स्टालिन का बड़ा फैसला! थलपति विजय की TVK संग गठबंधन को DMK ने किया खारिज, कांग्रेस पर लगाया पीठ में छुरा घोंपने का आरोप

राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय विपक्षी ‘INDIA’ (इंडी) गठबंधन के भीतर दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु से एक बहुत बड़ी राजनीतिक दरार सामने आ रही है। सूबे की सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने अपने पूर्व सहयोगी दल वीसीके (VCK) के उस हाई-प्रोफाइल प्रस्ताव को पूरी तरह से ठुकरा दिया है, जिसमें भाजपा (BJP) के खिलाफ देशव्यापी मोर्चे को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री थलपति विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) को गठबंधन में शामिल करने की वकालत की गई थी। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की पार्टी के इस सख्त रुख के बाद राज्य की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ दिल्ली तक के गठबंधन समीकरणों में भारी हलचल मच गई है।

क्या था थिरुमावलवन का केरल-बंगाल मॉडल? जिसे स्टालिन ने किया खारिज

इस पूरे राजनीतिक विवाद की शुरुआत तब हुई जब दलित केंद्रित दल वीसीके (VCK) के प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने एक विशेष चुनावी फॉर्मूला पेश किया। उन्होंने केरल और पश्चिम बंगाल के समकालीन राजनीतिक ढांचे का हवाला देते हुए प्रस्ताव रखा कि जैसे उन राज्यों में क्षेत्रीय स्तर पर धुर विरोधी पार्टियां भी राष्ट्रीय स्तर पर ‘INDIA’ गठबंधन के बैनर तले एक साथ खड़ी हैं, ठीक उसी तरह तमिलनाडु में भी आपसी मतभेद भुलाकर DMK और विजय की TVK को एक मंच पर आना चाहिए। इस रणनीतिक प्रस्ताव को जल्द ही कांग्रेस का भी पूरा समर्थन मिल गया, जिसने तर्क दिया था कि भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकजुटता को राज्य-स्तरीय प्रतिद्वंद्विता से ऊपर रखा जाना चाहिए।

DMK सांसद का तीखा हमला: ‘कांग्रेस ने सिर्फ मंत्री पद के लिए पीठ में छुरा घोंपा’

इस फॉर्मूले को सिरे से नकारते हुए DMK ने कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। एनडीटीवी (NDTV) से एक्सक्लूसिव बातचीत में कोइम्बटूर से DMK सांसद गणपति पी. राजकुमार ने कांग्रेस की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि कांग्रेस ने तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद केवल सूबे की सत्ता में मलाईदार मंत्री पद हासिल करने की लालसा में थलपति विजय की TVK के साथ गुप्त समझौता किया और DMK की पीठ में छुरा घोंपा है। सांसद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस गठबंधन के व्यापक हितों को नजरअंदाज कर रही है और अब स्टालिन नेतृत्व को मनाने के लिए वीसीके (VCK) को एक राजनीतिक दूत के रूप में इस्तेमाल कर रही है, जिसे पार्टी कभी स्वीकार नहीं करेगी।

तमिलनाडु में नहीं चलेगा बंगाल फॉर्मूला: बदला हुआ है राज्य का राजनीतिक भूगोल

पार्टी के आधिकारिक रुख को और अधिक स्पष्ट करते हुए सांसद गणपति पी. राजकुमार ने कहा कि केरल या पश्चिम बंगाल की जमीनी हकीकत तमिलनाडु से बिल्कुल अलग है। केरल में जहां लड़ाई कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) और वामपंथियों के एलडीएफ (LDF) के बीच बंटी है, और बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) व कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर साथ होकर भी राज्य में आमने-सामने हैं, वहीं तमिलनाडु का राजनीतिक परिदृश्य अभिनेता से राजनेता बने विजय की TVK के एक तीसरी बड़ी ताकत के रूप में उभरने से मौलिक रूप से बदल चुका है। उन्होंने कड़ा सवाल उठाया कि जिस TVK के पास वर्तमान में संसद में एक भी सांसद नहीं है, उसे ‘INDIA’ ब्लॉक में शामिल करने के लिए इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है? उन्होंने दोहराया कि क्षेत्रीय दलों को खत्म करने की कोशिश कर रही भाजपा ही DMK की मुख्य वैचारिक विरोधी है और पार्टी अपने सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं करेगी।