
भारत की संस्कृति सदियों से ‘अतिथि देवो भव:’ के पावन सिद्धांत पर आधारित रही है, जहां देश में आने वाले हर विदेशी मेहमान को सम्मान और आत्मीयता से देखा जाता है। लेकिन हाल के दिनों में कई प्रमुख पर्यटन स्थलों से ऐसी शर्मनाक घटनाएं सामने आ रही हैं जो न केवल इस गौरवशाली छवि को धूमिल करती हैं, बल्कि पर्यटकों की सुरक्षा और गरिमा पर भी बड़े सवाल खड़े करती हैं। ऐसा ही एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक सार्वजनिक स्थल पर विदेशी महिला पर्यटक को देखकर लोग अपनी तहजीब और मर्यादा पूरी तरह भूल गए। महिला के साथ अनुचित तरीके से पेश आने, घूरने और बिना सहमति के सेल्फी लेने के लिए टूट पड़े लोगों को देखकर मौके पर मौजूद एक जागरूक भारतीय फोटोग्राफर ने मोर्चा संभाला और भीड़ की जमकर क्लास लगा दी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल क्लिप के अनुसार, एक विदेशी महिला पर्यटक भारत के ऐतिहासिक और दर्शनीय स्थल का भ्रमण करने पहुंची थी। वह शांति से वहां के वास्तुशिल्प और माहौल का आनंद ले रही थी, तभी स्थानीय पुरुषों और युवकों के एक समूह ने उसे घेर लिया। लोग न केवल बिना अनुमति के अपने मोबाइल कैमरे चालू करके उसके बेहद करीब आने लगे, बल्कि कई लोग जबरन सेल्फी लेने के लिए उस पर दबाव बनाने लगे। विदेशी महिला इस अचानक हुए घेराव से बेहद असहज और डरी हुई दिखने लगी। वह लगातार असहजता में मुस्कुराने या पीछे हटने की कोशिश कर रही थी, लेकिन भीड़ में से किसी ने भी उसकी निजता (Privacy) और व्यक्तिगत स्पेस का सम्मान नहीं किया।
उसी स्थल पर पेशेवर फोटोशूट कर रहे एक भारतीय फोटोग्राफर की नजर इस पूरी घटना पर पड़ी। महिला के चेहरे पर छाई घबराहट और बेबसी को देखकर फोटोग्राफर से रहा नहीं गया। वह तुरंत आगे आया और भीड़ के बीच ढाल बनकर खड़ा हो गया। उसने सख्त लहजे में लोगों को डांटते हुए पीछे हटने को कहा। फोटोग्राफर ने दो टूक शब्दों में भीड़ से पूछा कि क्या वे अपनी मां, बहनों या परिवार की महिलाओं के साथ किसी अजनबी द्वारा ऐसा बर्ताव बर्दाश्त करेंगे? उसने भीड़ को याद दिलाया कि किसी महिला की बिना मर्जी के उसके चेहरे के आगे कैमरा लगाना और उसे घेरना कोई बहादुरी नहीं बल्कि सरासर बदतमीजी और कानूनी रूप से गलत कृत्य है। फोटोग्राफर के कड़े और निडर रुख को देखकर जबरन तस्वीरें खींच रहे लोग झेंप गए और धीरे-धीरे वहां से खिसकने लगे।
जैसे ही इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और रेडिट पर अपलोड किया गया, यह जंगल की आग की तरह वायरल हो गया। लाखों व्यूज और हजारों कमेंट्स के साथ नेटिजन्स ने भीड़ की इस ओछी मानसिकता पर कड़ा प्रहार किया है। इंटरनेट यूजर्स ने एक स्वर में उस जागरूक फोटोग्राफर के साहस और समय पर की गई दखल की सराहना की है, जिसने एक विदेशी मेहमान को असहज स्थिति से बाहर निकाला। कई लोगों ने लिखा कि भारत को ऐसे ही जिम्मेदार नागरिकों की जरूरत है जो गलत होते देखकर मूकदर्शक बने रहने के बजाय आवाज उठाने की हिम्मत रखते हैं।
दूसरी तरफ, लोगों ने पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा इंतजामों और बुनियादी नागरिक समझ के अभाव पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। यूजर्स का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी विदेशी महिला पर्यटक को इस तरह की फूहड़ हरकतों का सामना करना पड़ा हो। ताजमहल, लाल किला, जयपुर और वाराणसी जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों पर अक्सर विदेशी नागरिकों, विशेषकर महिलाओं को अजीब नजरों से देखने, उनका पीछा करने और बिना सहमति तस्वीरें खींचने की शिकायतें आती रहती हैं। सोशल मीडिया पर लोग मांग कर रहे हैं कि पर्यटन पुलिस को ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाना चाहिए और बिना अनुमति पर्यटकों को परेशान करने वालों के खिलाफ भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
यह घटना केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के एक वर्ग में विदेशी पर्यटकों के प्रति दृष्टिकोण और बुनियादी शिष्टाचार की भारी कमी को उजागर करती है। किसी भी विदेशी नागरिक, विशेषकर महिला को एक सामान्य पर्यटक के रूप में देखने के बजाय उन्हें किसी ‘अजूबे’ या ‘फोटो ऑब्जेक्ट’ की तरह देखना बेहद संकीर्ण मानसिकता का परिचायक है। जब कोई विदेशी पर्यटक भारत आता है, तो वह यहां की समृद्ध विरासत, आतिथ्य और संस्कृति का अनुभव करने आता है। लेकिन जब उसके साथ इस प्रकार का असभ्य व्यवहार होता है, तो वह पूरी दुनिया में भारत के बारे में एक नकारात्मक और असुरक्षित संदेश लेकर लौटता है।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यटन स्थलों पर स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाने की तत्काल आवश्यकता है। ऐतिहासिक स्मारकों के आसपास गाइडों, दुकानदारों और आम जनता को यह सिखाया जाना चाहिए कि किसी भी पर्यटक की ‘कंसेंट’ यानी सहमति का सम्मान करना अनिवार्य है। इसके साथ ही, स्थानीय प्रशासन को संवेदनशील स्थानों पर ‘नो अनऑथराइज्ड फोटोग्राफी’ और ‘पर्यटकों को परेशान न करने’ से संबंधित चेतावनी बोर्ड लगाने चाहिए। समय रहते अगर ऐसी हरकतों पर कानूनी लगाम नहीं लगाई गई, तो यह देश की अंतरराष्ट्रीय साख और पर्यटन उद्योग दोनों के लिए बेहद नुकसानदेह साबित होगा।
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