
भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या से प्रवर्तन निदेशालय (ED) और बैंकों ने अब तक ₹14,131 करोड़ से अधिक की वसूली कर ली है। जानिए ₹6,203 करोड़ के मूल कर्ज से लेकर ₹15,000 करोड़ तक की रिकवरी, जब्त शेयरों की बिक्री, बंबई हाई कोर्ट में माल्या के नए दावों और कानूनी देनदारियों का पूरा सच।
भारतीय बैंकिंग इतिहास और आर्थिक अपराधों की दुनिया में ‘किंग ऑफ गुड टाइम्स’ के नाम से मशहूर भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या का मामला सबसे ज्यादा चर्चित रहा है। साल 2016 में देश छोड़कर ब्रिटेन (UK) भागे विजय माल्या के खिलाफ भारतीय जांच एजेंसियों और बैंकों के कंसोर्टियम ने जो कानूनी और वित्तीय शिकंजा कसा, उसके नतीजे अब खुलकर सामने आ चुके हैं। संसद में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों से लेकर बंबई हाई कोर्ट की हालिया सुनवाइयों तक, माल्या मामले में पैसों की वसूली को लेकर एक बार फिर देश भर में बहस छिड़ गई है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस के नाम पर लिए गए हजारों करोड़ के कर्ज के बदले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक कितनी संपत्ति जब्त की है, बैंकों को कितना पैसा वापस मिला है और क्या माल्या का पूरा हिसाब-किताब चुकता हो चुका है या अभी भी कुछ बाकी है?
असल में विजय माल्या पर कितना था बैंकों का कर्ज?
इस पूरे मामले की जड़ें साल 2005 में शुरू हुई और 2012 में बंद हो चुकी ‘किंगफिशर एयरलाइंस’ (Kingfisher Airlines) से जुड़ी हैं। एयरलाइंस को घाटे से उबारने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के नेतृत्व वाले 17 बैंकों के एक कंसोर्टियम ने हजारों करोड़ रुपये का कर्ज दिया था।
जब कर्ज नहीं चुकाया गया, तो मामला ‘डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल’ (DRT) और अदालतों में पहुंचा। डीआरटी के शुरुआती मूल्यांकन के अनुसार, किंगफिशर एयरलाइंस पर मूल कर्ज लगभग ₹5,000 करोड़ था, जो ब्याज मिलाकर ₹6,203 करोड़ तय किया गया था। हालांकि, समय बीतने, पेनाल्टी लगने और बैंकों द्वारा चक्रवृद्धि ब्याज जोड़े जाने के बाद बैंकों का कुल दावा बढ़कर ₹9,000 करोड़ से ₹9,900 करोड़ के पार पहुंच गया था।
ईडी की मेगा कार्रवाई: ₹14,131 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त और रिकवरी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) और भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) के तहत विजय माल्या और उनकी कंपनियों की संपत्तियों को कुर्क (Attach) करने की आक्रामक मुहिम चलाई।
संसद में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ईडी ने विजय माल्या से जुड़ी संपत्तियों को बेचकर और शेयरों को लिक्विडेट करवाकर बैंकों को ₹14,131.60 करोड़ की भारी-भरकम राशि वापस (Restore) कराई है। इस ऐतिहासिक रिकवरी में मुख्य रूप से निम्नलिखित संपत्तियां शामिल रहीं:
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यूनाइटेड ब्रुअरीज (UBL) के शेयर: माल्या और उनकी कंपनियों के पास यूनाइटेड ब्रुअरीज लिमिटेड और यूनाइटेड स्पिरिट्स के जो शेयर मौजूद थे, उन्हें विशेष पीएमएलए अदालत की मंजूरी के बाद खुले बाजार में बेचकर ₹7,000 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई गई।
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आलीशान बंगले और रियल एस्टेट: मुंबई, बेंगलुरु, गोवा (किंगफिशर विला) और विदेशों में स्थित माल्या की कई लग्जरी प्रॉपर्टीज को कुर्क कर नीलाम किया गया।
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एयरक्राफ्ट, लग्जरी गाड़ियां और बैंक खाते: किंगफिशर एयरलाइंस के विमानों, महंगी विंटेज कारों और देश भर में मौजूद दर्जनों बैंक खातों में जमा फंड को सीज कर बैंकों के हवाले किया गया।
बंबई हाई कोर्ट में माल्या का नया दावा: ‘बैंकों ने बकाए से दोगुना वसूल लिया’
हाल ही में बंबई हाई कोर्ट में विजय माल्या के वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने एक याचिका में दावा किया कि उनके मुवक्किल की नागरिक और वित्तीय देनदारियां (Civil Liabilities) पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। माल्या की ओर से अदालत में दलील दी गई कि:
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बैंकों का शुरुआती वैधानिक दावा ब्याज समेत लगभग ₹6,203 करोड़ का था।
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ईडी और बैंकों के कंसोर्टियम ने उनकी संपत्तियों और शेयरों से लगभग ₹15,000 करोड़ की वसूली कर ली है।
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माल्या का तर्क है कि जब बैंक अपने मूल दावे से दोगुना पैसा वसूल चुके हैं, तो उनके खिलाफ चल रहे सिविल और रिकवरी मामलों को अब बंद कर दिया जाना चाहिए।
हालांकि, बंबई हाई कोर्ट के जस्टिस मिलिंद जाधव की बेंच ने साफ कर दिया कि केवल माल्या के दावे के आधार पर फैसला नहीं लिया जा सकता। अदालत ने एसबीआई (लीड बैंक) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी कर इस वसूली के वास्तविक आंकड़े और वर्तमान कानूनी स्थिति पर विस्तृत जवाब मांगा है।
क्या सच में माल्या का कर्ज खत्म हो गया या अभी भी कुछ बकाया है?
माल्या के इन दावों पर वित्तीय विशेषज्ञों और सरकारी सूत्रों का रुख बिल्कुल अलग है। सरकार और बैंकों के अनुसार, मामले के दो अलग-अलग पहलू हैं:
पहला पहलू है वित्तीय रिकवरी (Financial Recovery)। यह सच है कि ईडी द्वारा जब्त शेयरों के बढ़ते बाजार मूल्य के कारण बैंकों को मूल कर्ज से काफी ज्यादा पैसा हासिल हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को हुए नुकसान की लगभग शत-प्रतिशत भरपाई हो चुकी है।
दूसरा और सबसे अहम पहलू है आपराधिक और कानूनी देनदारी (Criminal Liability)। वित्तीय अधिकारियों का कहना है कि संपत्तियां जब्त करके पैसा वसूलना एक बात है, लेकिन बैंकों के साथ धोखाधड़ी (Fraud), मनी लॉन्ड्रिंग, फंड की हेराफेरी और जानबूझकर डिफॉल्ट (Willful Default) करने का आपराधिक मुकदमा अलग है। किसी अपराधी की संपत्ति जब्त होकर पैसा वसूल हो जाने से उसके द्वारा किए गए अपराध की गंभीरता खत्म नहीं हो जाती। यही कारण है कि भारत सरकार अभी भी यूके से माल्या के प्रत्यर्पण (Extradition) के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही है।
इसके अतिरिक्त, बैंकों का कहना है कि विभिन्न कंपनियों पर लगे टैक्स, वेंडर्स के बकाए, कर्मचारियों के अनपेड वेतन और कानूनी प्रक्रियाओं में हुए भारी खर्चों को जोड़ने पर देनदारियों का वास्तविक ब्योरा अभी भी विचाराधीन है।
भगोड़े आर्थिक अपराधियों से कुल वसूली का बड़ा परिदृश्य
विजय माल्या अकेला ऐसा मामला नहीं है जहां केंद्रीय जांच एजेंसियों ने रिकॉर्ड रिकवरी की है। सरकार द्वारा संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, देश के तीन बड़े भगोड़े आर्थिक अपराधियों—विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी—के मामलों में कुल ₹18,000 करोड़ से अधिक की संपत्तियां जब्त की गईं, जिनमें से बड़ा हिस्सा सरकारी बैंकों को लौटाया जा चुका है:
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विजय माल्या: ₹14,131.60 करोड़ की रिकवरी।
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मेहुल चोकसी एवं अन्य: ₹2,565.90 करोड़ की संपत्तियां रिस्टोर।
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नीरव मोदी: ₹1,052.58 करोड़ से अधिक की वसूली।
कानून का सख्त संदेश: भारत का पैसा लेकर भागना अब आसान नहीं
विजय माल्या मामले में हुई ₹14,000 करोड़ से अधिक की वसूली भारतीय बैंकिंग और न्याय प्रणाली के लिए एक बड़ी नजीर बन चुकी है। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम’ (FEOA) और ईडी के कड़े कानूनों के तहत देश से बाहर भाग जाने पर भी आरोपियों की देश-विदेश में मौजूद संपत्तियों को बेचकर जनता और बैंकों का पैसा वसूला जा सकता है। जहां सिविल मोर्चे पर बैंकों ने अपना पैसा वसूल लिया है, वहीं आपराधिक मामलों में अदालतें तय करेंगी कि माल्या को कानून के कटघरे में कब खड़ा किया जाएगा।
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