
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार (12 अक्टूबर 2026) के कारोबारी सत्र के दौरान हेल्थकेयर और अस्पताल कंपनियों के शेयरों में अचानक से बड़ी बिकوالी देखने को मिली। निवेशकों के बीच मची इस अफरातफरी के पीछे मुख्य कारण देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में चल रही वह अहम सुनवाई है, जिसमें दवाओं की कीमतों और अस्पतालों में दवा बिक्री पर मिलने वाले भारी-भरकम मार्जिन को लेकर कड़े सवाल उठाए गए हैं। इस नियामक दबाव के चलते दिग्गज हेल्थकेयर कंपनियों के शेयरों में ताबड़तोड़ बिकवाली दर्ज की गई है।
बाजार में क्यों मची बिकवाली और किन शेयरों में आई गिरावट
सोमवार को कारोबार के दौरान देश की प्रमुख अस्पताल चेन और स्वास्थ्य सेवा कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट का रुख देखा गया। निवेशकों की बिकवाली के दबाव के चलते फोर्टिस हेल्थकेयर (Fortis Healthcare) के शेयरों में गिरावट बढ़कर करीब 3.5% तक पहुंच गई। इसके अलावा, अपोलो हॉस्पिटल्स (Apollo Hospitals), मैक्स हेल्थकेयर (Max Healthcare) और एस्टर डीएम क्वालिटी केयर (Aster DM Quality Care) के शेयर भी 2% से 3% की कमजोरी के साथ कारोबार करते नजर आए। वहीं, उत्तर भारत की दूसरी सबसे बड़ी निजी अस्पताल चेन ‘पार्क मेडी वर्ल्ड’ (Park Medi World) के शेयरों में तो 6% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।
दवाओं की कीमतों और ट्रेड मार्जिन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियां
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सुप्रीम कोर्ट में चल रही वह कानूनी सुनवाई है, जिसमें अदालत ने अस्पतालों और दवा कंपनियों द्वारा वसूले जाने वाले ऊंचे मुनाफे पर गहरी नाराजगी जताई है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दवाओं की कीमतों और उनकी उपलब्धता के बीच एक संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। सरकार ने स्पष्ट किया कि उसका इरादा पूरे दवा बाजार को सीधे तौर पर नियंत्रित करने का नहीं है, क्योंकि भारत में दवाओं की कीमतें वैश्विक स्तर पर पहले से ही काफी कम हैं।
हालांकि, इस दलील पर तीखा सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आखिर पूरे दवा बाजार को नियंत्रित क्यों नहीं किया जा सकता है, और अदालत सरकार के हाथ मजबूत करने का काम कर रही है। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि दवा निर्माता कंपनियां रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के खर्च का हवाला देकर कीमतें तय करती हैं, लेकिन असलियत में कई जीवन रक्षक दवाएं उनके अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से कई गुना अधिक कीमत पर आम जनता को बेची जाती हैं। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों में कैंसर की दवाओं पर मिलने वाले भारी मार्जिन को ‘कहर’ करार देते हुए सभी दवाओं पर एक समान 16% ट्रेड मार्जिन लागू करने का सुझाव दिया था।
निवेशकों की नजरें अब 27 अक्टूबर की अगली सुनवाई पर टिकीं
अदालत की इन सख्त टिप्पणियों और नीतिगत बदलावों की आशंका के कारण निवेशकों का भरोसा डगमगाया है, जिसके चलते हेल्थकेयर शेयरों में यह करेक्शन देखने को मिल रहा है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 27 अक्टूबर 2026 की तारीख मुकर्रर की है। अब बाजार के जानकारों और निवेशकों की निगाहें पूरी तरह से इस बात पर टिकी हैं कि आगामी सुनवाई में सरकार और अदालत की तरफ से दवा उद्योग और अस्पतालों के मुनाफे को लेकर क्या अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं।
girls globe