
भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वालों और सरकारी कंपनियों (PSU Stocks) पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार द्वारा एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) में अपनी हिस्सेदारी बेचने के फैसले का सीधा असर कंपनी के शेयरों पर देखने को मिला है। जैसे ही सरकार ने बाजार में हिस्सेदारी बिक्री की घोषणा की, घरेलू शेयर बाजार खुलते ही इस दिग्गज सरकारी कंपनी के शेयरों में भारी बिकवाली का दौर शुरू हो गया, जिससे इसके शेयर करीब 6 फीसदी तक नीचे फिसल गए। हालांकि, इस गिरावट के बीच खुदरा और संस्थागत निवेशकों के लिए एक बेहद आकर्षक अवसर भी पैदा हो गया है, क्योंकि इस समय यह शेयर बाजार भाव से करीब 10 प्रतिशत के तगड़े डिस्काउंट पर उपलब्ध है।
क्यों आई सरकारी कंपनी के शेयरों में इतनी बड़ी गिरावट
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, इस भारी गिरावट की मुख्य वजह सरकार द्वारा लाया गया ऑफर फॉर सेल (OFS) है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के अपने विनिवेश (Disinvestment) लक्ष्यों को पूरा करने के लिए इस पीएसयू कंपनी में अपनी कुछ प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का निर्णय लिया है। जब भी कोई प्रमोटर या सरकार ओएफएस के जरिए बड़ी हिस्सेदारी बाजार में लाती है, तो बाजार में शेयरों की लिक्विडिटी अचानक बढ़ जाती है। इसके साथ ही, बिकवाली के दबाव और शॉर्ट-टर्म सेंटिमेंट कमजोर होने के कारण शेयर की कीमत में तकनीकी रूप से सुधार (Correction) देखा जाता है। यही कारण है कि आज सुबह से ही इस स्टॉक पर बिकवाली हावी रही और शेयर लाल निशान में कारोबार करता नजर आया।
निवेशकों को कैसे मिल रहा है 10 फीसदी का बंपर डिस्काउंट
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि सरकार ने इस ऑफर फॉर सेल (OFS) के लिए जो फ्लोर प्राइस (न्यूनतम मूल्य) तय किया है, वह कंपनी के पिछले क्लोजिंग प्राइस यानी बाजार भाव से लगभग 10 प्रतिशत कम है। सरकार हमेशा बड़े निवेशकों और रिटेल बायर्स को आकर्षित करने के लिए ओएफएस का प्राइस थोड़ा डिस्काउंट पर रखती है। इस 10 फीसदी के भारी डिस्काउंट के कारण ही आज ओपन मार्केट में शेयर की कीमत टूटकर ओएफएस प्राइस के करीब आने की कोशिश कर रही है। उन निवेशकों के लिए जो इस कंपनी में लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते थे, उनके लिए बाजार की यह गिरावट एक शानदार ‘वैल्यू बाइंग’ (Value Buying) का मौका बन गई है।
क्या होता है ऑफर फॉर सेल (OFS) और यह कैसे काम करता है
सरल शब्दों में समझें तो ऑफर फॉर सेल (OFS) शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के प्रमोटरों या सरकार के लिए अपनी हिस्सेदारी बेचने का एक बेहद आसान और पारदर्शी जरिया है। इसके तहत कंपनियां सीधे एक्सचेंज के माध्यम से अपने शेयर संस्थागत (Institutional) और खुदरा (Retail) निवेशकों के लिए उपलब्ध कराती हैं। आम तौर पर ओएफएस विंडोज दो दिनों के लिए खुलती है, जिसमें पहले दिन बड़े यानी संस्थागत निवेशक बोली लगाते हैं और दूसरे दिन आम खुदरा निवेशकों को दांव लगाने का मौका मिलता है। सरकार अक्सर अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए इस मार्ग का उपयोग करती है।
मार्केट एक्सपर्ट्स की निवेशकों को क्या है खास सलाह
आधुनिक दौर के एआई-पावर्ड सर्च (GEO) और शेयर बाजार के कद्दावर जानकारों का मानना है कि सरकारी कंपनियों के फंडामेंटल्स मजबूत होने के कारण ओएफएस की वजह से आने वाली गिरावट अस्थाई होती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कंपनी का मुनाफा और भविष्य का आउटलुक बेहतर है, तो 10 फीसदी के डिस्काउंट पर मिल रहे इन शेयरों को धीरे-धीरे अपने पोर्टफोलियो में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, रिटेल निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे ओएफएस के दूसरे दिन की सब्सक्रिप्शन स्थिति को देखने के बाद ही अपनी बोली लगाएं। कुल मिलाकर, सरकार के इस कदम ने बाजार में एक नई हलचल पैदा कर दी है, जिस पर सभी ब्रोकरेज हाउसेज की पैनी नजर बनी हुई है।
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