
सुबह की पहली किरण के साथ नींद खुलना और बिस्तर से उठना एक सामान्य दिनचर्या का हिस्सा है, लेकिन अगर आंखें खोलते ही आपको पलकों पर कोई चिपचिपा पीला या हरा पदार्थ जमा हुआ मिले, तो इसे महज आम कीचड़ समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। चिकित्सा विज्ञान और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह के समय आंखों के कोनों में हल्का सा डिस्चार्ज आना प्राकृतिक हो सकता है, लेकिन इस चिपचिपे पदार्थ का रंग, गाढ़ापन और उसकी मात्रा आपके शरीर और आंखों की अंदरूनी सेहत के बारे में बहुत कुछ बयां करती है। कई बार यह साधारण एलर्जी या थकान का परिणाम होता है, तो वहीं कुछ खास रंग यह चेतावनी देते हैं कि आपकी आंखें किसी गंभीर बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण की चपेट में आ चुकी हैं। इस विशेष लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि सुबह उठने पर आंखों में मिलने वाला यह चिपचिपा पदार्थ किन गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत देता है और इसके रंग के आधार पर आपको कब डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
हमारी आंखें हर समय एक सुरक्षात्मक तरल या नमी का उत्पादन करती रहती हैं, जो धूल, मिट्टी और प्रदूषण के कणों को कॉर्निया तक पहुंचने से रोकता है। दिनभर जब हम पलकें झपकाते हैं, तो यह नमी और आंसू आंखों की सफाई करते रहते हैं। लेकिन जब हम रात को सोते हैं, तो हमारी पलकें लंबे समय तक बंद रहती हैं और पलकें झपकने की प्रक्रिया रुक जाती है। इस दौरान आंखों से निकलने वाला म्यूकस, तेल, मृत कोशिकाएं और धूल के कण आपस में मिलकर आंख के कोनों में जमा होने लगते हैं, जिसे सामान्य भाषा में कीचड़ या रिम कहा जाता है। हालांकि, यदि यह पदार्थ सामान्य मात्रा से बहुत ज्यादा गाढ़ा, चिपचिपा और अजीब रंग का होने लगे, तो इसका मतलब है कि आपकी लैक्रिमल ग्लैंड्स या आंख की झिल्ली में किसी प्रकार का इंफेक्शन या सूजन पैदा हो गई है, जिसे समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है।
आंखों में जमा होने वाले इस डिस्चार्ज का रंग ही वह मुख्य पैमाना है जो डॉक्टर को यह समझने में मदद करता है कि आपको किस तरह की समस्या है। यदि यह चिपचिपा पदार्थ गहरे पीले या हरे रंग का है, तो यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आपकी आंख में कोई गंभीर बैक्टीरियल या वायरल इंफेक्शन हो चुका है, जिसे मेडिकल भाषा में कंजंक्टिवाइटिस (Conjunctivitis) या साधारण बोलचाल में ‘आई फ्लू’ कहा जाता है। हरा या पीला रंग इस बात को दर्शाता है कि आपकी आंख का इम्यून सिस्टम संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया से लड़ने के लिए डब्ल्यूबीसी (White Blood Cells) भेज रहा है और मृत बैक्टीरिया व कोशिकाओं के मिलने से यह मवाद जैसा पदार्थ बन जाता है। इसके विपरीत, यदि यह डिस्चार्ज सफेद, पतला और झागदार है, तो यह किसी एलर्जी, कॉन्टेक्ट लेंस के गलत इस्तेमाल या आंख में सूखेपन (Dry Eye Syndrome) की ओर इशारा करता है। इन रंगों के बदलाव को समय पर भांप लेना आंखों की रोशनी और स्वास्थ्य दोनों के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है।
सुबह उठने पर आंखों का चिपकना कई अलग-अलग प्रकार की नेत्र समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। सबसे आम समस्या बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस होती है, जिसमें सुबह उठते वक्त दोनों आंखें इतनी बुरी तरह चिपक जाती हैं कि उन्हें खोलने के लिए गुनगुने पानी की पट्टी करनी पड़ती है। इसके अलावा, ब्लेफेराइटिस (Blepharitis) यानी पलकों के किनारों की सूजन भी इसका एक प्रमुख कारण है, जिसमें ऑयल ग्लैंड्स ब्लॉक हो जाती हैं और पलकों पर पपड़ी जैसी जमने लगती है। कई बार आंखों में जाने वाला कोई बाहरी कण या कॉर्नियल अल्सर भी इस तरह के मवाददार और चिपचिपे स्राव का कारण बन सकता है। उत्तर प्रदेश जैसे इलाकों में जहां धूल-मिट्टी, प्रदूषण और मौसम में बदलाव का सामना अक्सर करना पड़ता है, वहां इन आंखों के संक्रमण के मामले तेजी से देखे जाते हैं। यदि इस स्थिति में लापरवाही बरती जाए, तो कॉर्निया पर स्थायी प्रभाव पड़ सकता है और देखने की क्षमता कमजोर हो सकती है।
यदि आप भी सुबह उठने पर इस तरह की चिपचिपाहट और भारीपन का सामना कर रहे हैं, तो कुछ आसान सावधानियां बरतकर अपनी आंखों को सुरक्षित रख सकते हैं। सबसे पहले, अपनी गंदी उंगलियों या बिना धुले हाथों से बार-बार अपनी आंखों को छूने से पूरी तरह बचें, क्योंकि हाथों के जरिए बैक्टीरिया बहुत आसानी से आंख के संपर्क में आ जाते हैं। दिन में कई बार अपने चेहरे और आंखों को साफ, ठंडे पानी से धोएं। अगर आप मेकअप का इस्तेमाल करती हैं, तो रात को सोने से पहले उसे अच्छी तरह रिमूव कर लें ताकि मेकअप के कण आंखों की ग्रंथियों को ब्लॉक न कर सकें। अपने तौलिये, रुमाल या बिस्तर की चादर को हमेशा साफ रखें और किसी दूसरे व्यक्ति के साथ तौलिया साझा करने से बचें। यदि आंखों में लगातार दर्द, लालिमा, सूजन और यह चिपचिपा पदार्थ निकल रहा है, तो घरेलू नुस्खों के भरोसे रहने के बजाय किसी अच्छे नेत्र विशेषज्ञ (Ophthalmologist) से परामर्श करके डॉक्टर द्वारा दी गई एंटीबायोटिक आई ड्रॉप्स का ही इस्तेमाल करें, ताकि आपकी आंखें पूरी तरह सुरक्षित रह सकें।
girls globe