
देश के प्रमुख तिलहन उत्पादक राज्यों, विशेष रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के लाखों सोयाबीन किसानों के लिए यह सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील साबित होने जा रहा है। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और भावांतर भुगतान योजना (Bhavantar Bhugtan Yojana) के अंतर्गत अपनी उपज का उचित दाम पाने के लिए ऑनलाइन किसान पंजीयन की प्रक्रिया पूरी गति से चल रही है। राज्य कृषि एवं खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग ने स्पष्ट आधिकारिक निर्देश जारी करते हुए कहा है कि किसान आगामी 17 अक्टूबर 2026 तक हर हाल में अपना पंजीयन अनिवार्य रूप से पूरा करा लें। यदि कोई किसान निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पंजीकरण कराने से चूक जाता है, तो उसे सरकारी समर्थन मूल्य या मॉडल रेट के अंतर की भावांतर राशि का लाभ नहीं मिल पाएगा और मंडियों में औने-पौने दाम पर फसल बेचने के बाद भी सरकारी भुगतान सीधे तौर पर अटक जाएगा। कृषि विभाग ने साफ किया है कि 17 अक्टूबर की मध्यरात्रि के बाद ई-उपार्जन पोर्टल पर सोयाबीन पंजीयन की विंडो पूरी तरह बंद कर दी जाएगी और अंतिम तारीख को आगे बढ़ाने की कोई संभावना नहीं है।
बाजार में सोयाबीन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और निजी व्यापारियों द्वारा समर्थन मूल्य से कम दाम पर खरीद की आशंकाओं से किसानों को सुरक्षा कवच देने के लिए सरकार ने प्राइस डेफिसिट पेमेंट स्कीम (भावांतर योजना) और उपार्जन नीति को कड़ाई से लागू किया है। इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि जब पंजीकृत किसान कृषि उपज मंडी में अपनी सोयाबीन बेचता है, तो केंद्र सरकार द्वारा घोषित एमएसपी और उस दिन के औसत मंडी मॉडल रेट के बीच का जो घाटा (मूल्य अंतर) होता है, उसकी सीधी भरपाई राज्य सरकार द्वारा डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के जरिए किसान के बैंक खाते में भेजकर की जाती है। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया की पहली और अनिवार्य शर्त यह है कि किसान का नाम ई-उपार्जन पोर्टल पर वैध रूप से दर्ज होना चाहिए। यदि कोई अपंजीकृत किसान मंडी में अपनी फसल बेचता है, तो उसे भावांतर योजना का एक रुपया भी नहीं मिलेगा। इसलिए अपनी महीनों की मेहनत की फसल को घाटे से बचाने के लिए प्रत्येक किसान को समय रहते यह पंजीकरण सुनिश्चित करना जरूरी है।
किसानों की सुविधा और किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाने के लिए प्रशासन ने गांव-गांव में पंजीयन की दोहरी व्यवस्था की है। किसान अपनी सुविधा और पहुंच के अनुसार निम्नलिखित केंद्रों पर संपर्क कर सकते हैं:
-
पूरी तरह निःशुल्क पंजीयन केंद्र: राज्य सरकार ने ग्रामीण स्तर पर ग्राम पंचायत कार्यालयों, जनपद पंचायत सुविधा केंद्रों, तहसील कार्यालयों, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) और सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित केंद्रों पर पंजीयन की शत-प्रतिशत मुफ्त व्यवस्था की है। यहां किसानों से किसी भी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
-
सशुल्क ऑनलाइन कियोस्क केंद्र: जो किसान अपनी नजदीकी बाजार या कस्बे में पंजीयन कराना चाहते हैं, वे एमपी ऑनलाइन (MP Online) कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), लोक सेवा केंद्रों और अधिकृत साइबर कैफे पर जाकर भी आवेदन कर सकते हैं। सरकार ने कड़ा नियम बनाया है कि इन निजी और अधिकृत सेवा केंद्रों पर प्रति पंजीयन अधिकतम ₹50 से ज्यादा शुल्क किसी भी परिस्थिति में नहीं वसूला जा सकता। यदि कोई कियोस्क संचालक निर्धारित शुल्क से अधिक राशि की मांग करता है, तो किसान सीधे तहसील कार्यालय या सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
ई-उपार्जन केंद्र जाने से पहले किसानों को अपने सभी मूल दस्तावेज और उनकी प्रतिलिपियां व्यवस्थित कर लेनी चाहिए ताकि सर्वर और केंद्र पर किसी तकनीकी अड़चन का सामना न करना पड़े। पंजीयन के लिए अनिवार्य रूप से निम्नलिखित दस्तावेजों की दरकार होगी:
-
भूमि संबंधी रिकॉर्ड: जमीन की अद्यतन खसरा-खतौनी की नकल, जिसमें चालू वर्ष में बोई गई सोयाबीन की फसल का रकबा स्पष्ट रूप से दर्ज हो।
-
आधार कार्ड: किसान का मूल आधार कार्ड, जिसमें नाम और जन्मतिथि सही दर्ज हो।
-
सक्रिय मोबाइल नंबर: आधार कार्ड से लिंक चालू मोबाइल नंबर, जिस पर वेरिफिकेशन के लिए तत्काल ओटीपी (OTP) प्राप्त हो सके।
-
बैंक पासबुक की प्रति: बैंक खाते की स्पष्ट पासबुक या कैंसिल चेक, जिसमें खाता संख्या और आईएफएससी कोड साफ-साफ पढ़ा जा सके।
-
पहचान पत्र: किसान का वोटर आईडी कार्ड, राशन कार्ड या समग्र आईडी (यदि राज्य में लागू हो)।
इसके अतिरिक्त, जो किसान सिकमी (बटाईदार), कोटवार या वन पट्टाधारी हैं, उनके पंजीयन की विशेष व्यवस्था केवल सहकारी समितियों के केंद्रों पर रखी गई है, जहां राजस्व विभाग (तहसीलदार/पटवारी) द्वारा मौके पर भौतिक सत्यापन के बाद ही उनका आवेदन स्वीकार किया जाएगा।
अक्सर देखा जाता है कि किसान पंजीयन तो करा लेते हैं, लेकिन गलत या निष्क्रिय बैंक खाते की जानकारी देने के चलते महीनों तक उनका पैसा सरकारी खजाने में फंसा रह जाता है। इस बार कृषि विभाग ने बैंक खातों के लिए बेहद कड़े दिशा-निर्देश तय किए हैं:
-
पेमेंट्स बैंक पूरी तरह अमान्य: वित्तीय नियमों के तहत पेटीएम पेमेंट्स बैंक (Paytm), एयरटेल पेमेंट्स बैंक (Airtel) और फिनो पेमेंट्स बैंक (Fino) जैसे वॉलेट या स्मॉल फाइनेंस पेमेंट्स बैंकों के खाते पंजीयन में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। किसानों को केवल राष्ट्रीयकृत (जैसे SBI, PNB, BoB, Canara), शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक या जिला केंद्रीय सहकारी बैंक का ही खाता देना होगा।
-
संयुक्त खाता (Joint Account) मान्य नहीं: पंजीयन केवल उसी किसान के एकल (Single) बैंक खाते पर होगा जिसके नाम पर जमीन का खसरा दर्ज है। पति-पत्नी या भाइयों के संयुक्त खाते पोर्टल पर अस्वीकार कर दिए जाएंगे।
-
निष्क्रिय (Dormant) खाते की जांच: यदि खाते में पिछले छह महीने या साल भर से कोई लेनदेन नहीं हुआ है और खाता फ्रीज या इनऑपरेटिव हो चुका है, तो उसमें डीबीटी भुगतान नहीं आएगा। किसान तुरंत बैंक शाखा जाकर केवाईसी (KYC) कराकर खाता चालू करा लें।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए इस बार ई-उपार्जन पोर्टल पर एक आधुनिक तकनीक जोड़ी गई है। जैसे ही किसान का पंजीयन दर्ज होगा, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा जेआईटी (JIT) पोर्टल के माध्यम से किसान के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में ₹1 का प्रतीकात्मक परीक्षण लेनदेन (Test Transaction) भेजा जाएगा। जब बैंक से इस ₹1 के सफल जमा होने की पुष्टि हो जाएगी, तभी पोर्टल पर पंजीयन को ‘फाइनल अप्रूव्ड’ माना जाएगा। इसके साथ ही, पंजीयन और बाद में मंडी में फसल की तौल के समय किसान का आधार आधारित बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट या मोबाइल ओटीपी सत्यापन अनिवार्य होगा। यदि खसरे में दर्ज किसान के नाम और आधार कार्ड के नाम की स्पेलिंग में कोई बड़ा अंतर है, तो घबराने की जरूरत नहीं है; ऐसे प्रकरणों को तुरंत संबंधित तहसीलदार के पास ऑनलाइन भेजा जा रहा है, जहां से मैनुअल अप्रूवल मिलते ही पंजीयन स्वीकृत हो जाएगा। किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि वे 17 अक्टूबर की अंतिम तारीख और सर्वर डाउन होने का इंतजार किए बिना आज ही अपने नजदीकी केंद्र पर जाकर सोयाबीन पंजीयन की रसीद हासिल कर लें।
girls globe