
शेयर बाजार में अक्सर एक कहावत दोहराई जाती है—’रिस्क है तो इश्क है’ या यूं कहें कि ‘रिस्क है तो रिटर्न है’। म्यूचुअल फंड्स की दुनिया में यह बात सबसे सटीक तरीके से स्मॉल कैप कैटेगरी पर लागू होती है। पिछले एक दशक का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि जिन निवेशकों ने बाजार के भारी उतार-चढ़ाव, गिरावट और अनिश्चितता के दौर में भी धैर्य बनाए रखा, उन्हें स्मॉल कैप फंड्स ने अप्रत्याशित संपत्ति बनाकर दी है। लार्ज कैप और मिड कैप की तुलना में स्मॉल कैप कंपनियों के शेयर भले ही मंदी के समय तेजी से लुढ़कते हैं, लेकिन जब देश की अर्थव्यवस्था में तेज रफ्तार आती है, तो यही छोटी कंपनियां तेजी से बढ़कर मल्टीबैगर बन जाती हैं। भारतीय घरेलू बाजार में रिटेल निवेशकों की निरंतर बढ़ती भागीदारी और सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी (SIP) के दम पर स्मॉल कैप फंड्स ने 10 वर्षों में 20 से 23 प्रतिशत तक का सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न (CAGR) दर्ज किया है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी (SEBI) के वर्गीकरण के अनुसार, शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों को मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है। पहले से 100वें स्थान तक की कंपनियों को लार्ज कैप, 101 से 250वें स्थान तक की कंपनियों को मिड कैप और 251वें स्थान से नीचे की सभी कंपनियों को स्मॉल कैप माना जाता है। सेबी के अनिवार्य नियमों के तहत किसी भी स्मॉल कैप म्यूचुअल फंड को अपनी कुल संपत्ति का कम से कम 65 फीसदी हिस्सा इन 251वें पायदान से नीचे वाली कंपनियों के शेयरों में निवेश करना होता है। छोटी कंपनियों का कारोबार तेजी से बढ़ने की गुंजाइश तो रखता है, लेकिन साथ ही इनके पास नकदी की कमी, सेक्टर मंदी या लिक्विडिटी का गंभीर जोखिम भी होता है। यही वजह है कि जब बाजार गिरता है, तो स्मॉल कैप फंड्स में लार्ज कैप के मुकाबले ज्यादा गिरावट देखने को मिलती है। हालांकि लंबी अवधि में सही बिजनेस मॉडल वाली कंपनियां कई गुना वृद्धि दर्ज करती हैं, जिससे निवेशकों को कंपाउंडिंग का असाधारण लाभ मिलता है।
निप्पॉन इंडिया स्मॉल कैप फंड (Nippon India Small Cap Fund) इस कैटेगरी का सबसे बड़ा और सबसे निरंतर प्रदर्शन करने वाला फंड साबित हुआ है। इस फंड के डायरेक्ट प्लान ने पिछले 10 वर्षों में लगभग 22.5 से 22.8 प्रतिशत का वार्षिक चक्रवृद्धि रिटर्न दिया है। इस फंड का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 80 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है और इसने सैकड़ों उभरती हुई कंपनियों में विविधतापूर्ण निवेश किया है। दूसरे नंबर पर क्वांट स्मॉल कैप फंड (Quant Small Cap Fund) आता है, जिसने अपने डायनामिक और क्वांटिटेटिव मोमेंटम मॉडल के जरिए 10 वर्षों में करीब 20.2 से 20.5 प्रतिशत का सीएजीआर रिटर्न दिया है। तीसरे स्थान पर एक्सिस स्मॉल कैप फंड (Axis Small Cap Fund) का नाम आता है, जिसने लगभग 20.2 प्रतिशत का शानदार 10-वर्षीय रिटर्न दर्ज कराया है। एक्सिस का फोकस हमेशा से कम उतार-चढ़ाव और मजबूत फंडामेंटल वाले बिजनेस चुनने पर रहा है। चौथे स्थान पर एसबीआई स्मॉल कैप फंड (SBI Small Cap Fund) मौजूद है, जिसका 10 साल का सालाना रिटर्न लगभग 20.18 प्रतिशत रहा है। पांचवें स्थान पर एचडीएफसी स्मॉल कैप फंड (HDFC Small Cap Fund) आता है, जिसने लगभग 19.5 प्रतिशत से अधिक का 10-वर्षीय वार्षिक रिटर्न अपने निवेशकों को डिलीवर किया है।
कंपाउंडिंग की ताकत को समझने के लिए यदि कोई निवेशक 10 साल पहले किसी टॉप स्मॉल कैप फंड में 10,000 रुपये प्रति माह की एसआईपी शुरू करता, तो उसका गणित चौंकाने वाला होता। 10 वर्षों में निवेशक द्वारा जमा की गई कुल मूल राशि 12,00,000 रुपये होती। औसतन 21 से 22 प्रतिशत सीएजीआर के हिसाब से यह 12 लाख रुपये की पूंजी 10 साल के भीतर बढ़कर 38 लाख से 44 लाख रुपये के विशाल कॉर्पस में तब्दील हो जाती। वहीं अगर किसी ने 10 साल पहले 1 लाख रुपये की एकमुश्त रकम निप्पॉन इंडिया स्मॉल कैप जैसे फंड में लगाई होती, तो 22% से अधिक की चक्रवृद्धि दर से वह रकम आज बढ़कर 7 लाख रुपये से भी अधिक हो चुकी होती। यही वह वित्तीय शक्ति है जो छोटे निवेशकों को वेल्थ क्रिएशन के सफर में स्मॉल कैप की ओर आकर्षित करती है।
स्मॉल कैप में रिटर्न की चमक देखकर बिना सोचे-समझे सारा पैसा लगा देना वित्तीय दृष्टि से काफी नुकसानदेह हो सकता है। यह कैटेगरी उन निवेशकों के लिए बिल्कुल नहीं है जो 1 से 3 साल के कम समय के लिए पैसा लगाना चाहते हैं या जो अपने पोर्टफोलियो में 20 से 30 फीसदी की गिरावट देखकर घबरा जाते हैं। स्मॉल कैप में निवेश करते समय कम से कम 7 से 10 साल का नजरिया होना अनिवार्य है। इसके अलावा वैल्युएशन का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। जब बाजार अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर होता है, तब एकमुश्त भारी रकम लगाने से बचना चाहिए क्योंकि किसी भी करेक्शन के समय स्मॉल कैप में रिकवरी होने में लंबा वक्त लग सकता है।
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार एक संतुलित पोर्टफोलियो बनाने के लिए अपने कुल इक्विटी निवेश का 15 से 25 प्रतिशत हिस्सा ही स्मॉल कैप फंड्स में आवंटित करना चाहिए। शेष पूंजी को लार्ज कैप, फ्लेक्सी कैप और डेट फंड्स में रखना चाहिए ताकि समग्र पोर्टफोलियो स्थिर बना रहे। इसके अलावा स्मॉल कैप में एंट्री का सबसे सुरक्षित और प्रभावी जरिया सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) या सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) है। एसआईपी के जरिए निवेश करने से आपको रुपए कॉस्ट एवरेजिंग का लाभ मिलता है, जिसका मतलब है कि जब बाजार गिरेगा तब आपको अधिक यूनिट्स मिलेंगी और जब बाजार चढ़ेगा तो आपका कुल पोर्टफोलियो तेजी से मुनाफा कमाएगा। लंबी अवधि का अनुशासन, नियमित समीक्षा और सही एसेट एलोकेशन ही स्मॉल कैप के जरिए वित्तीय स्वतंत्रता पाने का सबसे कारगर मंत्र है।
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