पटना/भोजपुर। बिहार के विकास की रफ्तार को नई उड़ान देने वाली ‘पटना-भोजपुर-सासाराम’ फोरलेन सड़क परियोजना अब धरातल पर उतरने लगी है। लंबे इंतजार के बाद ओमान की दिग्गज कंपनी गल्फर इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन ने एनएचएआई (NHAI) के साथ एग्रीमेंट कर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी है। यह सड़क न केवल दूरी कम करेगी, बल्कि बिहार के कई जिलों की आर्थिक तस्वीर भी बदल देगी।
4 घंटे का सफर अब आधे समय में, कनेक्टिविटी होगी वर्ल्ड क्लास
वर्तमान में पटना से सासाराम जाने में लोगों को लगभग 4 घंटे का समय लगता है, लेकिन इस 120 किलोमीटर लंबे फोरलेन कॉरिडोर के तैयार होने के बाद यह दूरी महज 2 घंटे में सिमट जाएगी। यह बिहार का दरभंगा के बाद दूसरा ऐसा महत्वपूर्ण नेशनल हाईवे होगा, जो सीधे तौर पर पटना को दक्षिण बिहार और जीटी रोड से जोड़ेगा।
इस कॉरिडोर के बनने से पीरो, नौबतपुर, अरवल, सहार, हसन बाजार, संझौली और नोखा के लाखों लोगों को सीधी और तेज कनेक्टिविटी मिलेगी। साथ ही पटना से रोहतास और वहां से बनारस जाना पहले के मुकाबले कहीं अधिक सुगम हो जाएगा।
ओमान की कंपनी ने शुरू किया काम, मशीनों के साथ पहुंची टीम
एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार, भोजपुर और सासाराम के बीच जमीन अधिग्रहण का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। एजेंसी ने जिला प्रशासन के सहयोग से अपने अत्याधुनिक उपकरणों और मशीनों को मैदान में उतार दिया है। अब तक लगभग 32 किलोमीटर जमीन का अधिग्रहण पूरा हो चुका है। नियम के अनुसार, जैसे ही 80 फीसदी जमीन का कब्जा मिल जाएगा, वैसे ही सड़क निर्माण का विधिवत ढांचागत काम शुरू कर दिया जाएगा।
दो चरणों में होगा निर्माण: जानें आपका रूट
यह महापरियोजना दो हिस्सों में पूरी की जाएगी:
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पहला चरण: पटना से भोजपुर तक 46 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण।
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दूसरा चरण: आरा से सासाराम तक 74 किलोमीटर लंबे हिस्से का निर्माण।
यह सड़क पटना के सुअरा (सासाराम) तक जाएगी और रास्ते में एनएच-19, एनएच-319, एनएच-922 जैसे प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ेगी। खास बात यह है कि यह एक ‘एक्सेस-कंट्रोल्ड’ सड़क है, यानी इसमें प्रवेश और निकास के लिए सीमित पॉइंट होंगे, जिससे हादसों का खतरा कम होगा और रफ्तार बनी रहेगी।
एग्रीमेंट में देरी से अब 2029 तक पूरा होगा लक्ष्य
परियोजना के निदेशक अरविंद कुमार ने बताया कि ओमान से मंजूरी मिलने में देरी के कारण यह प्रोजेक्ट करीब 6 महीने लेट हो गया है। पहले इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन अब यह 2029 तक बनकर तैयार होने की उम्मीद है। हालांकि, काम शुरू होने से इलाके के लोगों में भारी उत्साह है, क्योंकि यह सड़क पटना से लेकर शाहाबाद और अरवल तक के विकास के लिए ‘लाइफलाइन’ साबित होगी।
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