
मौसम में बदलाव के साथ ही अक्सर लोगों को सर्दी, खांसी और जुकाम की शिकायत होने लगती है। आमतौर पर लोग इसे एक सामान्य वायरल संक्रमण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं और घरेलू नुस्खों या साधारण दवाओं से ठीक होने का प्रयास करते हैं। लेकिन मौजूदा समय में यह लापरवाही भारी पड़ सकती है क्योंकि कई बार यह सामान्य जुकाम नहीं बल्कि खतरनाक स्वाइन फ्लू यानी H1N1 वायरस का संक्रमण हो सकता है। स्वाइन फ्लू एक ऐसा श्वसन तंत्र से जुड़ा रोग है जो तेजी से फैलता है और यदि समय रहते इसकी पहचान न की जाए, तो यह गंभीर रूप ले सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि सामान्य सर्दी-जुकाम और स्वाइन फ्लू के बीच क्या अंतर है और इस खतरनाक वायरस की पहचान कैसे की जा सकती है।
सामान्य सर्दी-जुकाम और स्वाइन फ्लू में अंतर समझना क्यों है जरूरी
सामान्य सर्दी-जुकाम और स्वाइन फ्लू दोनों ही वायरल संक्रमण हैं, लेकिन दोनों के प्रभाव और गंभीरता में जमीन-आसमान का फर्क होता है। सामान्य सर्दी-जुकाम आमतौर पर हल्का होता है, जिसमें नाक बहना, हल्की छींकें आना और गले में हल्की खराश जैसी समस्याएं होती हैं जो कुछ ही दिनों में बिना किसी विशेष इलाज के ठीक हो जाती हैं। इसके विपरीत, स्वाइन फ्लू का वायरस (H1N1) शरीर पर बहुत तेजी से हमला करता है। इसके लक्षण काफी आक्रामक होते हैं और यह व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि समय पर सही पहचान न होने पर यह संक्रमण फेफड़ों तक पहुंचकर जानलेवा साबित हो सकता है।
H1N1 वायरस (स्वाइन फ्लू) के प्रमुख और शुरुआती लक्षण
स्वाइन फ्लू के संक्रमण की पहचान करने के लिए इसके लक्षणों को बारीकी से समझना बेहद जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को अचानक तेज बुखार (जो सामान्य दवाओं से आसानी से कम न हो), अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस हो, तो उसे सतर्क हो जाना चाहिए। इसके अलावा, शरीर में भयंकर दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव, लगातार सूखी खांसी, गले में तेज चुभन और सांस लेने में तकलीफ होना H1N1 वायरस के मुख्य संकेत हैं। कुछ मामलों में मरीजों को उल्टी और दस्त जैसी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं भी हो सकती हैं। यदि ये लक्षण दिखाई दें, तो इसे सामान्य फ्लू मानकर टालना नहीं चाहिए।
स्वाइन फ्लू की पहचान और डॉक्टर से जांच कराने का सही समय
सामान्य जुकाम और स्वाइन फ्लू के लक्षणों में भ्रम होना स्वाभाविक है, इसलिए सटीक पहचान के लिए मेडिकल टेस्ट ही एकमात्र उपाय है। जब किसी व्यक्ति में फ्लू के लक्षण सामान्य से अधिक दिनों तक बने रहें और हालत में सुधार न हो, तो डॉक्टर आरटी-पीसीआर (RT-PCR) या थ्रोट स्वॉब टेस्ट की सलाह देते हैं। इस लैब टेस्ट के जरिए यह स्पष्ट हो जाता है कि शरीर में H1N1 वायरस मौजूद है या नहीं। यदि समय पर जांच हो जाए और शुरुआती 48 घंटों के भीतर एंटीवायरल दवाएं शुरू कर दी जाएं, तो मरीज बहुत जल्दी स्वस्थ हो जाता है और किसी भी गंभीर खतरे से बचा जा सकता है।
स्वाइन फ्लू के संक्रमण से बचने के लिए जरूरी सावधानियां
सावधानी ही बचाव है, और स्वाइन फ्लू के मामले में यह बात पूरी तरह सच साबित होती है। इस संक्रमण से बचने के लिए अपने हाथों को बार-बार साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं या सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करें। भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचें और यदि जाना पड़े तो मास्क का उपयोग जरूर करें। खांसते या छींकते समय अपने मुंह और नाक को रुमाल या टिशू पेपर से ढकें। अपनी इम्युनिटी को मजबूत रखने के लिए पौष्टिक आहार लें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और यदि फ्लू के लक्षण नजर आए तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।
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