
देश में परिसीमन और नए संसद सत्र की अटकलों के बीच राजनीतिक पारा चढ़ गया है। कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए मांग की है कि लोकसभा सीटों की संख्या को अगले 25 वर्षों तक मौजूदा 543 सीटों पर ही फ्रीज कर दिया जाए। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत पत्र लिखा है, जिसमें परिसीमन के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करने और एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की जोरदार वकालत की गई है।
2029 के चुनावों से लागू हो महिला आरक्षण
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि साल 2029 में होने वाले अगले आम चुनावों से ही मौजूदा 543 सीटों के दायरे में महिलाओं के लिए एक-तिहाई यानी 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। पार्टी का मानना है कि इसके लिए संसद की मौजूदा संख्या में किसी भी तरह की बढ़ोतरी करने की कोई आवश्यकता नहीं है। कांग्रेस कार्यसमिति की हालिया बैठक में भी इसी नीति पर मुहर लगाई गई थी, जिसे अब आधिकारिक रूप से प्रधानमंत्री के समक्ष उठाया गया है।
विशेष सत्र और परिसीमन बिल को लेकर गर्माई सियासत
यह पूरा घटनाक्रम संसदीय कार्यमंत्री किरेन रीजिजू के उस बयान के बाद सामने आया है जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि परिसीमन बिल को पारित कराने के लिए संसद का एक विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। मानसून सत्र के समाप्त होने के बावजूद संसद का सत्रावसान न किए जाने से राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि सरकार जल्द ही कोई बड़ा कदम उठा सकती है। इन संभावित राजनीतिक हलचलों को भांपते हुए कांग्रेस ने सरकार पर बिना चर्चा के बिल थोपने का प्रयास न करने की हिदायत दी है।
राजनीतिक दलों और राज्यों को मिले अध्ययन का पर्याप्त समय
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने पत्र में सरकार से मांग की है कि परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों और दस्तावेजों का अध्ययन करने के लिए सभी राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को पर्याप्त समय मिलना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि इस बेहद संवेदनशील और दूरगामी परिणाम वाले विषय पर जल्दबाजी दिखाने के बजाय एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए ताकि देश के सभी हिस्सों के हितों को सुरक्षित रखते हुए पारदर्शी और सर्वसम्मत निर्णय लिया जा सके।
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