
देश के विभिन्न न्यायाधिकरणों (Tribunals) के अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, कुशल और स्वतंत्र बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को लोकसभा में न्यायाधिकरण सुधार विधेयक 2026 को भारी हंगामे के बीच पारित कर दिया गया। विधि और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा सदन में पेश किए गए इस महत्वपूर्ण विधेयक का मुख्य उद्देश्य न्यायाधिकरणों की कार्यप्रणाली में सुधार करना और नियुक्तियों के लिए समान पात्रता के नियम तय करना है।
क्या है नया न्यायाधिकरण सुधार विधेयक 2026 और इसका स्वरूप
सदन में पेश किए गए इस नए विधेयक के तहत एक राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग (National Tribunal Commission) के गठन का प्रावधान किया गया है। इस नए आयोग का मुख्य मुख्यालय देश की राजधानी नई दिल्ली में स्थापित किया जाएगा। इस आयोग की संरचना बेहद संतुलित और पेशेवर रखी गई है, जिसमें कुल 5 सदस्य होंगे:
-
1 अध्यक्ष: सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज या किसी उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश इस पद को संभाल सकेंगे।
-
4 अन्य सदस्य: इनमें दो न्यायिक (Judicial) और दो तकनीकी (Technical) सदस्य शामिल होंगे।
इस आयोग के गठन से साल 2021 का पुराना अधिनियम स्वतः समाप्त हो जाएगा, जिससे नियुक्तियों को लेकर एक नया और उन्नत कानूनी ढांचा तैयार होगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और सुधारों की पृष्ठभूमि
इस नए कानून की आवश्यकता क्यों पड़ी, इस पर सरकार का स्पष्ट पक्ष सामने आया है। दरअसल, इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम 2021 के कई प्रावधानों को रद्द कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में टिप्पणी की थी कि वे प्रावधान शक्तियों के पृथक्करण और न्यायिक स्वतंत्रता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने ही एक स्वतंत्र राष्ट्रीय आयोग के गठन का निर्देश दिया था, जिसमें उच्च पेशेवर विशेषज्ञता हो और जो नियुक्तियों के लिए पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया का पालन करे। सरकार का यह भी कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रशासनिक सुधारों की श्रृंखला में यह एक अहम मील का पत्थर है, जिससे न्यायाधिकरण व्यवस्था और अधिक मजबूत बनेगी।
लोकसभा में भारी हंगामे के बीच हुआ बिल पास
विपक्ष के भारी हंगामे और नारेबाजी के साए में यह विधेयक बिना किसी लंबी चर्चा के सीधे लोकसभा में पास हो गया। विपक्षी सांसद अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी और विभिन्न स्थानों पर छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे थे। इसके बावजूद, सरकार ने इस सुधार को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखते हुए विधायी प्रक्रिया को पूरा किया। सरकार का साफ मानना है कि इस नए आयोग के अस्तित्व में आने से न्यायाधिकरणों के कार्यक्षेत्र में कोई बदलाव नहीं आएगा, बल्कि उनकी चयन और नियुक्ति प्रक्रिया में अभूतपूर्व दक्षता और पारदर्शिता आएगी।
girls globe