‘हम बंटे थे, इसलिए कटे थे’: अयोध्या में सीएम योगी का सनातनियों को संदेश; बोले- संभल हिंसा में भी हिंदू ही थे निशाने पर

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान सनातन समाज को एकजुट होने का कड़ा संदेश दिया है। सीएम योगी ने देश के इतिहास, 1947 के विभाजन और हालिया संभल हिंसा का जिक्र करते हुए विरोधी ताकतों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि अतीत में हम जाति और भाषा के नाम पर आपस में बंटे थे, जिसके कारण हमें कटने का दर्द झेलना पड़ा था। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि आज भी पड़ोसी देशों में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं, इसलिए सनातनियों को अपनी एकजुटता बनाए रखनी होगी।

संभल और अयोध्या के इतिहास का किया जिक्र

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभल का उदाहरण देते हुए कहा कि साल 1526 में संभल के प्राचीन हरिहर मंदिर को तोड़कर वहां एक ढांचा खड़ा कर दिया गया था। यदि उस दौर में इसका प्रतिकार एकजुट होकर किया जाता, तो साल 1528 में अयोध्या में श्रीराम मंदिर को क्षतिग्रस्त करने और सनातनी समाज को अपमानित करने का दुस्साहस कोई नहीं कर सकता था। सीएम ने कहा कि आज अयोध्या और संभल दोनों का पुराना वैभव और गौरव वापस लौट रहा है। उन्होंने कहा कि कभी अयोध्या बिजली के लिए तरसती थी और सरयू के घाटों पर गंदगी फैली रहती थी, लेकिन आज बदली हुई अयोध्या में त्रेता और द्वापर युग का अहसास होता है।

‘आज भी चेहर बदलकर घूम रहे हैं कैकई और मंथरा’

विपक्ष पर जोरदार निशाना साधते हुए सीएम योगी ने कहा कि जिस तरह भगवान राम के राजतिलक के समय मंथरा और कैकई ने वनवास देने का काम किया था, आज भी समाज में वही मानसिकता वाले लोग सक्रिय हैं। केवल उनके चेहरे बदले हैं। जो लोग कभी रामभक्तों पर लाठी और गोलियां चलवाने से पीछे नहीं हटते थे और राम जन्मभूमि आंदोलन के खिलाफ कोर्ट में पूरी ताकत झोंक देते थे, आज वे खुद को रामभक्त बताकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। हमें इन ‘कालनेमियों’ को पहचान कर इनसे सावधान रहने की आवश्यकता है।

1947 के विभाजन और पड़ोसी देशों के हालातों पर प्रहार

विभाजन विभीषिका और देश के बंटवारे को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 में केवल देश का भौगोलिक विभाजन नहीं हुआ था, बल्कि सनातन राष्ट्र के रूप में बिखरने के कारण हिंदुओं और सिखों का भीषण कत्लेआम हुआ था। उन्होंने कहा कि आज भी पाकिस्तान और बांग्लादेश में निर्दोष हिंदुओं को काटा जा रहा है, लेकिन मानवाधिकार की दुहाई देने वाले लोग इस पर चुप्पी साध लेते हैं। यदि आजादी के समय देश में सरदार वल्लभभाई पटेल या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा नेतृत्व होता, तो इस प्रकार का नरसंहार कभी नहीं होता।