
तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला है। विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने स्कूल और कॉलेज के छात्रों को विभिन्न राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों और आंदोलनों में शामिल होने से रोकने के लिए हाल ही में जो निर्देश जारी किए थे, उन्हें महज 24 घंटे के भीतर ही पूरी तरह से वापस ले लिया गया है। सरकार के इस त्वरित यू-टर्न के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
क्या था कॉलेजिएट एजुकेशन निदेशालय का आदेश
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कॉलेजिएट एजुकेशन निदेशालय (DCE) की ओर से यह निर्देश राज्य के सभी सरकारी आर्ट्स और साइंस कॉलेजों के प्रिंसिपलों को भेजा गया था। इस निर्देश का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं को राजनीतिक दलों या अन्य संगठनों द्वारा आयोजित किए जाने वाले विरोध-प्रदर्शनों से दूर रखना था। जानकारों का मानना है कि यह कदम वामपंथी दलों और कुछ अन्य राजनीतिक संगठनों द्वारा हाल ही में चलाए गए अभियानों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया था। हालांकि, विरोध के अधिकार को लेकर उठे सवालों के बाद सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार किया।
न्यायपालिका की टिप्पणी और आदेश वापसी
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान न्यायपालिका का रुख भी बेहद अहम रहा। देश के मुख्य न्यायाधीश ने हाल ही में अपने छात्र जीवन का हवाला देते हुए इस बात पर खास जोर दिया था कि छात्रों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का पूरा मौलिक अधिकार प्राप्त है, भले ही कई बार उनकी राय या दृष्टिकोण से हर कोई सहमत न हो। न्यायपालिका के इस वैचारिक रुख और बढ़ते प्रशासनिक दबाव के बाद मंगलवार को कॉलेज शिक्षा की संयुक्त निदेशक सिंथिया सेल्वी पी ने एक नया आदेश जारी कर स्पष्ट किया कि 17 अगस्त को दिए गए पिछले सभी निर्देशों को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जा रहा है।
स्कूल ठीक करो अभियान और छात्रों की सक्रियता
गौरतलब है कि छात्रों के आंदोलन और विरोध-प्रदर्शनों का यह दौर ऐसे समय में सामने आया था जब विभिन्न मुद्दों और मांगों को लेकर स्कूली छात्र मुखर नजर आ रहे थे। इस तरह के अभियानों में छात्रों की बढ़ती भागीदारी को नियंत्रित करने के लिए शुरुआती प्रशासनिक कदम उठाए गए थे, लेकिन कानूनी और संवैधानिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सरकार को अपने ही फैसले को महज 24 घंटे के भीतर वापस लेना पड़ा। राज्य में अब इस फैसले के बाद छात्रों के अधिकारों और प्रशासनिक नीतियों को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
girls globe