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हेल्थ सप्लीमेंट बनाती थी कंपनी, लैब जांच में खुली पोल: FSSAI ने तुरंत सस्पेंड किया लाइसेंस, जानें सेहत से खिलवाड़ का पूरा मामला

देश में बॉडीबिल्डिंग, वजन घटाने और इम्यूनिटी बढ़ाने के नाम पर बिकने वाले हेल्थ सप्लीमेंट्स के बाजार पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बड़ा प्रहार किया है। बाजार में तेजी से अपनी पहुंच बना रही एक प्रमुख हेल्थ सप्लीमेंट निर्माता कंपनी के कारखाने और वितरण केंद्रों पर छापेमारी के बाद नियामक ने कंपनी के उत्पादन और बिक्री लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। प्राधिकरण को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कंपनी द्वारा बनाए जा रहे प्रोटीन पाउडर, मल्टीविटामिन और डाइटरी सप्लीमेंट्स सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। इसके बाद जब खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की एक विशेष टीम ने विनिर्माण इकाई से रैंडम सैंपल लेकर केंद्रीय मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला (NABL एक्रेडिटेड लैब) में जांच कराई, तो रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए उसने पूरे स्वास्थ्य और फिटनेस जगत को हिलाकर रख दिया।

जांच रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा पोषण सामग्री (न्यूट्रिशनल वैल्यू) और रासायनिक संरचना के स्तर पर हुआ। कंपनी के डिब्बों पर दावा किया जा रहा था कि उत्पाद में 100% शुद्ध व्हे प्रोटीन और प्राकृतिक तत्व मौजूद हैं, लेकिन लैब टेस्टिंग में प्रोटीन की मात्रा लेबल पर लिखे आंकड़े से आधी से भी कम पाई गई। इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह रही कि सप्लीमेंट्स में टेस्ट और शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए अस्वीकृत कृत्रिम मिठास (Artificial Sweeteners), अत्यधिक मात्रा में प्रिजर्वेटिव्स और कुछ ऐसे प्रतिबंधित स्टेरॉयडल कंपाउंड्स के अंश मिले, जो शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। एफएसएसएआई के अनुसार, उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए बिना किसी वैज्ञानिक क्लिनिकल ट्रायल के ‘इंस्टेंट मसल गेन’ और ‘फैट बर्नर’ जैसे भ्रामक दावे किए जा रहे थे, जो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 24 और 53 का सीधा उल्लंघन है।

कार्रवाई केवल रासायनिक असंतुलन तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि खाद्य निरीक्षकों को निर्माण इकाई में स्वच्छता (Hygiene) और निर्माण मानकों की धज्जियां उड़ती मिलीं। जांच के दौरान पाया गया कि फैक्ट्री में रॉ मैटेरियल को स्टोर करने के लिए उचित तापमान नियंत्रण की व्यवस्था नहीं थी, जिसके चलते कच्चे माल में फंगस और बैक्टीरिया पनपने का गंभीर खतरा बना हुआ था। कामगार बिना ग्लव्स, हेडगियर और सैनिटेशन प्रोटोकॉल के खुले हाथों से पैकेजिंग कर रहे थे। इसके अलावा, कंपनी के पास अपने प्रत्येक बैच की अनिवार्य इन-हाउस टेस्टिंग के कोई प्रामाणिक रिकॉर्ड नहीं मिले। एफएसएसएआई ने इसे ‘गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस’ (GMP) और ‘गुड हाइजीन प्रैक्टिस’ (GHP) का खुला उल्लंघन माना और जनस्वास्थ्य के गंभीर खतरे को देखते हुए ‘इम्प्रूवमेंट नोटिस’ देने के बजाय सीधे लाइसेंस सस्पेंड करने का कड़ा फैसला लिया।

वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञों और नेफ्रोलॉजिस्ट्स का कहना है कि जब लोग बिना सोचे-समझे गैर-मानक या मिलावटी हेल्थ सप्लीमेंट्स का सेवन करते हैं, तो उसका सबसे पहला और घातक असर लिवर और किडनी पर पड़ता है। बाजार में मिलने वाले घटिया प्रोटीन पाउडर में भारी धातुओं (जैसे सीसा, आर्सेनिक और कैडमियम) की अधिकता या अघोषित एनाबॉलिक स्टेरॉयड होते हैं, जो रक्तचाप को अचानक बढ़ा देते हैं और किडनी के फिल्टरेशन सिस्टम को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर सकते हैं। इसके सेवन से पाचन संबंधी गंभीर बीमारियां, हार्मोनल असंतुलन, बालों का झड़ना और हृदय गति का असामान्य होना जैसी जटिलताएं सामने आ सकती हैं। डॉक्टरों की साफ सलाह है कि किसी भी प्रकार का सप्लीमेंट शुरू करने से पहले किसी योग्य डाइटीशियन या चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

बाजार में बिक रहे हजारों ब्रांड्स के बीच आम उपभोक्ता को हमेशा सतर्क रहने की जरूरत है। सप्लीमेंट खरीदते समय सबसे पहले डिब्बे पर 14 अंकों का वैध FSSAI लाइसेंस नंबर जरूर देखें। ग्राहक FSSAI के ‘FoSCoS’ (Food Safety Compliance System) पोर्टल या ‘Food Safety Connect’ मोबाइल ऐप पर जाकर वह 14 अंकों का नंबर डालकर यह सत्यापित कर सकते हैं कि कंपनी का लाइसेंस सक्रिय है या निलंबित। दूसरा, हमेशा ब्रांड के आधिकारिक ऑथराइज्ड डीलर या सीधे कंपनी की वेबसाइट से ही उत्पाद खरीदें। तीसरा, पैकेजिंग पर लगे स्क्रैच कोड, क्यूआर कोड या होलोग्राम को स्कैन कर निर्माता के डेटाबेस से मिलान करें। चौथा, अत्यधिक सस्ते डिस्काउंट या चमत्कारी दावों के झांसे में आने से बचें और हमेशा पक्का जीएसटी बिल लें, ताकि मिलावट साबित होने पर कानूनी कार्रवाई की जा सके।