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सपनों का आशियाना खरीदना हुआ महंगा, प्रमुख बैंकों ने बढ़ाए होम लोन की ब्याज दरें

अपने खुद के घर के सपने को पूरा करने की सोच रहे आम नागरिकों और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट (Repo Rate) और मौद्रिक नीति में किए गए बदलावों के बाद देश के बैंकिंग सेक्टर में उथल-पुथल मच गई है। देश के 5 प्रमुख और सबसे बड़े बैंकों ने अपने ग्राहकों को तगड़ा झटका देते हुए होम लोन (Home Loan Interest Rates) की ब्याज दरों में इजाफा कर दिया है।

ब्याज दरें बढ़ने का सीधा असर यह हुआ है कि जिन लोगों ने पहले से होम लोन ले रखा है, उनकी मासिक किस्त (EMI) बढ़ गई है, वहीं नए ग्राहकों के लिए भी घर खरीदना अब पहले की तुलना में काफी महंगा साबित होगा। महंगाई के इस दौर में होम लोन के महंगा होने से आम आदमी के घरेलू बजट पर एक बड़ा अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ना तय माना जा रहा है।

बैंकों द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश के जिन प्रमुख वित्तीय संस्थानों ने होम लोन की दरों में बढ़ोतरी की है, उनमें सरकारी और निजी क्षेत्र के दिग्गज बैंक शामिल हैं। भारतीय स्टेट बैंक (SBI), एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank), बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) और एक्सिस बैंक (Axis Bank) जैसे शीर्ष बैंकों ने अपने एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR) या मार्जिनल कॉस्ट बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में संशोधन किया है।

यदि किसी ग्राहक ने 20 साल के लिए 50 लाख रुपये का होम लोन ले रखा है, और ब्याज दरों में 0.25 से 0.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो जाती है, तो उनकी मंथली ईएमआई में सीधे तौर पर 1,500 रुपये से लेकर 3,000 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। साल भर के हिसाब से देखें तो यह अतिरिक्त बोझ हजारों रुपये बैठता है, जिससे घर खरीदारों के वित्तीय समीकरण पूरी तरह गड़बड़ा गए हैं।

जब भी बैंक होम लोन की ब्याज दरें बढ़ाते हैं, तो ग्राहकों के सामने दो मुख्य विकल्प होते हैं या तो वे अपनी मंथली ईएमआई (EMI) की राशि को बढ़ा लें ताकि लोन तय समयसीमा में ही खत्म हो सके, या फिर ईएमआई उतनी ही रहने दें और बैंक उनके लोन की अवधि (Loan Tenure) को बढ़ा दें। अधिकांश वित्तीय विशेषज्ञ यह सलाह देते हैं कि यदि आर्थिक स्थिति अनुमति दे, तो ग्राहकों को बढ़ी हुई ईएमआई का भुगतान करना चुनना चाहिए, क्योंकि लोन की अवधि लंबी होने से अंततः बैंक को बहुत भारी-भरकम ब्याज चुकाना पड़ जाता है।

बढ़ती ब्याज दरों के इस माहौल में लोन प्री-पेमेंट (Pre-payment) का विकल्प अपनाना भी एक समझदारी भरा कदम साबित हो सकता है, जिससे मूलधन (Principal Amount) तेजी से कम होता है और कुल ब्याज का बोझ काफी हद तक घट जाता है।

रियल एस्टेट जानकारों और बैंकिंग विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में वैश्विक आर्थिक संकेतकों, खुदरा मुद्रास्फीति (Inflation) के आंकड़ों और आरबीआई के अगले कदमों पर ही होम लोन की दिशा निर्भर करेगी। यदि आने वाले समय में महंगाई दर काबू में आती है, तो केंद्रीय बैंक दरों में राहत दे सकता है, लेकिन फिलहाल के लिए स्थिति टाइट बनी हुई है।

जो लोग नया घर खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे विभिन्न बैंकों के लोन ऑफर्स की तुलना करें, फिक्स्ड और फ्लोटिंग रेट्स के नफे-नुकसान को समझें और तभी किसी दीर्घकालिक वित्तीय समझौते पर हस्ताक्षर करें ताकि बजट असंतुलित न हो।