समूहों को मत्स्य पालन से जोडते हुए गति देने के लिए अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश : उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य

केशव प्रसाद मौर्य ने शनिवार को मत्स्य पालन विभाग एवं उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में मत्स्य पालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती तथा महिला सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनाया जाए। उन्होंने कहा कि बैकयार्ड मत्स्य पालन जैसी नवाचार आधारित योजनाओं का व्यापक विस्तार करते हुए अधिक से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को इससे जोड़ा जाए तथा उन्हें आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, विपणन और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए अनेक अभिनव योजनाएं संचालित की जा रही हैं। बैकयार्ड मत्स्य पालन परियोजना इसी दिशा में एक सफल मॉडल के रूप में उभरी है, जिसने महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास, सामाजिक सम्मान और आर्थिक स्वावलंबन को भी नई पहचान दी है।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एवं मत्स्य निदेशालय की संयुक्त पहल के अंतर्गत प्रदेश के 10 जनपदों में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को बैकयार्ड मत्स्य पालन परियोजना से जोड़ा गया है। इसके तहत महिलाओं द्वारा अपने घर के निकट 10,000 लीटर क्षमता एवं 4 मीटर व्यास वाले आधुनिक बायोफ्लॉक टैंकों में सिंघी मछली का वैज्ञानिक ढंग से पालन किया जा रहा है। लगभग आठ माह की उत्पादन अवधि वाली यह तकनीक कम स्थान, कम पानी और कम लागत में अधिक उत्पादन सुनिश्चित कर रही है, जिससे महिलाओं की आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। श्री मौर्य ने कहा कि सिंघी मछली उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, फॉस्फोरस एवं अन्य आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होती है। कम वसा होने के कारण यह स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी है तथा बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं तथा बुजुर्गों के पोषण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि बायोफ्लॉक तकनीक के माध्यम से सिंघी मछली के उत्पादन में वृद्धि कर प्रदेश में पोषण सुरक्षा को भी सुदृढ़ बनाया जा रहा है।

उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस परियोजना का दायरा और बढ़ाया जाए तथा अधिक से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को इससे जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि जिन जनपदों में इस योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, वहां के सफल अनुभवों को अन्य जनपदों में भी लागू किया जाए, ताकि ग्रामीण परिवारों की आय में व्यापक वृद्धि सुनिश्चित हो सके।