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वजन घटाने का फर्जी दावा पड़ा भारी: कंज्यूमर फोरम ने आयुर्वेदिक दवा कंपनी पर ठोका भारी जुर्माना, ग्राहकों को झांसा देने पर कड़ा एक्शन

देशभर के उपभोक्ताओं को चंद हफ्तों में कई किलो वजन घटाने का सब्जबाग दिखाकर घटिया उत्पाद बेचने वाली कंपनियों पर कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, मुंबई, जयपुर और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में आजकल सोशल मीडिया और इंटरनेट विज्ञापनों के जरिए ’15 दिन में 10 किलो वजन घटाएं’ जैसे लुभावने दावों की बाढ़ आ गई है। ऐसे ही एक मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए प्राकृतिक और आयुर्वेदिक उपचार के नाम पर मोटापा कम करने का झूठा वादा करने वाली कंपनी पर भारी जुर्माना लगाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और भरोसे के साथ खिलवाड़ करने वाले विज्ञापनों को किसी भी सूरत में अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस (अनुचित व्यापार व्यवहार) के तहत बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मामले के अनुसार पीड़ित ग्राहक ने टेलीविजन और सोशल मीडिया विज्ञापनों में कंपनी द्वारा किए गए लुभावने दावों से प्रभावित होकर कई महीनों का महंगा वजन घटाने वाला आयुर्वेदिक कोर्स खरीदा था। विज्ञापन में दावा किया गया था कि बिना किसी भारी एक्सरसाइज या सख्त डाइट के केवल इस हर्बल दवा के नियमित सेवन से कुछ ही हफ्तों में शरीर की अतिरिक्त चर्बी पिघल जाएगी। पीड़ित ने कंपनी के बताए अनुसार नियमित रूप से दवाओं का सेवन किया और लाखों रुपये खर्च कर दिए। निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी ग्राहक का वजन एक ग्राम भी कम नहीं हुआ, बल्कि उल्टे पेट दर्द, कमजोरी और पाचन तंत्र से जुड़े गंभीर साइड इफेक्ट्स सामने आने लगे। जब ग्राहक ने कंपनी के कस्टमर केयर से संपर्क कर रिफंड मांगा, तो कंपनी के प्रतिनिधियों ने जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया और टालमटोल शुरू कर दी।

कंपनी के अड़ियल रवैये से आहत होकर पीड़ित ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान कंपनी अपने उत्पादों की प्रभावशीलता और वजन कम करने के दावों के समर्थन में कोई भी ठोस क्लीनिकल ट्रायल रिपोर्ट या वैज्ञानिक प्रमाण पेश करने में पूरी तरह नाकाम रही। उपभोक्ता आयोग ने पाया कि कंपनी ने उपभोक्ताओं को गुमराह करने और अनुचित मुनाफा कमाने के उद्देश्य से भ्रामक दावे किए। अदालत ने सेवा में गंभीर कमी और अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस का दोषी ठहराते हुए कंपनी को आदेश दिया कि वह ग्राहक द्वारा दवाओं पर खर्च की गई पूरी रकम 9 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस करे। इसके साथ ही पीड़ित को हुए मानसिक उत्पीड़न के बदले लाखों रुपये का मुआवजा और अदालती खर्च वहन करने के अलावा उपभोक्ता कल्याण कोष में पेनाल्टी जमा कराने का सख्त निर्देश दिया गया।

उपभोक्ता संरक्षण कानून 2019 और केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, किसी भी उत्पाद या सेवा को लेकर भ्रामक प्रचार करना एक दंडनीय अपराध है। कानून के तहत जो कंपनियां झूठे दावों के जरिए जनता को गुमराह करती हैं, उन पर 10 लाख से लेकर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, यदि कोई सेलिब्रिटी या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बिना प्रोडक्ट की सत्यता परखे ऐसे उत्पादों का प्रचार करता है, तो उन पर भी विज्ञापन करने से बैन लगाने और आर्थिक दंड का प्रावधान है। आयुर्वेदिक, यूनानी या हर्बल के नाम पर बेची जाने वाली दवाओं में जादू-टोना या रातों-रात वजन घटाने और बीमारियां ठीक करने का दावा करना ‘ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट’ का भी सीधा उल्लंघन माना जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों का मानना है कि मोटापा कम करना एक वैज्ञानिक और शारीरिक प्रक्रिया है जो संतुलित आहार, शारीरिक व्यायाम और मेटाबॉलिज्म पर निर्भर करती है। किसी भी जादुई गोली, पाउडर या तेल से स्थायी रूप से वजन नहीं घटाया जा सकता। उपभोक्ताओं को इन जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • केवल सोशल मीडिया रील्स या विज्ञापनों में दिखाए गए ‘बिफोर-आफ्टर’ तस्वीरों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।

  • उत्पाद पर आयुष मंत्रालय, एफएसएसएआई (FSSAI) का वैध लाइसेंस नंबर और सामग्री की पूरी जांच करें।

  • कोई भी कंपनी यदि 100 प्रतिशत मनी-बैक गारंटी या निश्चित दिनों में वजन घटाने का गैर-वाजिब दावा करती है, तो सतर्क हो जाएं।

  • किसी भी सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले योग्य डायटीशियन या मेडिकल प्रैक्टिशनर से परामर्श अवश्य लें।

यदि किसी कंपनी या ब्रांड ने आपको भी झूठे दावों के जरिए ऐसा कोई उत्पाद बेचा है जिसका कोई असर नहीं हुआ, तो आप घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के ‘राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन’ (NCH) पोर्टल (consumerhelpline.gov.in) पर रजिस्टर किया जा सकता है या 1915 पर कॉल करके शिकायत लिखवाई जा सकती है। इसके अलावा ‘ई-दाखिल’ (edaakhil.nic.in) पोर्टल के माध्यम से आप बिना किसी वकील के सीधे अपने जिले के उपभोक्ता आयोग में ऑनलाइन केस दर्ज कर सकते हैं। उपभोक्ता अदालत का यह कड़ा फैसला यह साबित करता है कि उपभोक्ता जागरूक होकर आवाज उठाएं, तो भ्रामक दावों वाली बड़ी से बड़ी कंपनियों को भी घुटने टेकने पड़ते हैं।