
देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ में आयोजित ध्वजारोहण समारोह से उपजा एक वीडियो अब देश के सबसे बड़े सियासी और कानूनी विवाद में तब्दील हो गया है। समारोह के दौरान भारत के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के गायन के वक्त कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कथित हाव-भाव और बातचीत को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर राष्ट्रगीत का जानबूझकर अनादर करने और उसके पूर्ण गायन को रोकने का गंभीर आरोप लगाया है।
विवाद उस समय भड़क उठा जब सोशल मीडिया पर कार्यक्रम का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें राष्ट्रगीत की प्रारंभिक पंक्तियां गाए जाने के बाद जब पूरा संस्करण आगे गाया जा रहा था, तब सोनिया गांधी कुछ इशारे करती और पास खड़े पार्टी नेताओं से बात करती दिखाई दीं। भाजपा नेताओं ने दावा किया कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने राष्ट्रगीत के पूर्ण गायन पर आपत्ति जताई और उसे बीच में ही रुकवाने की कोशिश की। वहीं, कांग्रेस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे भाजपा की दुर्भावनापूर्ण राजनीति और वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर बनाया गया झूठा प्रोपेगैंडा करार दिया है।
कर्नाटक में सोनिया गांधी के खिलाफ पुलिस शिकायतें: इन धाराओं में FIR की मांग
इस विवाद के तूल पकड़ते ही भारतीय जनता पार्टी ने इसे केवल बयानबाजी तक सीमित न रखकर कानूनी रूप से आगे बढ़ा दिया है। कर्नाटक के दो प्रमुख शहरों—बेंगलुरु और मंगलुरु—में भाजपा नेताओं और युवा मोर्चा द्वारा सोनिया गांधी के खिलाफ आधिकारिक पुलिस शिकायतें दर्ज कराई गई हैं:
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बेंगलुरु के मल्लेश्वरम थाने में शिकायत: भाजपा युवा मोर्चा (BJYM) के कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष और विधायक धीरज मुनिराजू के नेतृत्व में मल्लेश्वरम पुलिस स्टेशन में एक लिखित शिकायत दी गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सोनिया गांधी ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के गायन को बाधित करने का प्रयास किया, जिससे करोड़ों देशवासियों की राष्ट्रीय भावनाएं आहत हुई हैं। युवा मोर्चा ने भाजपा राज्य मुख्यालय के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन कर गांधी परिवार से देश की जनता से माफी मांगने की मांग की।
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मंगलुरु के उर्वा थाने में शिकायत: मंगलुरु में पूर्व भाजपा प्रवक्ता विकास पुत्तूर और पार्टी नेता राजगोपाल ने उर्वा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि भारत के संविधान और कानून के तहत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान ही सर्वोच्च आदर और सम्मान प्राप्त है, और इसका सार्वजनिक मंच पर अनादर करना दंडनीय अपराध है।
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लागू करने की मांग वाली धाराएं: शिकायतों में राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम (Prevention of Insults to National Honour Act) की धारा 3 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 195 और धारा 352 के तहत आपराधिक प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है। कानून के अनुसार, राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत के गायन को जानबूझकर रोकने या उसमें बाधा डालने पर 3 वर्ष तक के कारावास अथवा जुर्माने का प्रावधान है।
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पुलिस का रुख: पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शिकायतों को स्वीकार कर लिया गया है, लेकिन किसी भी प्रकार की आधिकारिक एफआईआर (FIR) दर्ज करने से पहले कानूनी विशेषज्ञों और वरिष्ठ अभियोजन अधिकारियों से विधिक राय (Legal Advice) ली जा रही है।
भाजपा का तीखा हमला: ‘तुष्टिकरण की राजनीति और राष्ट्रगीत से असहजता’
भाजपा के शीर्ष नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर चौतरफा हमला बोला है:
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बी. एल. संतोष का बयान: भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी. एल. संतोष ने सोशल मीडिया पर वीडियो क्लिप साझा करते हुए लिखा कि मां, बेटा और राष्ट्रीय अध्यक्ष तीनों ही संपूर्ण ‘वंदे मातरम’ के गायन से असहज दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कुछ मानसिकताएं 1947 से पहले जैसी थीं, वैसी ही 1947 के बाद भी बनी हुई हैं।
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अनुराग ठाकुर का प्रहार: पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसके नेता राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सामने असहज महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि यह किसी पार्टी का प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि पूरे देश के स्वाभिमान और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान के प्रति सम्मान का विषय है।
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गृह मंत्री अमित शाह का बयान: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राजस्थान में एक रैली के दौरान इस घटना का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वोट बैंक की लालच में उस ‘वंदे मातरम’ के महत्व को भुलाने की कोशिश की है, जिसके जयघोष के साथ देश के अनगिनत वीर क्रांतिकारी हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए थे।
कांग्रेस का पलटवार: ‘खड़गे जी के लिए कुर्सी मंगवा रही थीं सोनिया गांधी, भाजपा फैला रही है झूठ’
भाजपा के आक्रामक हमलों के जवाब में कांग्रेस पार्टी ने आधिकारिक बयान जारी कर सभी आरोपों को बेबुनियाद, हास्यास्पद और विकृत बताया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की:
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कुर्सी मंगवाने का था पूरा मामला: जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (उम्र 84 वर्ष) लंबे समय से मंच पर खड़े थे। उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए सोनिया गांधी मंच पर मौजूद सहायकों से उनके बैठने के लिए पीछे से एक कुर्सी लाने का अनुरोध कर रही थीं। इसका राष्ट्रगीत के गायन को रोकने से कोई लेना-देना नहीं था।
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पूरा राष्ट्रगीत गाया गया: कांग्रेस ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में राष्ट्रगीत का पूरा संस्करण सम्मानपूर्वक गाया गया और किसी भी नेता ने इसे बीच में नहीं रुकवाया।
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1937 का ऐतिहासिक संदर्भ (कलकत्ता अधिवेशन): जयराम रमेश ने इतिहास का हवाला देते हुए बताया कि 28 अक्टूबर 1937 को कलकत्ता में आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया था कि कांग्रेस के अधिवेशनों में ‘वंदे मातरम’ के पहले दो छंद (First Two Stanzas) गाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि तब से लेकर आज तक कांग्रेस सेवादल और पार्टी कार्यकर्ता हर राष्ट्रीय पर्व और अधिवेशन में इन्हीं पंक्तियों का पूरे गौरव के साथ गायन करते आ रहे हैं।
राजनीतिक और कानूनी विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रगीत को लेकर छिड़ा यह विवाद आने वाले संसद सत्र और आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच एक बड़ा भावनात्मक व राष्ट्रवादी मुद्दा बन सकता है। भाजपा इसे राष्ट्रवाद और ऐतिहासिक तुष्टिकरण की बहस से जोड़कर आक्रामक रुख अपनाए हुए है, जबकि कांग्रेस इसे भाजपा द्वारा वास्तविक जनमुद्दों से ध्यान भटकाने की एक सुनियोजित साजिश बता रही है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में खड़े होने या बैठने की व्यवस्था को लेकर की गई बातचीत को आपराधिक मंशा (Mens Rea) के तहत राष्ट्रगीत का जानबूझकर किया गया अपमान साबित करना कानूनन एक जटिल प्रक्रिया है। हालांकि, पुलिस द्वारा कानूनी सलाह लिए जाने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस मामले में औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज होती है या यह विवाद केवल एक बड़े सियासी टकराव तक ही सीमित रहता है।
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