
शरीर में कोलेस्ट्रॉल एक मोम जैसा चिपचिपा पदार्थ होता है, जो कोशिकाओं के निर्माण और हार्मोन्स के संतुलन के लिए जरूरी है। लेकिन जब गलत खानपान, अनहेल्दी लाइफस्टाइल और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण खून में लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (LDL) यानी बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा हद से ज्यादा बढ़ जाती है, तो यह धमनियों (Arteries) की दीवारों पर चिपककर प्लाक बनाने लगता है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में ‘एथेरोस्क्लेरोसिस’ कहा जाता है। चूंकि कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर शुरुआत में कोई तेज दर्द या बुखार नहीं होता, इसलिए इसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है। हालांकि, जब नसों में ब्लॉकेज गंभीर स्तर पर पहुंच जाती है, तो शरीर 5 खास शारीरिक संकेत देने लगता है।
जब खून में लिपिड और फैट का स्तर बहुत अधिक हो जाता है, तो शरीर इसे त्वचा के नीचे जमा करना शुरू कर देता है। इसका सबसे पहला और स्पष्ट असर आंखों के आसपास दिखता है।
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ज़ैंथेलास्मा (Xanthelasma): ऊपरी और निचली पलकों के कोनों पर पीले रंग के छोटे-छोटे दाने या मोम जैसी गांठें उभरने लगती हैं।
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आर्कस सेनिलिस (Arcus Senilis): आंखों की पुतली (Cornea) के बाहरी किनारे पर एक सफेद या नीले-ग्रे रंग का गोल छल्ला नजर आने लगता है। यदि यह 45 वर्ष से कम उम्र में दिखे, तो यह हाई कोलेस्ट्रॉल का पुख्ता संकेत होता है।
जब धमनियों में कोलेस्ट्रॉल प्लाक जमने से पैरों और पिंडलियों तक खून का प्रवाह कम होने लगता है, तो इसे पेरीफेरल आर्टरी डिजीज कहा जाता है।
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चलने पर पिंडलियों में तेज खिंचाव (Claudication): थोड़ा सा चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर पैरों की मांसपेशियों में तेज ऐंठन और दर्द होना, जो बैठते ही ठीक हो जाए।
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पैरों का हमेशा ठंडा रहना और सुन्न होना: बिना किसी मौसम के बदलाव के तलवों और उंगलियों में झनझनाहट, सुन्नपन या लगातार ठंडा महसूस होना।
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पैरों के नाखूनों और बालों का झड़ना: ब्लड सप्लाई कम होने से पैरों की त्वचा चमकदार और पतली हो जाती है व नाखूनों की ग्रोथ धीमी पड़ जाती है।
कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ने पर दिल की कोरोनरी आर्टरीज संकरी हो जाती हैं, जिससे दिल की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त रक्त नहीं मिल पाता।
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सामान्य काम करते समय, तेज चलते हुए या तनाव में सीने के बीचों-बीच भारी दबाव, निचोड़न या जलन महसूस होना।
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यह दर्द कई बार सीने से उठकर बाएं कंधे, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैलने लगता है। इसे एनजाइना कहा जाता है, जो आने वाले हार्ट अटैक की सीधी पूर्व चेतावनी है।
यदि बिना किसी भारी शारीरिक श्रम के, जैसे सिर्फ दो मंजिल सीढ़ियां चढ़ने या तेज चलने पर आपकी सांस बुरी तरह फूलने लगती है, तो यह दिल पर अतिरिक्त दबाव का संकेत है। कोरोनरी धमनियों में रुकावट के कारण जब हृदय पूरे शरीर में खून पंप करने के लिए ज्यादा जोर लगाता है, तो फेफड़ों और मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की आपूर्ति धीमी हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को दिनभर बिना वजह कमजोरी, सुस्ती और भारी थकान महसूस होती रहती है।
धमनियों में फैट का थक्का जमने से जब नसों के जरिए नर्व्स (तंत्रिकाओं) तक सही मात्रा में पोषण और ऑक्सीजन नहीं पहुंचती, तो हाथ और पैरों की उंगलियों में ‘सुई चुभने’ जैसी झनझनाहट (Tingling Sensation) होती है। इसके अलावा, जब गर्दन की कैरोटिड धमनियों (Carotid Arteries) में कोलेस्ट्रॉल जमा होता है, तो दिमाग को मिलने वाला ब्लड फ्लो बाधित होता है, जिससे अचानक आंखों के आगे अंधेरा छाना, सिर घूमना या संतुलन बिगड़ने जैसी दिक्कतें आ सकती हैं।
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लिपिड प्रोफाइल ब्लड टेस्ट: 12 घंटे की फास्टिंग के बाद तुरंत लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराएं और टोटल कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल (LDL), एचडीएल (HDL) और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर जांचें।
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डाइट में बदलाव: रिफाइंड तेल, ट्रांस फैट, डीप फ्राइड स्नैक्स, रेड मीट और प्रोसेस्ड फूड को तुरंत बंद करें। डाइट में घुलनशील फाइबर (ओट्स, सेब, इसबगोल, हरी पत्तेदार सब्जियां) बढ़ाएं।
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नियमित कार्डियो वर्कआउट: रोजाना कम से कम 30 से 45 मिनट की तेज वॉक, जॉगिंग या साइकलिंग करें।
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डॉक्टर से परामर्श: यदि एलडीएल का स्तर 130 mg/dL या उससे अधिक है, तो कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह पर स्टेटिन (Statin) दवाइयां शुरू करने में देरी न करें।
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