रों का फूटा गुस्सा और जोरदार प्रदर्शन
इस मनमाने फैसले से आक्रोशित होकर दिल्ली स्थित राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी [NTA Office Delhi] के बाहर देश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों छात्र और युवा एकत्र हो गए। छात्रों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और हाथों में तख्तियां लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि NTA की लचर व्यवस्था और बार-बार परीक्षाओं को रद्द करने या पुनर्निर्धारित करने की नीति ने उनके भविष्य को अनिश्चितता के अंधेरे में धकेल दिया है। कड़ाके की धूप और परेशानियों का सामना करते हुए छात्रों ने NTA अधिकारियों से मिलने और इस तुगलकी फरमान को वापस लेने की मांग की। सुरक्षा बलों और पुलिसकर्मियों को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी, क्योंकि छात्रों का यह गुस्सा अब एक बड़े छात्र आंदोलन का रूप लेता जा रहा है।
’24 दिन में तैयारी कैसे करें?’ छात्रों के सामने खड़ा हुआ विकराल संकट
छात्रों के सामने इस वक्त सबसे बड़ी व्यावहारिक और मानसिक समस्या यह है कि वे मात्र 24 दिनों के भीतर पोस्ट-ग्रेजुएशन स्तर के इतने विशालकाय सिलेबस को कैसे कवर करें। यूजीसी नेट परीक्षा में फर्स्ट पेपर (टीचिंग एंड रिसर्च एप्टीट्यूड) के साथ-साथ सेकंड पेपर (संबंधित विषय) का पाठ्यक्रम इतना व्यापक होता है कि सामान्य तौर पर इसकी गहन तैयारी के लिए महीनों की आवश्यकता होती है। अचानक से परीक्षा की तलवार सिर पर लटक जाने से छात्र रात-दिन जागकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा करते हुए लिखा है कि क्या परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को छात्रों की मानसिक स्थिति और उनकी सालों की मेहनत का कोई अंदाजा नहीं है? यह स्थिति न केवल अकादमिक तनाव को बढ़ा रही है, बल्कि युवाओं का सिस्टम से भरोसा भी उठा रही है।
प्रशासनिक लापरवाही और परीक्षा प्रणाली पर उठते गंभीर सवाल
यह कोई पहला मौका नहीं है जब NTA द्वारा आयोजित की जाने वाली किसी बड़ी परीक्षा को लेकर इस तरह की प्रशासनिक चूक या अव्यवस्था सामने आई हो। पिछले कुछ वर्षों में नीट, यूजीसी नेट और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के पेपर लीक होने, तकनीकी खामियों के कारण परीक्षा रद्द होने या अंतिम समय पर शेड्यूल बदलने की घटनाओं ने देश की संपूर्ण परीक्षा प्रणाली [Indian Exam System] की साख पर बट्टा लगा दिया है। शिक्षाविदों और विशेषज्ञों का यह मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में भविष्य के प्रोफेसर और शोधार्थी तैयार करने वाली परीक्षा को यदि इस तरह गैर-पेशेवर तरीके से संचालित किया जाएगा, तो देश की शिक्षा व्यवस्था का स्तर कैसे सुधरेगा। NTA की इस प्रकार की कार्यप्रणाली के कारण युवाओं का कीमती वक्त और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं, जिसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता।
छात्रों की मुख्य मांगें और भविष्य की अनिश्चितता का दौर
NTA कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और छात्र संगठनों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि एजेंसी ने उनके हितों को ध्यान में रखते हुए इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया या परीक्षा की तारीखों को आगे नहीं बढ़ाया, तो उनका यह विरोध प्रदर्शन और अधिक उग्र रूप ले लेगा। छात्र यह मांग कर रहे हैं कि उन्हें तैयारी के लिए कम से कम पर्याप्त समय दिया जाए या फिर परीक्षा के इस नए शेड्यूल को रद्द किया जाए। दूसरी तरफ, NTA के अधिकारियों की तरफ से अभी तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है, जिससे छात्रों में निराशा और गुस्सा और अधिक बढ़ गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि भारत के युवाओं को अपनी शैक्षणिक और करियर की राह बनाने के लिए कितनी भारी प्रशासनिक और मानसिक लड़ाइयां लड़नी पड़ रही हैं।
girls globe