
हिंदू धर्म में सावन का महीना बेहद पवित्र और देवाधिदेव महादेव को समर्पित माना जाता है। इस दौरान शिव भक्त पूरी श्रद्धा और नियम के साथ शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करते हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में एक बड़ा सवाल और कन्फ्यूजन रहता है कि क्या शिवलिंग पर हल्दी चढ़ानी चाहिए या नहीं? कई लोग जानकारी के अभाव में शिवलिंग पर हल्दी अर्पित कर देते हैं, तो वहीं कुछ लोग इसे पूरी तरह वर्जित मानते हैं। आइए धर्म शास्त्रों और ज्योतिषीय मान्यताओं के आधार पर जानते हैं कि शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाना सही है या गलत।
क्यों नहीं चढ़ाई जाती है सीधे शिवलिंग पर हल्दी?
धार्मिक मान्यताओं और पूजा पद्धतियों के अनुसार, सीधे शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाने की परंपरा नहीं है। इसके पीछे दो मुख्य कारण बताए गए हैं। पहला यह कि भगवान शिव को एक तपस्वी, अघोरी और वैरागी देवता के रूप में पूजा जाता है, जबकि शिवलिंग उनके निराकार और पुरुष स्वरूप का प्रतीक है। इसलिए शिव जी को हमेशा शीतलता और सादगी प्रदान करने वाली चीजें जैसे गंगाजल, दूध, चंदन और बेलपत्र ही प्रिय हैं। दूसरा कारण यह है कि हल्दी का संबंध मुख्य रूप से गृहस्थ जीवन, वैवाहिक सुख, शुभता और मांगलिक कार्यों से होता है, जबकि शिव जी वैराग्य के प्रतीक हैं। हालांकि, रंगभरी एकादशी और महाशिवरात्रि जैसे विशेष अवसरों पर काशी विश्वनाथ मंदिर में शिव-पार्वती के विवाह उत्सव के दौरान भगवान को हल्दी अर्पित करने की परंपरा है।
क्या जलधारी या माता पार्वती के पास चढ़ा सकते हैं हल्दी?
अगर आपके मन में यह सवाल है कि क्या हल्दी का इस्तेमाल पूजा में बिल्कुल नहीं किया जा सकता, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। आप सीधे शिवलिंग पर भले ही हल्दी न चढ़ाएं, लेकिन शिवलिंग के ठीक नीचे बनी ‘जलधारी’ पर हल्दी अर्पित कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग की जलधारी को जगत जननी मां पार्वती का स्वरूप माना जाता है। चूंकि मां पार्वती और भगवान गणेश को हल्दी बेहद प्रिय है, इसलिए जलधारी के पास हल्दी अर्पित करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। इससे माता पार्वती और भगवान शिव दोनों का संयुक्त आशीर्वाद प्राप्त होता है।
शिवलिंग पर इन चीजों को चढ़ाना भी होता है पूरी तरह वर्जित
हल्दी के अलावा धर्म शास्त्रों में कुछ ऐसी चीजें भी बताई गई हैं, जिन्हें भूलकर भी शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए। भगवान शिव की पूजा में सिंदूर, कुमकुम, तुलसी के पत्ते और केतकी के फूल चढ़ाना पूरी तरह वर्जित माना गया है। इन सभी चीजों के पीछे अलग-अलग पौराणिक कथाएं और धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं, जिनका पालन करना हर शिव भक्त के लिए जरूरी माना जाता है। सावन के इस पवित्र महीने में यदि आप सही विधि-विधान और नियमों के साथ महादेव की पूजा करते हैं, तो आपकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं।
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