
भारतीय रियल एस्टेट मार्केट में अनिवासी भारतीयों (NRIs) और ओवरसीज सिटिजन्स ऑफ इंडिया (OCIs) की दिलचस्पी अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई है। डॉलर और गल्फ मुद्राओं के मुकाबले भारतीय रुपये की स्थिति और देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि ने विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए अपनी मातृभूमि में संपत्ति खरीदना बेहद फायदेमंद सौदा बना दिया है। एनआरआई निवेशक न केवल अपनी जड़ों से जुड़े रहने या भविष्य में वापसी की योजना के लिए, बल्कि शानदार कैपिटल एप्रिसिएशन (संपत्ति मूल्य वृद्धि) और मजबूत रेंटल इनकम के उद्देश्य से भारत के मेट्रो व टियर-2 शहरों में प्रीमियम आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों में भारी पूंजी लगा रहे हैं।
ये शहर बने प्रवासियों की पहली पसंद (लोकल मार्केट रुझान)
निवेश के लिहाज से देश के प्रमुख टेक और बिजनेस हब एनआरआई खरीदारों के सबसे पसंदीदा केंद्र बने हुए हैं। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) और बेंगलुरु में प्रीमियम व लक्जरी हाउसिंग सेगमेंट की सबसे ज्यादा मांग है। वहीं, पुणे (हिंजवड़ी, खराड़ी, बानेर) और हैदराबाद (गच्चीबाउली, हाईटेक सिटी, कोकापेट) अपने मजबूत आईटी कॉरिडोर और बेहतर एंट्री प्राइस के कारण एनआरआई निवेशकों को 3 से 5 प्रतिशत तक का आकर्षक रेंटल यील्ड दे रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर में गुरुग्राम का द्वारका एक्सप्रेसवे और नोएडा का सेक्टर 150 जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी के चलते शीर्ष हॉटस्पॉट बने हुए हैं। इसके अतिरिक्त नवी मुंबई, अहमदाबाद की गिफ्ट सिटी, कोलकाता, चेन्नई और कोयंबटूर जैसे शहरों में भी दीर्घकालिक रिटर्न और स्थिर किराये की आय के लिए प्रवासियों का रुझान तेजी से बढ़ा है।
निवेश का गणित: कहां और क्यों मिल रहा है रिकॉर्ड रिटर्न?
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय शहरों में 1.5 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले लक्जरी और प्रीमियम घरों की बिक्री में अप्रवासी भारतीयों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। एनआरआई निवेशक मुख्य रूप से रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टीज और प्रतिष्ठित डेवलपर्स की गेटेड कम्युनिटीज को तरजीह दे रहे हैं, जहां वर्ल्ड-क्लास एमेनिटीज और बेहतर मेंटेनेंस उपलब्ध हो। जहां मुंबई और गुरुग्राम जैसे स्थापित बाजारों में प्रॉपर्टी के दामों में तेज एप्रिसिएशन देखा जा रहा है, वहीं कोलकाता और हैदराबाद जैसे शहरों में moderate प्राइसेज और हाई ऑक्यूपेंसी के चलते रेंटल यील्ड काफी मजबूत बनी हुई है।
RBI और FEMA नियमों के तहत कानूनी व वित्तीय प्रक्रिया
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के दिशानिर्देशों के तहत कोई भी एनआरआई या ओसीआई भारत में आवासीय या वाणिज्यिक संपत्ति बिना किसी विशेष अनुमति के खरीद सकता है। हालांकि, उन्हें कृषि भूमि, फार्महाउस या बागान खरीदने की अनुमति नहीं होती है, जब तक कि वह विरासत में न मिली हो। विदेश में बैठे निवेशक पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) के जरिए भारत में किसी विश्वसनीय रिश्तेदार या प्रतिनिधि को अधिकृत कर सकते हैं। इसके साथ ही, लेनदेन के लिए NRE (Non-Resident External) या NRO (Non-Resident Ordinary) बैंक खातों का उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि संपत्ति खरीदने से पहले रेरा (RERA) पंजीकरण और लीगल टाइटल वेरिफिकेशन अवश्य पूरा कर लेना चाहिए।
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